सोनिया गांधी की देशभक्ति पर सवाल 'राजनीतिक स्टंट': NCP(SP) के नसीम सिद्दीकी का BJP पर हमला
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी ने 18 अगस्त 2025 को मुंबई में भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला और कहा कि सोनिया गांधी की देशभक्ति पर सवाल उठाना एक सुनियोजित 'राजनीतिक स्टंट' है। सिद्दीकी ने यह भी कहा कि BJP की नवगठित 65 सदस्यीय टीम में 50-51 नए चेहरे लाना महज दिखावा है — 'बोतल वही है, बस सामान बदला है।'
सोनिया गांधी की देशभक्ति पर विवाद
सिद्दीकी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'सोनिया गांधी की देशभक्ति पर किसी भी तरह से सवाल नहीं उठाया जा सकता। इटली से होने के बावजूद जब वह भारत आईं और राजीव गांधी से शादी की, तो उन्होंने भारतीय परंपराओं को पूरी तरह अपनाया। वह इस देश में भारतीय संस्कृति के अनुसार रह रही हैं।' उन्होंने BJP पर आरोप लगाया कि यह एक सोची-समझी रणनीति है।
सिद्दीकी ने यह भी कहा कि जो नेता सोनिया गांधी को निशाना बना रहे हैं — जैसे कि कुमारस्वामी — उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि उनके पिता भी कांग्रेस के समर्थन से ही देश के प्रधानमंत्री बने थे।
वंदे मातरम विवाद पर रुख
सिद्दीकी ने 'वंदे मातरम' को अनिवार्य बनाने की BJP की कोशिश को असंवैधानिक बताया। उन्होंने कहा, 'संविधान में कहीं भी यह नहीं लिखा है कि वंदे मातरम पढ़ना अनिवार्य हो। यह विवाद आज़ादी के समय से ही चला आ रहा है।' उनके अनुसार, BJP सरकार इसे स्कूलों से लेकर विश्वविद्यालयों और संसद से लेकर विधानसभाओं तक थोपने की कोशिश कर रही है।
BJP की नई टीम पर तंज
BJP के हालिया संगठनात्मक फेरबदल पर तंज कसते हुए सिद्दीकी ने कहा, '65 लोगों की नई टीम में 50-51 नए चेहरे लाए गए हैं, लेकिन इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। बोतल वही है, बस उसके अंदर का सामान बदला जा रहा है।' उन्होंने यह भी कहा कि यह कवायद BJP की युवाओं को आकर्षित करने की कोशिश है, क्योंकि 'सीजेपी आंदोलन' की वजह से देश के नौजवान पार्टी से दूर हो गए हैं।
राजनीतिक संदर्भ
यह बयान ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र की राजनीति में विपक्षी गठबंधन और BJP के बीच तनाव चरम पर है। NCP (SP) महाविकास अघाड़ी का हिस्सा है और BJP के खिलाफ लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए है। सिद्दीकी का यह बयान पार्टी की उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
आगे क्या
सिद्दीकी ने आशंका जताई कि BJP की यह पुनर्गठन कवायद संगठनात्मक रूप से कोई बड़ा बदलाव नहीं लाएगी। राजनीतिक विश्लेषकों की नज़र इस पर होगी कि BJP की नई टीम महाराष्ट्र में पार्टी की जमीनी स्थिति को कितना बदल पाती है।