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भारतीय सूफी फाउंडेशन का ओवैसी पर आरोप: बहराइच दौरे से मुस्लिम भावनाएं भड़काने की राजनीति

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भारतीय सूफी फाउंडेशन का ओवैसी पर आरोप: बहराइच दौरे से मुस्लिम भावनाएं भड़काने की राजनीति

सारांश

भारतीय सूफी फाउंडेशन की नेशनल प्रेसिडेंट कशिश वारसी ने ओवैसी के बहराइच दौरे को मुस्लिम भावनाएं भड़काने की राजनीति करार दिया। यह बयान मुस्लिम समुदाय के भीतर ही AIMIM की रणनीति पर बढ़ते सवालों को दर्शाता है।

मुख्य बातें

भारतीय सूफी फाउंडेशन की प्रेसिडेंट कशिश वारसी ने 12 जून 2026 को AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के बहराइच दौरे का विरोध किया।
वारसी का आरोप — ओवैसी जानबूझकर संवेदनशील स्थल चुनकर समाज में तनाव पैदा करते हैं और मुस्लिम भावनाओं को भड़काकर वोट हासिल करते हैं।
वारसी ने सुझाया कि उत्तर प्रदेश में धार्मिक गतिविधि के लिए देवा शरीफ या मदार तुल औलिया जैसे सद्भाव के प्रतीक स्थल उचित होते।
उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश का मुस्लिम समाज अब इस तरह की राजनीति को समझने लगा है।
जिम ट्रेनरों के लिए पुलिस वेरिफिकेशन और पहचान पत्र अनिवार्य करने के आदेश को वारसी ने सही और ज़रूरी बताया।

भारतीय सूफी फाउंडेशन की नेशनल प्रेसिडेंट कशिश वारसी ने 12 जून 2026 को मुरादाबाद में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के बहराइच दौरे की कड़ी आलोचना करते हुए उन पर धार्मिक भावनाएं भड़काकर राजनीतिक लाभ उठाने का आरोप लगाया। वारसी का कहना है कि ओवैसी जानबूझकर संवेदनशील स्थलों और विवादित मुद्दों को चुनकर समाज में तनाव पैदा करते हैं।

मुख्य आरोप और वारसी का बयान

कशिश वारसी ने कहा कि AIMIM लंबे समय से मुस्लिम भावनाओं को उकसाकर वोट बटोरने की राजनीति कर रही है। उनके अनुसार, ओवैसी खुद को मुस्लिम समुदाय का हमदर्द बताते हैं, लेकिन यह केवल एक राजनीतिक रणनीति है, न कि वास्तविक सरोकार।

वारसी ने तर्क दिया कि यदि ओवैसी को उत्तर प्रदेश में धार्मिक आधार पर अपनी गतिविधि शुरू करनी थी, तो उन्हें देवा शरीफ या मदार तुल औलिया जैसे स्थलों से शुरुआत करनी चाहिए थी — जो आस्था, सद्भाव और मोहब्बत के प्रतीक हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी देवा शरीफ की सार्वजनिक रूप से सराहना कर चुके हैं।

सामाजिक तनाव और राजनीतिक उद्देश्य पर चिंता

वारसी ने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक गतिविधियाँ धार्मिक भावनाओं को भड़काने और नफरत फैलाने का माध्यम बन जाती हैं। उनका कहना है कि ओवैसी जानबूझकर विवादास्पद स्थलों का चयन करते हैं, जिससे समुदायों के बीच तनाव बढ़ता है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि उत्तर प्रदेश का मुस्लिम समाज अब इस तरह की राजनीति को पहचानने लगा है और आने वाले समय में ऐसी रणनीति को समर्थन नहीं मिलेगा।

जिम ट्रेनरों के लिए पुलिस वेरिफिकेशन पर रुख

इसी अवसर पर कशिश वारसी ने जिम ट्रेनरों के लिए पुलिस वेरिफिकेशन और पहचान पत्र अनिवार्य करने के सरकारी आदेश का समर्थन किया। उन्होंने इसे एक सही और समयानुकूल फैसला बताया, यह कहते हुए कि कोई भी व्यक्ति अपनी पहचान छुपाकर कोई व्यवसाय नहीं कर सकता।

