8 नवंबर 2026
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तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष ने टीवीके में गए अन्नाद्रमुक के 4 पूर्व विधायकों को दल-बदल नोटिस जारी किया

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तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष ने टीवीके में गए अन्नाद्रमुक के 4 पूर्व विधायकों को दल-बदल नोटिस जारी किया

सारांश

तमिलनाडु की राजनीति में हलचल — विधानसभा अध्यक्ष जे.सी.डी. प्रभाकर ने अन्नाद्रमुक से टीवीके में गए 4 पूर्व विधायकों को दल-बदल नोटिस दिया। 17 नवंबर की अंतिम सुनवाई का फैसला दो चुनाव जीत चुकी विधायकों की पात्रता तय कर सकता है।

मुख्य बातें

तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष जे.सी.डी.
प्रभाकर ने 8 नवंबर 2026 को अन्नाद्रमुक के चार पूर्व विधायकों को दल-बदल मामले में नोटिस जारी किए।
चारों विधायकों पर 13 मई के विश्वास मत में पार्टी व्हिप का उल्लंघन कर सरकार के पक्ष में मतदान का आरोप है।
व्यक्तिगत सुनवाई 10, 11 और 12 नवंबर को निर्धारित; अंतिम दलीलें 17 नवंबर को सुनी जाएँगी।
मद्रास उच्च न्यायालय ने इस्तीफों को वैध माना और अध्यक्ष को दो महीने में फैसला सुनाने का निर्देश दिया था।
विधायक मरगथम कुमारवेल और सत्यबामा टीवीके के टिकट पर उपचुनाव जीत चुकी हैं; अयोग्यता पर फैसले से उनकी वर्तमान और भविष्य की पात्रता खतरे में पड़ सकती है।

तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष जे.सी.डी. प्रभाकर ने 8 नवंबर 2026 को उन चार पूर्व विधायकों को दल-बदल विरोधी प्रावधानों के तहत नोटिस जारी किए, जिन्होंने अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) छोड़कर तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) का दामन थाम लिया था। इन विधायकों पर 13 मई को तमिलनाडु विधानसभा में हुए विश्वास मत के दौरान पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने का आरोप है। अध्यक्ष ने चारों को 10, 11 और 12 नवंबर को व्यक्तिगत सुनवाई के लिए उपस्थित होने का निर्देश दिया है।

मामले की पृष्ठभूमि

विवाद का केंद्र 13 मई का वह विश्वास मत है जिसमें अन्नाद्रमुक के 25 विधायकों पर पार्टी व्हिप की अनदेखी करते हुए सत्तारूढ़ सरकार के पक्ष में मतदान करने का आरोप लगा। मतदान के तुरंत बाद अन्नाद्रमुक के मुख्य सचेतक एग्री कृष्णमूर्ति ने संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत इन विधायकों की सदस्यता रद्द करने की माँग करते हुए विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष याचिका दायर की।

हालाँकि, अन्नाद्रमुक के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने बाद में 21 विधायकों के खिलाफ शिकायत वापस लेने का निर्णय किया, जिससे उन्हें अयोग्यता की तलवार से राहत मिल गई। लेकिन शेष चार विधायकों के विरुद्ध कार्यवाही जारी रही, क्योंकि उन्होंने पार्टी से इस्तीफा देकर टीवीके की सदस्यता ग्रहण कर ली।

संख्या बढ़ी, कोर्ट का हस्तक्षेप

इस बीच एम.आर. विजयभास्कर और सी. विजयभास्कर नामक दो अन्य विधायकों ने भी इस्तीफा दे दिया, जिससे लंबित कार्यवाही से जुड़े विधायकों की कुल संख्या छह हो गई। एग्री कृष्णमूर्ति ने विधानसभा अध्यक्ष द्वारा इस्तीफे स्वीकार करने के फैसले को मद्रास उच्च न्यायालय में चुनौती दी।

मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की खंडपीठ ने इस्तीफों को वैध, वास्तविक और स्वैच्छिक करार दिया। साथ ही अदालत ने विधानसभा अध्यक्ष को लंबित अयोग्यता याचिकाओं का दो महीने के भीतर निपटारा करने का निर्देश दिया — यही निर्देश अब सुनवाई में तेजी का आधार बना है।

