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सुप्रीम कोर्ट में कल सुनवाई: असम सरकार की याचिका पर पवन खेड़ा को मिली राहत पर सवाल

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सुप्रीम कोर्ट में कल सुनवाई: असम सरकार की याचिका पर पवन खेड़ा को मिली राहत पर सवाल

सारांश

सुप्रीम कोर्ट कल पवन खेड़ा को मिली राहत के खिलाफ असम सरकार की याचिका पर सुनवाई करेगा। यह मामला रिंकी भुइयां सरमा के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियों से जुड़ा है, जो असम के मुख्यमंत्री की पत्नी हैं। क्या यह राजनीतिक प्रतिशोध का मामला है?

मुख्य बातें

सुप्रीम कोर्ट कल असम सरकार की याचिका पर सुनवाई करेगा।
तेलंगाना हाई कोर्ट ने पवन खेड़ा को अंतरिम राहत दी थी।
यह मामला रिंकी भुइयां सरमा के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियों से जुड़ा है।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह मामला राजनीतिक प्रतिशोध का है।
असम पुलिस ने पवन खेड़ा के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए हैं।

नई दिल्ली, १४ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। सुप्रीम कोर्ट कल असम सरकार की उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जो तेलंगाना हाई कोर्ट द्वारा कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को दी गई अंतरिम राहत को चुनौती देती है। यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी, रिंकी भुइयां सरमा के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी करने से संबंधित आपराधिक केस से जुड़ा है।

सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित कॉज लिस्ट के अनुसार, यह मामला १५ अप्रैल को जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर की बेंच के सामने रखा जाएगा।

असम सरकार ने एक स्पेशल लीव पिटीशन (एसएलपी) दायर कर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है, जिसमें तेलंगाना हाई कोर्ट के १० अप्रैल के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसके तहत खेड़ा को एक सप्ताह के लिए ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी गई थी।

तेलंगाना हाई कोर्ट ने खेड़ा को अंतरिम सुरक्षा प्रदान की थी, ताकि वह असम पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के संबंध में नियमित जमानत के लिए सक्षम अदालत से संपर्क कर सकें।

जस्टिस के सुजाना की सिंगल-जज बेंच ने निर्देश दिया था कि अगर कांग्रेस नेता को गिरफ्तार किया जाता है, तो उन्हें एक हफ्ते के लिए अग्रिम जमानत पर रिहा किया जाए। खेड़ा ने तेलंगाना हाई कोर्ट में ट्रांजिट अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दी थी, जब असम पुलिस ने उन पर रिंकी भुइयां सरमा के खिलाफ कथित तौर पर मानहानिकारक और दुर्भावनापूर्ण आरोप लगाने का मामला दर्ज किया था।

तेलंगाना हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान खेड़ा की ओर से पेश वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी थी कि एफआईआर राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है और कांग्रेस नेता को असम के मुख्यमंत्री और उनके परिवार पर सवाल उठाने के लिए निशाना बनाया जा रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि आरोप भले ही गलत माने जाएं, वे अधिकतम मानहानि के दायरे में आते हैं और उनके आधार पर गिरफ्तारी नहीं की जा सकती। दूसरी ओर, याचिका का विरोध करते हुए असम के एडवोकेट जनरल देवजीत सैकिया ने तेलंगाना हाई कोर्ट में इस याचिका की स्वीकार्यता पर सवाल उठाया। उन्होंने तर्क किया कि खेड़ा दिल्ली के निवासी हैं, इसलिए उनके पास असम के बाहर राहत मांगने का कोई ठोस कारण नहीं है।

असम पुलिस ने खेड़ा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इन धाराओं में मानहानि, जालसाजी और आपराधिक साज़िश के आरोप शामिल हैं। यह कार्रवाई खेड़ा के उन आरोपों के बाद की गई है, जिनमें उन्होंने कहा था कि रिंकी भुइयां सरमा के पास कई विदेशी पासपोर्ट, दुबई में अघोषित आलीशान संपत्तियां और संयुक्त राज्य अमेरिका में शेल कंपनियां हैं।

इस विवाद ने असम विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा और कांग्रेस के बीच एक तीखी राजनीतिक टकराव की स्थिति पैदा कर दी थी। कांग्रेस ने खेड़ा का खुलकर समर्थन किया और हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली सरकार पर आरोप लगाया कि वह अपने राजनीतिक विरोधियों को चुप कराने के लिए पुलिस तंत्र का दुरुपयोग कर रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने खेड़ा का बचाव करते हुए इस बात पर जोर दिया कि आपराधिक कार्रवाई शुरू करने के बजाय असम के मुख्यमंत्री और उनके परिवार को उन पर लगाए गए आरोपों का जवाब देना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पवन खेड़ा को मिली राहत क्या है?
पवन खेड़ा को तेलंगाना हाई कोर्ट ने एक सप्ताह के लिए ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी, जिससे उन्हें असम पुलिस के खिलाफ सुरक्षा मिली।
असम सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में क्या याचिका दायर की है?
असम सरकार ने पवन खेड़ा को दी गई राहत को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक स्पेशल लीव पिटीशन दायर की है।
क्या यह मामला राजनीतिक प्रतिशोध से जुड़ा है?
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि यह मामला राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है, क्योंकि खेड़ा ने मुख्यमंत्री और उनके परिवार पर सवाल उठाए थे।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई कब होगी?
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई १५ अप्रैल को होगी।
असम पुलिस ने पवन खेड़ा के खिलाफ कौन से आरोप लगाए हैं?
असम पुलिस ने पवन खेड़ा के खिलाफ मानहानि, जालसाजी और आपराधिक साज़िश के आरोप लगाए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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