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सूरत इको सेल ने ₹4 करोड़ की जमीन ठगी में असमत खान को दबोचा, यस बैंक फर्जी खाता कांड का पर्दाफाश

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सूरत इको सेल ने ₹4 करोड़ की जमीन ठगी में असमत खान को दबोचा, यस बैंक फर्जी खाता कांड का पर्दाफाश

सारांश

सूरत इको सेल ने ₹4 करोड़ की जमीन ठगी के मामले में मध्यस्थ असमत खान को गिरफ्तार किया। आरोपियों ने एनआरआई जमीन मालिकों के जाली हस्ताक्षर कर यस बैंक में फर्जी खाता खोला और शिकायतकर्ता पीयूष भाई का चेक उसमें जमा कर पूरी रकम हड़प ली। मुख्य आरोपी रवि कोलडिया की तलाश जारी है।

मुख्य बातें

सूरत इको सेल ने ₹4 करोड़ की जमीन ठगी में मध्यस्थ असमत खान को गिरफ्तार किया।
यह कुल ₹5.5 करोड़ की डील थी; ₹4 करोड़ का फ्रॉड किया गया।
आरोपियों ने एनआरआई जमीन मालिकों के जाली हस्ताक्षर कर यस बैंक, अंकलेश्वर शाखा में फर्जी खाता खोला।
मुख्य आरोपी रवि कोलडिया ने रकम अपने निजी खाते में ट्रांसफर कर निकाली; फरार है।
इस मामले में बैंक कर्मचारी भी पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं; जांच जारी है।

सूरत पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंसेस विंग (इको सेल) ने 22 मई 2025 को जमीन सौदे के नाम पर ₹4 करोड़ की धोखाधड़ी और यस बैंक की अंकलेश्वर शाखा में फर्जी खाता खुलवाकर रकम हड़पने के मामले में मध्यस्थ आरोपी असमत खान को गिरफ्तार किया है। इस मामले में पहले से गिरफ्तार बैंक कर्मचारियों के साथ मिलकर रची गई साजिश की जांच अभी जारी है।

मामले का पूरा घटनाक्रम

शिकायतकर्ता पीयूष भाई अंकलेश्वर में एक जमीन खरीदना चाहते थे। इसी दौरान उनका संपर्क मुख्य आरोपी रवि कोलडिया से हुआ, जिसने उन्हें एक ऐसी संपत्ति दिखाई जिसके मूल मालिक विदेश में रहते हैं। रवि ने पीयूष भाई को विश्वास दिलाया कि वह एनआरआई मालिकों की पावर ऑफ अटॉर्नी और अन्य आवश्यक दस्तावेज क्लियर करवाकर जमीन की रजिस्ट्री उनके नाम करवा देगा।

भरोसे में आकर पीयूष भाई ने सौदा तय होने पर जमीन मालिक के नाम ₹4 करोड़ का चेक सौंप दिया। यह कुल ₹5.5 करोड़ की डील थी, जिसमें से ₹4 करोड़ का फ्रॉड किया गया।

फर्जी खाते की साजिश

रकम हड़पने के लिए रवि कोलडिया ने बैंक कर्मचारियों के साथ मिलकर एक सुनियोजित षड्यंत्र रचा। जिस समय यह फर्जी खाता खुलवाया गया, उस वक्त असली जमीन मालिक भारत में मौजूद ही नहीं थे। इसके बावजूद आरोपियों ने उनके जाली हस्ताक्षर कर यस बैंक की अंकलेश्वर शाखा में एक बोगस खाता खोल लिया।

गिरफ्तार आरोपी असमत खान ने इस पूरी साजिश में मध्यस्थ की भूमिका निभाई — उसने ही रवि कोलडिया का परिचय बैंक कर्मचारियों से करवाया और फर्जी खाता खुलवाने की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका अदा की। पीयूष भाई का ₹4 करोड़ का चेक इसी बोगस खाते में जमा कराया गया और बाद में पूरी रकम निजी उपयोग के लिए निकाल ली गई।

ठगी का खुलासा कैसे हुआ

काफी समय बीत जाने के बाद भी रजिस्ट्री और जमीन का कब्जा न मिलने पर पीयूष भाई को संदेह हुआ। उन्होंने सीधे विदेश में रह रहे मूल जमीन मालिकों से संपर्क किया, जहाँ से पता चला कि मालिकों को सौदे का एक भी रुपया नहीं मिला है। इसके बाद पीयूष भाई ने पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस की कार्रवाई

इको सेल के एसीपी जी. ए. सरवैया ने बताया कि मामले में संलिप्त बैंक कर्मचारियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और अब मध्यस्थ असमत खान को भी हिरासत में ले लिया गया है। मुख्य आरोपी रवि कोलडिया ने ₹4 करोड़ की रकम अपने निजी खाते में स्थानांतरित कर निकाल ली थी। मामले की गहन जांच अभी जारी है और आगे और गिरफ्तारियों से इनकार नहीं किया जा सकता।

आगे क्या होगा

इको सेल के अनुसार मुख्य आरोपी रवि कोलडिया की तलाश जारी है। फर्जी दस्तावेज, जाली हस्ताक्षर और बैंक खाते से जुड़े वित्तीय लेनदेन की फॉरेंसिक जांच की जा रही है। यह मामला बैंकिंग प्रणाली में अंदरूनी मिलीभगत से होने वाली धोखाधड़ी की गंभीर चुनौती को उजागर करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

ऐसे मामले दोहराते रहेंगे।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सूरत में ₹4 करोड़ की जमीन ठगी का मामला क्या है?
सूरत के इको सेल ने एक ऐसे मामले का पर्दाफाश किया है जिसमें आरोपियों ने शिकायतकर्ता पीयूष भाई को अंकलेश्वर में जमीन दिलाने का झांसा देकर ₹4 करोड़ का चेक हड़प लिया। एनआरआई जमीन मालिकों के जाली हस्ताक्षर कर यस बैंक में फर्जी खाता खोला गया और पूरी रकम निकाल ली गई।
असमत खान की इस मामले में क्या भूमिका थी?
असमत खान ने मुख्य आरोपी रवि कोलडिया और बैंक कर्मचारियों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाई। उसने रवि का परिचय बैंक कर्मचारियों से करवाया और यस बैंक में फर्जी खाता खुलवाने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से सहयोग किया।
यस बैंक में फर्जी खाता कैसे खोला गया?
जब असली जमीन मालिक भारत में मौजूद नहीं थे, तब आरोपियों ने उनके जाली हस्ताक्षर कर यस बैंक की अंकलेश्वर शाखा में एक बोगस खाता खुलवाया। इसमें बैंक कर्मचारियों की सक्रिय मिलीभगत थी, जिन्हें पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
मुख्य आरोपी रवि कोलडिया के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई है?
रवि कोलडिया ने ₹4 करोड़ की रकम अपने निजी खाते में ट्रांसफर कर निकाल ली थी। इको सेल उसकी तलाश कर रही है और मामले की गहन जांच जारी है।
इस तरह की एनआरआई संपत्ति धोखाधड़ी से कैसे बचा जा सकता है?
विशेषज्ञों के अनुसार, एनआरआई संपत्ति खरीदने या बेचने से पहले मूल मालिकों से सीधे संपर्क और सरकारी पोर्टल पर दस्तावेज़ सत्यापन अनिवार्य होना चाहिए। पावर ऑफ अटॉर्नी और बैंक खाते से जुड़े किसी भी लेनदेन में स्वतंत्र कानूनी सलाह लेना ज़रूरी है।
राष्ट्र प्रेस
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