राजनीतिक दाँव बड़े

इस मामले में राजनीतिक जटिलता इसलिए और गहरी हो गई है क्योंकि चार विवादित विधायकों में से दो — मरगथम कुमारवेल और सत्यबामा — टीवीके के टिकट पर विधानसभा उपचुनाव लड़कर जीत चुकी हैं। यदि अध्यक्ष उनके विरुद्ध अयोग्यता का फैसला सुनाते हैं, तो उनकी वर्तमान विधायक के रूप में पात्रता और भविष्य में चुनाव लड़ने की योग्यता पर गंभीर कानूनी प्रश्न उठ सकते हैं।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब तमिलनाडु की राजनीति में दल-बदल विरोधी कानून इतने महत्वपूर्ण मोड़ पर आया हो, लेकिन उपचुनाव में जीती हुई विधायकों की अयोग्यता का प्रश्न इसे विशेष रूप से संवेदनशील बनाता है।

आगे क्या होगा

अंतिम दलीलें 17 नवंबर को सुने जाने की संभावना है। सुनवाई के दौरान पलानीस्वामी के कानूनी प्रतिनिधि भी अपना पक्ष रखेंगे। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष अयोग्यता याचिकाओं पर अपना अंतिम निर्णय सुनाएँगे। विधानसभा अध्यक्ष का यह फैसला न केवल टीवीके की विधायी स्थिति बल्कि तमिलनाडु के समग्र राजनीतिक समीकरण को भी प्रभावित कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो चयनात्मक प्रवर्तन का प्रश्न उठता है। सबसे तीखा विरोधाभास यह है कि जिन विधायकों पर अयोग्यता की तलवार है, वे उपचुनाव में जनादेश पा चुकी हैं — यदि अध्यक्ष उन्हें अयोग्य ठहराते हैं, तो मतदाता की इच्छा और संवैधानिक प्रावधान के बीच टकराव अपरिहार्य हो जाएगा, जो सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँच सकता है।
RashtraPress
8 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु दल-बदल नोटिस मामला क्या है?
तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष जे.सी.डी. प्रभाकर ने अन्नाद्रमुक के उन चार पूर्व विधायकों को नोटिस जारी किए हैं जिन्होंने पार्टी छोड़कर टीवीके जॉइन की। इन पर 13 मई के विश्वास मत में पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने का आरोप है।
सुनवाई की तारीखें क्या हैं और फैसला कब आएगा?
चारों पूर्व विधायकों की व्यक्तिगत सुनवाई 10, 11 और 12 नवंबर को होगी, जबकि अंतिम दलीलें 17 नवंबर को सुनी जाएँगी। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष अयोग्यता याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाएँगे।
मद्रास उच्च न्यायालय ने इस मामले में क्या कहा?
मद्रास उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने इस्तीफों को वैध, वास्तविक और स्वैच्छिक करार दिया। साथ ही अदालत ने विधानसभा अध्यक्ष को लंबित अयोग्यता याचिकाओं का दो महीने के भीतर निपटारा करने का निर्देश दिया।
इस फैसले का मरगथम कुमारवेल और सत्यबामा पर क्या असर होगा?
दोनों विधायक टीवीके के टिकट पर उपचुनाव जीत चुकी हैं। यदि अध्यक्ष उनके विरुद्ध अयोग्यता का फैसला देते हैं, तो उनकी वर्तमान विधायक पात्रता और भविष्य में चुनाव लड़ने की योग्यता पर गंभीर कानूनी प्रश्न उठ सकते हैं।
अन्नाद्रमुक ने 25 में से 21 विधायकों की शिकायत क्यों वापस ली?
अन्नाद्रमुक के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने 21 विधायकों के खिलाफ शिकायत वापस लेने का निर्णय किया, जिससे उन्हें अयोग्यता से राहत मिली। केवल उन चार के खिलाफ कार्यवाही जारी रही जिन्होंने पार्टी से इस्तीफा देकर टीवीके की सदस्यता ग्रहण कर ली।
राष्ट्र प्रेस
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