तमिलनाडु में ATF पर VAT 29% से घटकर 16%, इंडिगो ने किया स्वागत; 1 नवंबर से लागू
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु सरकार ने 23 अक्टूबर 2026 को विमानन क्षेत्र को बड़ी राहत देते हुए एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर वैट की दर 29% से घटाकर 16% कर दी है। यह कटौती चेन्नई एयरपोर्ट पर ईंधन भरवाने वाली निर्धारित एयरलाइंस पर लागू होगी और इससे परिचालन लागत में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है।
कब और कैसे लागू होगी छूट
तमिलनाडु के वाणिज्यिक कर एवं पंजीकरण विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, रियायती कर दर 1 नवंबर 2026 की मध्यरात्रि से प्रभावी होगी और 31 अक्टूबर 2027 की मध्यरात्रि तक लागू रहेगी। यह छूट तमिलनाडु वैल्यू एडेड टैक्स अधिनियम, 2006 की दूसरी अनुसूची के अंतर्गत दी गई है।
रियायती दर का लाभ उठाने के लिए संबंधित डीलर को खरीदार द्वारा हस्ताक्षरित घोषणा पत्र अपनी मासिक रिटर्न के साथ संबंधित कर अधिकारी को जमा करना अनिवार्य होगा।
इंडिगो की प्रतिक्रिया
एयरलाइन कंपनी इंडिगो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इस फैसले का स्वागत करते हुए तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय का आभार व्यक्त किया। कंपनी ने इसे 'एक प्रगतिशील कदम' बताया।
इंडिगो ने कहा कि इस प्रकार के नीतिगत निर्णय हवाई संपर्क को मज़बूत करेंगे, राज्य में पर्यटन और आर्थिक विकास को गति देंगे तथा भारत के समग्र विमानन क्षेत्र को और सशक्त बनाएंगे। कंपनी ने उम्मीद जताई कि अन्य राज्य सरकारें भी इसी तरह की नीतियाँ अपनाएंगी, जिससे हवाई यात्रा आम जनता के लिए अधिक सुलभ और किफायती हो सके।
आम जनता और एयरलाइंस पर असर
विशेषज्ञों के अनुसार, ATF किसी भी एयरलाइन की परिचालन लागत का सबसे बड़ा हिस्सा होता है — कुल लागत का लगभग 30-40% तक। कर दर में 13 प्रतिशत अंक की यह कमी एयरलाइंस की ईंधन लागत में सीधी राहत देगी।
यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में हवाई यात्री संख्या तेज़ी से बढ़ रही है और एयरलाइंस नए रूट तथा बढ़ी हुई फ्रीक्वेंसी के साथ विस्तार की योजना बना रही हैं। कम परिचालन लागत से टिकट की कीमतों में भी कुछ नरमी की उम्मीद की जा सकती है।
राज्य की व्यापक रणनीति
तमिलनाडु सरकार के इस फैसले को राज्य में निवेश, पर्यटन और विमानन बुनियादी ढाँचे को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। गौरतलब है कि कई राज्य सरकारें ATF पर ऊँची कर दरें बनाए हुए हैं, जो विमानन उद्योग और यात्रियों दोनों के लिए बाधा बनती रही हैं।
आगे देखें तो उद्योग जगत की नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि क्या अन्य बड़े राज्य — विशेषकर महाराष्ट्र, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश — भी इस दिशा में कदम उठाते हैं, जो भारत के विमानन क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर और प्रतिस्पर्धी बना सकता है।