अन्नामलैयार-नल्लूरू परियोजना: तमिलनाडु के 4 मंत्री 5 अक्टूबर को केरल दौरे पर, किसानों की सिंचाई मांग पर होगी बातचीत
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के चार वरिष्ठ मंत्रियों का एक प्रतिनिधिमंडल 5 अक्टूबर 2026 (सोमवार) को केरल का दौरा करेगा और अन्नामलैयार-नल्लूरू सिंचाई परियोजना के क्रियान्वयन को लेकर बातचीत आगे बढ़ाएगा। कोयंबटूर, तिरुप्पुर और इरोड जिलों के किसान लंबे समय से इस परियोजना की माँग करते आ रहे हैं, जिसे उनके खेतों तक बेहतर सिंचाई सुविधा पहुँचाने के लिए आवश्यक माना जाता है।
प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन शामिल
रिपोर्टों के अनुसार, इस मंत्रिस्तरीय दल में जल संसाधन मंत्री एन. आनंद, राजस्व मंत्री के.ए. सेंगोट्टैयान, जनकल्याण मंत्री के.जी. अरुणराज और पर्यटन मंत्री राजेश कुमार शामिल होंगे। दल में जल संसाधन मंत्री की उपस्थिति विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह परियोजना मूलतः सिंचाई से जुड़ी है और उनकी भागीदारी प्रत्यक्ष तकनीकी-नीतिगत संवाद का मार्ग खोलती है।
तीन अन्य मंत्रियों की भागीदारी इस दौरे को महज एक तकनीकी बैठक से ऊपर उठाकर दोनों पड़ोसी राज्यों के बीच व्यापक मंत्रिस्तरीय संपर्क का रूप देती है।
केरल में किससे होगी मुलाकात
तमिलनाडु का यह मंत्रिदल केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीसन और राज्य के सिंचाई मंत्री से मुलाकात कर सकता है। रिपोर्टों के मुताबिक, बातचीत का केंद्रबिंदु प्रस्तावित परियोजना की रूपरेखा और उसे ज़मीन पर उतारने की संभावनाएँ होंगी। हालाँकि, बैठक का स्थान, विस्तृत एजेंडा और किसी औपचारिक समझौते की संभावना के बारे में अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
किसानों की माँग और परियोजना की पृष्ठभूमि
पश्चिमी तमिलनाडु के कोयंबटूर, तिरुप्पुर और इरोड जिलों के किसान वर्षों से अन्नामलैयार-नल्लूरू परियोजना को लागू कराने की माँग उठाते रहे हैं। इन कृषि-प्रधान जिलों में सिंचाई की अपर्याप्त व्यवस्था किसानों के लिए लंबे समय से एक बड़ी समस्या रही है। यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण भारत के कई राज्यों में पानी की उपलब्धता और अंतर-राज्यीय जल-साझाकरण को लेकर तनाव बढ़ रहा है।
गौरतलब है कि परियोजना की अनुमानित लागत, निर्माण की समय-सीमा, फंडिंग की व्यवस्था और सिंचाई के दायरे के बारे में अभी तक कोई सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।
आगे क्या होगा
यह दौरा इस प्रस्ताव पर बातचीत का एक और दौर है — अब तक दोनों सरकारों के बीच इस मुद्दे पर किसी पूर्व औपचारिक निर्णय का कोई उल्लेख नहीं मिला है। 5 अक्टूबर की बैठक के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कोई ठोस सहमति बनती है, कोई और दौर की बातचीत तय होती है, या परियोजना की तकनीकी जाँच-पड़ताल के लिए कोई समिति गठित की जाती है। सबकी नज़रें अब इस मंत्रिस्तरीय वार्ता के परिणाम पर टिकी हैं।