20 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

गठबंधन से जनमुद्दे नहीं रुकेंगे — तारिक कर्रा का NC के साथ रिश्ते पर बड़ा बयान

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
गठबंधन से जनमुद्दे नहीं रुकेंगे — तारिक कर्रा का NC के साथ रिश्ते पर बड़ा बयान

सारांश

NC के साथ गठबंधन में रहते हुए भी कांग्रेस जनता की आवाज़ बुलंद करेगी — JKPCC अध्यक्ष तारिक कर्रा का यह बयान एक नाज़ुक राजनीतिक संतुलन की कहानी कहता है। राज्य दर्जे की शर्त पर अड़ी कांग्रेस सरकार का समर्थन करती है, पर मंत्रिमंडल में शामिल नहीं।

मुख्य बातें

JKPCC अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा ने 20 सितंबर 2026 को कहा कि NC के साथ गठबंधन जनमुद्दे उठाने में बाधा नहीं बनेगा।
आगामी जम्मू-कश्मीर विधानसभा सत्र से पहले कांग्रेस विधायक दल की बैठक आयोजित हुई।
वंदे मातरम और UPI जैसे मुद्दों पर NC से मतभेदों के बावजूद कांग्रेस ने गठबंधन को व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखने को कहा।
रिपोर्टों के अनुसार मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कांग्रेस को मंत्रिमंडल में पद की पेशकश की है।
कांग्रेस ने स्पष्ट किया — जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल होने तक मंत्रिमंडल में शामिल नहीं होगी।

जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (JKPCC) के अध्यक्ष और विधायक तारिक हमीद कर्रा ने 20 सितंबर 2026 को श्रीनगर में स्पष्ट किया कि सत्तारूढ़ राष्ट्रीय सम्मेलन (NC) के साथ गठबंधन में रहने के बावजूद कांग्रेस जम्मू-कश्मीर विधानसभा में जनता की वास्तविक चिंताओं को उठाना बंद नहीं करेगी। आगामी विधानसभा सत्र से पहले आयोजित कांग्रेस विधायक दल की बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए कर्रा ने यह बयान दिया।

विधायक दल की बैठक और सत्र की तैयारी

कर्रा ने बताया कि आगामी सत्र की रणनीति तय करने के लिए कांग्रेस विधायकों की बैठक बुलाई गई थी। उन्होंने कहा, 'हम वास्तविक चिंताओं को उठाएंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि उनका जल्द से जल्द समाधान हो।' उनके अनुसार विधानसभा का मूल उद्देश्य जनता से जुड़े मुद्दों को सामने लाना है — चाहे वे सत्ताधारी दल के सदस्यों द्वारा उठाए जाएँ या विपक्ष द्वारा।

गठबंधन और स्वतंत्र रुख के बीच संतुलन

कर्रा ने दो-टूक कहा, 'गठबंधन में होने का मतलब यह नहीं है कि हम लोगों के मुद्दों को नहीं उठाएंगे। गठबंधन में होने का मतलब यह नहीं है कि हम लोगों की जायज माँगों पर बात नहीं करेंगे।' यह ऐसे समय में आया है जब वंदे मातरम और UPI सहित कई मुद्दों पर NC और कांग्रेस के बीच मतभेद उभरे हैं। कर्रा ने इन मतभेदों को संकीर्ण नज़रिए से न देखने की अपील करते हुए कहा कि पार्टी ने 'व्यापक परिप्रेक्ष्य को ध्यान में रखते हुए सैद्धांतिक रुख अपनाते हुए यह गठबंधन किया।'

मंत्रिमंडल में शामिल होने पर कांग्रेस का रुख

रिपोर्टों के अनुसार, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कांग्रेस को मंत्रिमंडल में पद की पेशकश की है। हालाँकि, कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल नहीं किया जाता, तब तक वह सरकार में शामिल नहीं होगी। यह शर्त गठबंधन की सीमाओं को रेखांकित करती है और कांग्रेस की स्वायत्त राजनीतिक पहचान को बनाए रखने की कोशिश को दर्शाती है।

