कोलकाता मेट्रो की देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को लगाई फटकार

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कोलकाता मेट्रो की देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को लगाई फटकार

सारांश

सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता मेट्रो निर्माण में देरी पर पश्चिम बंगाल सरकार को कड़ी फटकार लगाई, अधिकारियों की जिद्दी मानसिकता को उजागर किया। यह विकास का मुद्दा है, जिसे राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए।

Key Takeaways

  • सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता मेट्रो निर्माण में देरी पर सख्त रुख अपनाया।
  • राज्य सरकार की लापरवाही और अधिकारियों की जिद की आलोचना की गई।
  • विकास के मुद्दों को राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए।
  • कोलकाता मेट्रो की ऑरेंज लाइन में आवश्यक मंजूरी में देरी का कारण।
  • कोर्ट ने समय सीमा के भीतर प्रोजेक्ट पूरा करने का भरोसा जताया।

नई दिल्ली, 23 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। कोलकाता मेट्रो के निर्माण में हो रही देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि यह देरी केवल अधिकारियों की जिद्दी मानसिकता को दर्शाती है, जो कोलकाता में मेट्रो रेल प्रोजेक्ट को रोकने और उसमें देरी करने के प्रयास में लगे हैं। सीजेआई ने कहा कि विकास से जुड़े मुद्दों को राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट द्वारा दिए गए आदेश में कोई कमी नहीं है। हमें पूरा विश्वास है कि यह प्रोजेक्ट समय पर पूरा होगा।

जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने राज्य सरकार से सवाल किया कि क्या त्योहारों का आयोजन विकास से अधिक महत्वपूर्ण है? उन्होंने कहा कि यह आपके अपने स्वार्थ का मामला नहीं है, आप अपने कर्तव्यों के प्रति जिम्मेदार हैं। आपने हाई कोर्ट को बताया था कि आप त्योहारों की तैयारी कर रहे हैं। क्या परिवहन के लिए एक महत्वपूर्ण सड़क बनाना कम महत्वपूर्ण है? यह लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार से अपेक्षित नहीं है कि वह विकास कार्यों को नजरअंदाज करे।

कोर्ट ने कहा कि अगर चुनाव आयोग को चुनाव कराने में कोई समस्या नहीं है तो यह प्रोजेक्ट तो आचार संहिता से पहले का है। इस आधार पर हम राज्य सरकार को बहाना बनाने की अनुमति नहीं देंगे।

सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कोलकाता मेट्रो में देरी को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सरकार की अपील पर सुनवाई से इनकार कर दिया।

सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार ने कहा कि हमें मई तक का समय दिया जाए क्योंकि चुनाव चल रहे हैं, जिससे देरी हो रही है। राज्य सरकार ने कहा कि उस मार्ग से एम्बुलेंस भी गुजरती हैं, यहां तक कि अंग प्रत्यारोपण संबंधी वाहन भी इसी रास्ते से आते-जाते हैं।

सीजेआई ने कहा कि हाई कोर्ट ने बहुत लचीला रुख अपनाया है। यह एक ऐसा मामला था जहां आपके मुख्य सचिव और डीजीपी के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए थी। यह अपने कर्तव्यों के प्रति पूरी तरह से लापरवाह दिखाता है। यह उस मुद्दे का राजनीतिकरण करने की कोशिश है, जहां वास्तव में कोई मुद्दा नहीं है।

कोलकाता मेट्रो के वकील ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिस पर जस्टिस बागची ने कहा, "आपको यह अवसर दिया गया था, लेकिन आपने इसका लाभ नहीं उठाया। हम आपको याचिका वापस लेने की अनुमति नहीं देंगे।"

आसानी से, कोलकाता मेट्रो की ऑरेंज लाइन के एक महत्वपूर्ण हिस्से को पूरा करने में हो रही अनिश्चित देरी के संबंध में याचिका दायर की गई थी। इस याचिका में देरी का कारण पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा आवश्यक मंजूरी न दिए जाने को बताया गया था।

Point of View

NationPress
24/03/2026

Frequently Asked Questions

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को क्यों फटकार लगाई?
सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता मेट्रो के निर्माण में देरी और अधिकारियों की जिद्दी मानसिकता के कारण पश्चिम बंगाल सरकार को फटकार लगाई।
कोलकाता मेट्रो प्रोजेक्ट में देरी का कारण क्या है?
कोलकाता मेट्रो प्रोजेक्ट में देरी का मुख्य कारण पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा आवश्यक मंजूरियों का न मिलना है।
क्या सुप्रीम कोर्ट का आदेश हाईकोर्ट के आदेश से अलग है?
नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश में कोई कमी नहीं है।
राज्य सरकार को कितने समय की आवश्यकता है?
राज्य सरकार ने कहा कि उसे मई तक का समय चाहिए।
कोलकाता मेट्रो का ऑरेंज लाइन क्या है?
कोलकाता मेट्रो की ऑरेंज लाइन एक महत्वपूर्ण मार्ग है, जिसका निर्माण चल रहा है।
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