वारसी ने कहा कि यदि आपराधिक प्रवृत्ति का कोई व्यक्ति जिम ट्रेनर बन जाए तो यह समाज के लिए खतरनाक हो सकता है, इसलिए चरित्र सत्यापन आवश्यक है। उन्होंने जोड़ा कि पहचान पत्र गले में पहनने की व्यवस्था कई संस्थानों में पहले से लागू है और इसमें कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।

आगे क्या

यह बयान ऐसे समय में आया है जब बहराइच में AIMIM की राजनीतिक सक्रियता को लेकर विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों में प्रतिक्रियाएं तेज हो रही हैं। सूफी फाउंडेशन का यह विरोध मुस्लिम समुदाय के भीतर ओवैसी की राजनीति को लेकर बढ़ते मतभेदों को उजागर करता है, और यह देखना होगा कि AIMIM इन आरोपों का किस प्रकार जवाब देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन जब ये आरोप एक मुस्लिम धार्मिक संगठन की ओर से आते हैं, तो इनका राजनीतिक वज़न अलग होता है। देवा शरीफ का संदर्भ देना और योगी आदित्यनाथ की तारीफ का उल्लेख करना — दोनों मिलकर एक सोची-समझी वैचारिक स्थिति का संकेत देते हैं। असली सवाल यह है कि क्या यह आलोचना जमीनी मुस्लिम राय को दर्शाती है, या यह भी एक प्रतिस्पर्धी राजनीतिक स्थान पर कब्जे की कोशिश है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कशिश वारसी ने ओवैसी पर क्या आरोप लगाए हैं?
भारतीय सूफी फाउंडेशन की नेशनल प्रेसिडेंट कशिश वारसी ने आरोप लगाया है कि AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी जानबूझकर संवेदनशील और विवादित स्थलों का चयन कर मुस्लिम भावनाएं भड़काते हैं और इसी आधार पर वोट बटोरते हैं। उनके अनुसार यह वास्तविक सरोकार नहीं, बल्कि एक राजनीतिक रणनीति है।
ओवैसी का बहराइच दौरा विवादास्पद क्यों है?
कशिश वारसी का कहना है कि ओवैसी ने बहराइच में जिस स्थल या मुद्दे को चुना, वह सामाजिक तनाव को बढ़ावा देने वाला है। उनके अनुसार, सद्भाव के प्रतीक देवा शरीफ या मदार तुल औलिया जैसे स्थलों की बजाय संवेदनशील स्थान चुनना ओवैसी की विभाजनकारी राजनीति को दर्शाता है।
भारतीय सूफी फाउंडेशन क्या है और कशिश वारसी कौन हैं?
भारतीय सूफी फाउंडेशन एक धार्मिक-सामाजिक संगठन है जो सूफी परंपराओं और सांप्रदायिक सद्भाव को बढ़ावा देता है। कशिश वारसी इस संगठन की नेशनल प्रेसिडेंट हैं और मुस्लिम समुदाय से जुड़े राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय रूप से बोलती हैं।
जिम ट्रेनरों के लिए पुलिस वेरिफिकेशन के आदेश पर वारसी का क्या कहना है?
कशिश वारसी ने जिम ट्रेनरों के लिए पुलिस वेरिफिकेशन और पहचान पत्र अनिवार्य करने के आदेश का पूरा समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यह सुरक्षा की दृष्टि से आवश्यक है और कोई भी व्यक्ति अपनी पहचान छुपाकर व्यवसाय नहीं कर सकता।
क्या उत्तर प्रदेश के मुस्लिम समाज में ओवैसी की राजनीति को लेकर बदलाव आ रहा है?
कशिश वारसी का दावा है कि उत्तर प्रदेश का मुस्लिम समाज अब भावनाओं को भड़काने वाली राजनीति को समझने लगा है और आने वाले समय में इसे समर्थन नहीं मिलेगा। हालाँकि यह उनका व्यक्तिगत आकलन है और इसकी व्यापक पुष्टि के लिए स्वतंत्र आँकड़े उपलब्ध नहीं हैं।
राष्ट्र प्रेस
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