व्यापक राजनीतिक संदर्भ

गौरतलब है कि अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद जम्मू-कश्मीर के पहले विधानसभा चुनाव में NC और कांग्रेस ने मिलकर बहुमत हासिल किया था। लेकिन कांग्रेस का मंत्रिमंडल से बाहर रहने का फैसला इस गठबंधन को असामान्य स्थिति में रखता है — एक ऐसा दल जो सरकार को समर्थन देता है, पर उसका हिस्सा नहीं बनता। यह स्थिति कांग्रेस को विधानसभा के भीतर एक स्वतंत्र आवाज़ के रूप में उभरने का अवसर देती है, जो दीर्घावधि में उसकी राजनीतिक प्रासंगिकता के लिए अहम हो सकती है।

आगे क्या

आगामी विधानसभा सत्र में कांग्रेस किन मुद्दों को प्राथमिकता देती है, यह देखना होगा। राज्य के दर्जे की बहाली की माँग पर सरकार का रुख और NC-कांग्रेस संबंधों की दिशा — दोनों ही जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक दशा को आने वाले महीनों में परिभाषित करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन मंत्रिमंडल से बाहर रहने की कीमत — नीति-निर्माण में शून्य भागीदारी — दीर्घावधि में पार्टी को कमज़ोर भी कर सकती है। वंदे मातरम और UPI जैसे प्रतीकात्मक मुद्दों पर NC से असहमति बताती है कि गठबंधन अभी भी वैचारिक रूप से अस्थिर है। असली परीक्षा विधानसभा सत्र में होगी — क्या कांग्रेस वाकई सरकार की नीतियों पर सवाल उठाएगी, या यह बयानबाज़ी महज़ जनता को आश्वस्त करने की कवायद है?
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तारिक कर्रा ने NC गठबंधन को लेकर क्या कहा?
JKPCC अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा ने कहा कि NC के साथ गठबंधन में रहने के बावजूद कांग्रेस विधानसभा में जनता की वास्तविक चिंताओं को उठाना जारी रखेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि गठबंधन का अर्थ लोगों की जायज माँगों पर चुप रहना नहीं है।
कांग्रेस जम्मू-कश्मीर मंत्रिमंडल में शामिल क्यों नहीं हो रही?
कांग्रेस ने शर्त रखी है कि जब तक जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल नहीं किया जाता, तब तक वह मंत्रिमंडल में शामिल नहीं होगी। रिपोर्टों के अनुसार मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पद की पेशकश की है, लेकिन यह शर्त पूरी न होने तक कांग्रेस बाहर रहेगी।
NC और कांग्रेस के बीच किन मुद्दों पर मतभेद हैं?
वंदे मातरम और UPI सहित कई मुद्दों पर NC और कांग्रेस के बीच हाल ही में मतभेद सामने आए हैं। कर्रा ने इन्हें संकीर्ण नज़रिए से न देखने की अपील की और कहा कि गठबंधन व्यापक सैद्धांतिक आधार पर किया गया है।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा के आगामी सत्र में कांग्रेस की क्या रणनीति है?
कांग्रेस विधायक दल ने आगामी सत्र से पहले बैठक कर रणनीति तय की। कर्रा के अनुसार पार्टी जनता से जुड़े मुद्दे उठाएगी और उनके शीघ्र समाधान के लिए दबाव बनाएगी, चाहे वह सत्तापक्ष से हो या विपक्ष से।
जम्मू-कश्मीर में NC-कांग्रेस गठबंधन कब बना?
अनुच्छेद 370 निरस्त होने के बाद हुए जम्मू-कश्मीर के पहले विधानसभा चुनाव में NC और कांग्रेस ने मिलकर बहुमत हासिल किया था। इस गठबंधन के आधार पर उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में सरकार बनी, जिसे कांग्रेस बाहर से समर्थन दे रही है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 11 महीने पहले
  5. 11 महीने पहले
  6. 11 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले