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सुप्रीम कोर्ट ने लीगल एजुकेशन कमीशन गठन की याचिका पर मई में सुनवाई का आश्वासन दिया

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सुप्रीम कोर्ट ने लीगल एजुकेशन कमीशन गठन की याचिका पर मई में सुनवाई का आश्वासन दिया

सारांश

सुप्रीम कोर्ट ने लीगल एजुकेशन कमीशन बनाने की जनहित याचिका पर सुनवाई करने का आश्वासन दिया है। इस मामले में मई में सुनवाई की जाएगी। क्या इससे कानूनी शिक्षा प्रणाली में सुधार आएगा?

मुख्य बातें

सुप्रीम कोर्ट ने लीगल एजुकेशन कमीशन बनाने की जनहित याचिका पर सुनवाई का आश्वासन दिया।
मई में इस मामले पर सुनवाई की जाएगी।
याचिका में कानूनी शिक्षा को आधुनिक बनाने का प्रस्ताव है।
पाँच साल के पाठ्यक्रम को चार साल के कोर्स में बदलने का सुझाव।
कानूनी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार की आवश्यकता।

नई दिल्ली, १६ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। सुप्रीम कोर्ट ने लीगल एजुकेशन कमीशन के गठन की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दे दी है। इस मामले में मई में सुनवाई का आश्वासन दिया गया है। अदालत ने कहा कि यह जनहित याचिका सकारात्मक है और इस पर विचार किया जा सकता है।

एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय द्वारा प्रस्तुत याचिका में प्रस्तावित किया गया है कि एक ऐसा आयोग स्थापित किया जाए जिसमें कानून के विशेषज्ञ शामिल हों, ताकि वे नए सिलेबस और पाठ्यक्रम विकसित कर सकें। इसका उद्देश्य कानूनी शिक्षा को अधिक आधुनिक और सभी के लिए सुलभ बनाना है।

याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारत में अधिकांश लॉ कोर्स अभी भी पाँच साल के इंटीग्रेटेड बीए-एलएलबी या बीबीए-एलएलबी प्रोग्राम के रूप में चलाए जा रहे हैं। एडवोकेट उपाध्याय का कहना है कि जबकि अधिकांश कोर्स चार साल के होते हैं, यह पाँच साल का पाठ्यक्रम छात्रों पर समय और आर्थिक बोझ डालता है। विशेष रूप से, गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के छात्र इस लंबे समय और खर्च को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि इसी कारण यह कोर्स प्रतिभाशाली छात्रों को अपनी ओर आकर्षित करने में असफल हो रहा है।

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि कानूनी शिक्षा एक अलग विषय है और उसकी गुणवत्ता भी एक अलग मुद्दा है। उन्होंने माना कि यह जनहित याचिका सकारात्मक है और इस पर ध्यान दिया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि सबसे अच्छे टैलेंट पहले भी आ रहे हैं।

याचिका में यह भी कहा गया है कि पाँच साल का कोर्स अब पुराना और वित्तीय रूप से बोझिल हो चुका है। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी चार साल के अंडरग्रेजुएट पाठ्यक्रम को समर्थन देती है, लेकिन कानूनी शिक्षा अभी भी पुराने इंटीग्रेटेड कार्यक्रमों पर निर्भर है। याचिका का तर्क है कि यदि कानूनी शिक्षा को चार साल के पाठ्यक्रम में बदला जाए तो इससे छात्रों का समय और धन दोनों की बचत होगी और प्रतिभा को आकर्षित करना आसान होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि छात्रों के लिए इसे और अधिक सुलभ भी बनाएगा।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लीगल एजुकेशन कमीशन क्या है?
लीगल एजुकेशन कमीशन एक ऐसा आयोग होगा जो कानूनी शिक्षा को आधुनिक बनाने के लिए नए पाठ्यक्रम और सिलेबस तैयार करेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने कब सुनवाई करने का आश्वासन दिया?
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में मई में सुनवाई करने का आश्वासन दिया है।
इस याचिका में क्या मांगा गया है?
याचिका में एक ऐसा कमीशन बनाने की मांग की गई है जिसमें कानून के विशेषज्ञ शामिल हों।
कानूनी शिक्षा में सुधार के लिए क्या किया जाएगा?
यदि यह याचिका मंजूर होती है, तो कानूनी शिक्षा को चार साल के पाठ्यक्रम में बदलने का प्रयास किया जाएगा।
यह जनहित याचिका क्यों महत्व रखती है?
यह याचिका कानूनी शिक्षा की गुणवत्ता और सुलभता को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है।
राष्ट्र प्रेस
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