नामक्कल में तीन बुजुर्गों की कथित आत्महत्या के बाद तमिलिसाई ने तमिलनाडु सरकार से वरिष्ठ नागरिक कल्याण मजबूत करने की माँग की
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता और तेलंगाना की पूर्व राज्यपाल तमिलिसाई सौंदरराजन ने मंगलवार, 9 जून को तमिलनाडु सरकार से नामक्कल जिले में तीन बुजुर्गों की कथित आत्महत्या के बाद वरिष्ठ नागरिकों के लिए कल्याणकारी उपायों को तत्काल मजबूत करने का आग्रह किया। बताया जा रहा है कि इन तीनों की मृत्यु का कारण वृद्धावस्था, अकेलापन और सहारे की कमी था।
घटना की पृष्ठभूमि
नामक्कल जिले में सामने आई इस दुखद घटना ने राज्य में बुजुर्गों की दुर्दशा को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। कथित तौर पर तीनों बुजुर्ग पर्याप्त पारिवारिक या सामाजिक देखभाल के बिना जीवन यापन कर रहे थे। तमिलिसाई सौंदरराजन ने इस घटना को 'बेहद दुखद' बताते हुए कहा कि यह त्रासदी एक व्यापक सहायता प्रणाली की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करती है।
मुख्यमंत्री से अपील
तमिलिसाई ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से अपील की कि वे कमजोर और अकेले रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों की पहचान करें और यह सुनिश्चित करें कि उन्हें गरिमापूर्ण जीवन जीने के लिए आवश्यक सहायता मिले। उनके अनुसार, राज्य सरकार को ऐसे व्यक्तियों को सुरक्षित आश्रय, पौष्टिक भोजन, समय पर स्वास्थ्य सेवा और भावनात्मक सहारा प्रदान करने की व्यवस्था स्थापित करनी चाहिए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने और बढ़ती उम्र की आबादी के समक्ष आने वाली चुनौतियों का समाधान करने के लिए तत्काल सरकारी हस्तक्षेप अनिवार्य है।
केंद्र सरकार की पहलों का उल्लेख
तमिलिसाई ने केंद्र द्वारा शुरू की गई कल्याणकारी पहलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने याद दिलाया कि कोविड-19 महामारी के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समाज के कमजोर वर्गों के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना शुरू की थी, जिसने लॉकडाउन के दौरान गरीब परिवारों को भूखा न रहने देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के नागरिकों के लिए स्वास्थ्य बीमा कवरेज के विस्तार का भी उल्लेख किया और कहा कि इस तरह की पहल बुजुर्गों के लिए एक मजबूत सुरक्षा जाल बनाने के महत्व को दर्शाती है।
समाज का नैतिक दायित्व
तमिलिसाई सौंदरराजन ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल करना केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज का नैतिक दायित्व भी है। उनके शब्दों में, 'मानवता की सच्ची पहचान इस बात में निहित है कि लोग अपने बुजुर्गों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं और उनकी देखभाल कैसे करते हैं।'
आगे क्या
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब तमिलनाडु में बुजुर्ग आबादी तेजी से बढ़ रही है और एकल परिवारों की संख्या में वृद्धि के कारण वरिष्ठ नागरिकों का अकेलापन एक गंभीर सामाजिक समस्या बनती जा रही है। तमिलिसाई ने माँग की है कि तमिलनाडु भर में वरिष्ठ नागरिकों के लिए कल्याणकारी व्यवस्थाओं को व्यापक रूप से मजबूत किया जाए।