झारखंड छात्र आंदोलन पर सुखदेव भगत: 'सभी विंग से बातचीत जारी, हेमंत सोरेन संवेदनशीलता से कर रहे कार्रवाई'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने 9 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में झारखंड के छात्र आंदोलन, परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे ज्वलंत मुद्दों पर अपनी स्पष्ट राय रखी। उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार की ओर से आंदोलनकारियों और छात्रों के सभी विंग के साथ सक्रिय रूप से संवाद किया जा रहा है।
छात्र आंदोलन पर सरकार का रुख
झारखंड में चल रहे छात्र विरोध-प्रदर्शन पर सुखदेव भगत ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से हर स्तर पर बातचीत की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने स्पष्ट किया, 'आंदोलनकारियों के साथ-साथ विद्यार्थियों के जितने भी विंग हैं, उनसे बात की जा रही है।' उन्होंने यह भी बताया कि इस मामले में अब तक 19 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
भगत ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि वे इस पूरे मामले में संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई कर रहे हैं। उन्होंने सोरेन के उस बयान का भी उल्लेख किया जिसमें मुख्यमंत्री ने कहा था कि जाँच की आंच अगर मुख्यमंत्री आवास तक भी जाए, तब भी वे पीछे नहीं हटेंगे। भगत ने उम्मीद जताई कि छात्रों की जायज माँगों पर ठोस कार्रवाई होगी।
केंद्र सरकार पर निशाना
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भगत ने कहा कि एक तरफ मोहन भागवत की ओर से छात्रों से संवाद किया जाता है, जबकि दूसरी तरफ न प्रधानमंत्री और न ही गृह मंत्री की ओर से कोई सार्थक बयान आता है। उन्होंने कहा कि प्रधान ने भी जब बोले तो जेन-जी को 'गुमराह' करने का आरोप लगाया, जो छात्रों के मुद्दों के प्रति केंद्र सरकार की उदासीनता को दर्शाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या छात्रों के मुद्दे आज केंद्र सरकार के लिए प्रासंगिक नहीं रहे? कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से भी यह स्पष्ट किया गया है कि चाहे जिसकी भी सरकार हो, वे हमेशा छात्रों के मुद्दों के साथ खड़े रहेंगे।
परिसीमन पर कांग्रेस का विरोध
परिसीमन के मुद्दे पर भगत ने कहा कि कांग्रेस आज भी इस प्रक्रिया के खिलाफ अपने रुख पर कायम है। तमिलनाडु में बुलाई गई बैठक में सभी सांसदों के न पहुँचने के सवाल पर उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जिस हड़बड़ी में यह विधेयक लाना चाहती है, उसकी मंशा पर संदेह है। आलोचकों का कहना है कि बिना व्यापक सहमति के परिसीमन दक्षिणी राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को प्रभावित कर सकता है।
महिला आरक्षण और इतिहास विवाद
महिला आरक्षण विधेयक पर भगत ने कहा कि कांग्रेस हमेशा से महिलाओं के सम्मान और अधिकारों की पक्षधर रही है, लेकिन कोई भी विधेयक साफ नीयत और पारदर्शिता के साथ लाया जाना चाहिए। उन्होंने पिछली बार के विधेयक का हवाला देते हुए कहा कि सरकार ने उस समय यह नैरेटिव सेट करने की कोशिश की कि विपक्ष का साथ नहीं मिला, जबकि वास्तविकता इससे अलग थी।
रोजगार के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से एक विशेष विचारधारा थोपने और इतिहास को तोड़-मरोड़ने की कोशिश की जा रही है, जिसे राहुल गांधी ने सार्वजनिक मंचों पर उजागर किया है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में रोजगार और शिक्षा के मुद्दे पर युवाओं में व्यापक असंतोष देखा जा रहा है।