80वें स्वतंत्रता दिवस पर एमके स्टालिन का आह्वान: बहुलवाद, समानता और प्रगति से बनेगा नया भारत
सारांश
मुख्य बातें
द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के अध्यक्ष और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने 15 अगस्त 2026 को भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए राष्ट्र से एकता, समानता और बंधुत्व की राह पर चलने का आग्रह किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए संदेश में नागरिकों से प्रतिगामी प्रवृत्तियों को नकारते हुए एक समावेशी और प्रगतिशील भारत के निर्माण की दिशा में सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया।
स्टालिन का संदेश: क्या कहा
स्टालिन ने अपने संदेश में कहा, "भारत को अपनी बहुलवादी प्रकृति और राष्ट्रीय एकता को बनाए रखते हुए प्रतिगामी प्रवृत्तियों और अप्रचलित प्रथाओं को अस्वीकार करना चाहिए।" उन्होंने आगे कहा, "आइए हमारा भारत प्रतिगामी प्रवृत्तियों और पुरातन प्रथाओं को जड़ से उखाड़ फेंके और गर्व से बहुलवाद और एकता को कायम रखे।"
DMK नेता ने यह भी रेखांकित किया कि ज्ञान, ऊर्जा और संवैधानिक मूल्यों के प्रति साझा प्रतिबद्धता ही भारत के भविष्य की नींव बनेगी। उन्होंने कहा, "हमारे राष्ट्र की उज्ज्वल भविष्य की यात्रा सफल हो, जहां लाखों लोगों के सपने साकार हों। आइए, ज्ञान और ऊर्जा से कल का निर्माण करें और समानता, बंधुत्व, प्रगति और मानवता के मूल्यों के साथ मिलकर आगे बढ़ें।"
DMK की विचारधारा और संदेश का संदर्भ
स्टालिन का यह संदेश विशेष रूप से सामाजिक न्याय और समावेशिता पर केंद्रित रहा, जो DMK की दीर्घकालिक राजनीतिक विचारधारा के मूल में है। बहुलवाद की रक्षा और प्रतिगामी प्रथाओं को नकारने की उनकी अपील पार्टी के उस रुख को दोहराती है जो विविधता, लोकतांत्रिक मूल्यों और समान अवसरों पर जोर देती है।
गौरतलब है कि यह संदेश ऐसे समय आया जब पूरे देश में 80वें स्वतंत्रता दिवस को देशभक्ति की भावना के साथ मनाया जा रहा था और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे थे।
चेन्नई में स्वतंत्रता दिवस समारोह
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने चेन्नई के फोर्ट सेंट जॉर्ज में तिरंगा फहराया और स्वतंत्रता दिवस पर अपना भाषण दिया। राज्य भर में सरकारी संस्थानों, स्कूलों, कॉलेजों और आम जनता की भागीदारी से समारोहों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और परेडों का आयोजन किया गया।
विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध संघर्ष में प्राणों की आहुति देने वाले स्वतंत्रता सेनानियों को नमन किया।
स्वतंत्रता आंदोलन से प्रेरणा का आग्रह
स्टालिन ने नागरिकों से स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत से प्रेरणा लेने और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रगतिशील, दयालु और समावेशी भारत के निर्माण हेतु सामूहिक रूप से काम करने का अनुरोध किया। उनका यह संदेश DMK के उस दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करता है जो संवैधानिक मूल्यों को राष्ट्र-निर्माण की आधारशिला मानता है।
आने वाले समय में देखना होगा कि स्टालिन का यह आह्वान तमिलनाडु की राजनीति और राष्ट्रीय विमर्श पर किस रूप में असर डालता है।