सुप्रीम कोर्ट ने चंबल अभयारण्य में अवैध खनन पर तीन राज्यों को भेजा नोटिस

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सुप्रीम कोर्ट ने चंबल अभयारण्य में अवैध खनन पर तीन राज्यों को भेजा नोटिस

सारांश

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अवैध खनन के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए तीन राज्यों को नोटिस भेजा है। उम्मीद है कि अगली सुनवाई में मामले की गंभीरता पर चर्चा होगी।

Key Takeaways

  • सुप्रीम कोर्ट ने अवैध खनन पर सख्त रुख अपनाया।
  • राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश को नोटिस जारी किया गया।
  • अगली सुनवाई 2 अप्रैल को होगी।
  • खनन से वन्यजीवों के आवास को नुकसान हो रहा है।
  • सख्त कार्रवाई की जाएगी यदि अवैध खनन जारी रहा।

नई दिल्ली, 20 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में हो रहे अवैध रेत खनन के मामले को गंभीरता से लेते हुए राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सरकारों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने कहा है कि इन राज्यों से जवाब मिलने के बाद पूरे मामले पर विस्तार से सुनवाई की जाएगी।

यह मामला तब उजागर हुआ जब मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि चंबल अभयारण्य के संरक्षित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अवैध खनन हो रहा है। इन इलाकों में घड़ियाल संरक्षण कार्यक्रम भी संचालित है, लेकिन खनन गतिविधियों के कारण घड़ियालों और अन्य वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को गंभीर नुकसान हो रहा है।

सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ ने स्पष्ट रूप से कहा कि संरक्षित वनों को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह निर्देश भी दिया कि ऐसी गतिविधियों पर वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट, एनवायरनमेंट प्रोटेक्शन एक्ट, फॉरेस्ट कंजर्वेशन एक्ट, बायोलॉजिकल डायवर्सिटी एक्ट और इंडियन फॉरेस्ट एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

अदालत ने यह भी कहा कि यदि संरक्षित क्षेत्रों में अवैध खनन जारी रहता है, तो इसके लिए संबंधित विभागों के अधिकारी ही नहीं, बल्कि राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के पुलिस अधिकारी भी परोक्ष रूप से जिम्मेदार माने जाएंगे। कोर्ट ने संकेत दिया कि इस तरह की लापरवाही पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित सेंट्रल एंपावर्ड कमेटी को भी पक्षकार बनाया गया है, ताकि वह मामले की निगरानी और जांच में सहायता कर सके। अदालत ने यह मामला मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर स्वत: संज्ञान लेते हुए उठाया है, जो इस मुद्दे की गंभीरता को दर्शाता है।

अभी कोर्ट ने राज्यों से जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई 2 अप्रैल को निर्धारित की गई है। उम्मीद है कि अगली सुनवाई में अवैध खनन और वन्यजीव संरक्षण से संबंधित मुद्दों पर और स्पष्ट दिशा-निर्देश सामने आएंगे।

Point of View

और न्यायालय द्वारा ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। अवैध खनन से न केवल प्राकृतिक संतुलन बिगड़ता है, बल्कि इससे पशु संरक्षण कार्यक्रमों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
NationPress
20/03/2026

Frequently Asked Questions

सुप्रीम कोर्ट ने किन राज्यों को नोटिस भेजा?
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश को नोटिस भेजा है।
अवैध खनन का क्या प्रभाव है?
अवैध खनन से घड़ियालों और अन्य वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को नुकसान पहुँचता है।
अगली सुनवाई कब होगी?
मामले की अगली सुनवाई 2 अप्रैल को होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने किन कानूनों का जिक्र किया?
सुप्रीम कोर्ट ने वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट, एनवायरनमेंट प्रोटेक्शन एक्ट और अन्य कानूनों का जिक्र किया।
इस मामले में क्या कार्रवाई की जा सकती है?
अगर अवैध खनन जारी रहा, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
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