गठबंधन से जनमुद्दे नहीं रुकेंगे — तारिक कर्रा का NC के साथ रिश्ते पर बड़ा बयान
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (JKPCC) के अध्यक्ष और विधायक तारिक हमीद कर्रा ने 20 सितंबर 2026 को श्रीनगर में स्पष्ट किया कि सत्तारूढ़ राष्ट्रीय सम्मेलन (NC) के साथ गठबंधन में रहने के बावजूद कांग्रेस जम्मू-कश्मीर विधानसभा में जनता की वास्तविक चिंताओं को उठाना बंद नहीं करेगी। आगामी विधानसभा सत्र से पहले आयोजित कांग्रेस विधायक दल की बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए कर्रा ने यह बयान दिया।
विधायक दल की बैठक और सत्र की तैयारी
कर्रा ने बताया कि आगामी सत्र की रणनीति तय करने के लिए कांग्रेस विधायकों की बैठक बुलाई गई थी। उन्होंने कहा, 'हम वास्तविक चिंताओं को उठाएंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि उनका जल्द से जल्द समाधान हो।' उनके अनुसार विधानसभा का मूल उद्देश्य जनता से जुड़े मुद्दों को सामने लाना है — चाहे वे सत्ताधारी दल के सदस्यों द्वारा उठाए जाएँ या विपक्ष द्वारा।
गठबंधन और स्वतंत्र रुख के बीच संतुलन
कर्रा ने दो-टूक कहा, 'गठबंधन में होने का मतलब यह नहीं है कि हम लोगों के मुद्दों को नहीं उठाएंगे। गठबंधन में होने का मतलब यह नहीं है कि हम लोगों की जायज माँगों पर बात नहीं करेंगे।' यह ऐसे समय में आया है जब वंदे मातरम और UPI सहित कई मुद्दों पर NC और कांग्रेस के बीच मतभेद उभरे हैं। कर्रा ने इन मतभेदों को संकीर्ण नज़रिए से न देखने की अपील करते हुए कहा कि पार्टी ने 'व्यापक परिप्रेक्ष्य को ध्यान में रखते हुए सैद्धांतिक रुख अपनाते हुए यह गठबंधन किया।'
मंत्रिमंडल में शामिल होने पर कांग्रेस का रुख
रिपोर्टों के अनुसार, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कांग्रेस को मंत्रिमंडल में पद की पेशकश की है। हालाँकि, कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल नहीं किया जाता, तब तक वह सरकार में शामिल नहीं होगी। यह शर्त गठबंधन की सीमाओं को रेखांकित करती है और कांग्रेस की स्वायत्त राजनीतिक पहचान को बनाए रखने की कोशिश को दर्शाती है।
व्यापक राजनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद जम्मू-कश्मीर के पहले विधानसभा चुनाव में NC और कांग्रेस ने मिलकर बहुमत हासिल किया था। लेकिन कांग्रेस का मंत्रिमंडल से बाहर रहने का फैसला इस गठबंधन को असामान्य स्थिति में रखता है — एक ऐसा दल जो सरकार को समर्थन देता है, पर उसका हिस्सा नहीं बनता। यह स्थिति कांग्रेस को विधानसभा के भीतर एक स्वतंत्र आवाज़ के रूप में उभरने का अवसर देती है, जो दीर्घावधि में उसकी राजनीतिक प्रासंगिकता के लिए अहम हो सकती है।
आगे क्या
आगामी विधानसभा सत्र में कांग्रेस किन मुद्दों को प्राथमिकता देती है, यह देखना होगा। राज्य के दर्जे की बहाली की माँग पर सरकार का रुख और NC-कांग्रेस संबंधों की दिशा — दोनों ही जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक दशा को आने वाले महीनों में परिभाषित करेंगे।