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उमर अब्दुल्ला की NC विधायक बैठक: राज्य का दर्जा, शासन और विकास होंगे मुख्य एजेंडा — लारमी

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उमर अब्दुल्ला की NC विधायक बैठक: राज्य का दर्जा, शासन और विकास होंगे मुख्य एजेंडा — लारमी

सारांश

उमर अब्दुल्ला की प्रस्तावित विधायक बैठक को JKNC विधायक अब्दुल मजीद लारमी ने ‘आंतरिक पार्टी बैठक’ बताया, गठबंधन की नहीं। एजेंडे में कैबिनेट विस्तार नहीं, बल्कि राज्य का दर्जा, शासन और जनता के मुद्दे। कांग्रेस आमंत्रित नहीं; चार समर्थक निर्दलीय शामिल होंगे।

मुख्य बातें

उमर अब्दुल्ला की 3 जून को प्रस्तावित बैठक JKNC की आंतरिक बैठक है, गठबंधन की नहीं।
बैठक में कांग्रेस विधायकों को आमंत्रित नहीं किया गया है, पर पार्टी समर्थक चार निर्दलीय विधायक शामिल होंगे।
मुख्य एजेंडा: राज्य का दर्जा बहाली, शासन-प्रशासन और विकास के मुद्दे; कैबिनेट विस्तार पर चर्चा नहीं।
लारमी ने कहा कि अतीत की “राजनीतिक गलतियों” के चलते अनुच्छेद 370 और 35A हटाए गए।
विपक्ष के नेता सुनील शर्मा पर निशाना; महंगाई, शिक्षा और युवाओं के मुद्दों पर ध्यान देने की सलाह।

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा बुलाई गई जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (JKNC) विधायकों की प्रस्तावित बैठक पूरी तरह पार्टी की आंतरिक बैठक होगी, गठबंधन की नहीं — यह स्पष्टीकरण JKNC विधायक अब्दुल मजीद लारमी ने 3 जून को श्रीनगर में दिया। उन्होंने बताया कि बैठक का मुख्य फोकस राज्य का दर्जा बहाली, शासन-प्रशासन और विकास से जुड़े मुद्दों पर रहेगा, और इसमें कांग्रेस विधायकों को आमंत्रित नहीं किया गया है।

बैठक का स्वरूप और एजेंडा

लारमी ने बातचीत में कहा कि बैठक में कैबिनेट विस्तार को लेकर कोई चर्चा नहीं है। उनके अनुसार चर्चा का केंद्र शासन-प्रशासन, जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा लौटाने की मांग और आम लोगों से जुड़े मसले होंगे। सभी विधायक अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों की समस्याएँ और जनता की शिकायतें बैठक में रखेंगे।

उन्होंने दोहराया कि यह विशुद्ध रूप से नेशनल कॉन्फ्रेंस की बैठक है और इसे गठबंधन की बैठक के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। पार्टी का समर्थन करने वाले चार निर्दलीय विधायक भी बैठक में शामिल होंगे, जबकि कांग्रेस इसका हिस्सा नहीं होगी।

राज्य के दर्जे पर दो टूक

राज्य के दर्जे के मुद्दे पर जोर देते हुए लारमी ने कहा कि यह जम्मू-कश्मीर के लोगों का अधिकार है और इसे बहाल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश के ढाँचे में काम करना आसान नहीं है और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला इन चुनौतियों को भली-भांति समझते हैं।

लारमी के शब्दों में, “हम अपना हक मांग रहे हैं और हमारा मानना है कि राज्य का दर्जा बहाल होना चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि जिस तरह लद्दाख से जुड़े प्रस्तावों पर गंभीर चर्चा होती है, उसी तरह जम्मू-कश्मीर के अधिकारों पर भी विचार किया जाना चाहिए।

विपक्ष पर तीखा हमला

विपक्ष पर निशाना साधते हुए लारमी ने कहा कि आलोचना करना विपक्ष का काम है, लेकिन “अतीत की राजनीतिक गलतियों” के कारण ही जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35A को हटाया गया। उन्होंने दावा किया कि यदि वे गलतियाँ नहीं हुई होतीं, तो आज स्थिति भिन्न होती।

विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा पर भी उन्होंने हमला बोला और कहा कि विपक्ष को नेशनल कॉन्फ्रेंस तथा उमर अब्दुल्ला को लगातार निशाना बनाने के बजाय महंगाई, विकास, शिक्षा और युवाओं के भविष्य जैसे वास्तविक मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।

आगे क्या

यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद जम्मू-कश्मीर में पहली निर्वाचित सरकार राज्य के दर्जे की बहाली को अपनी प्राथमिक राजनीतिक मांग के रूप में आगे बढ़ा रही है। गौरतलब है कि सत्तारूढ़ NC और कांग्रेस के बीच गठबंधन की रसायन शास्त्र को लेकर भी सवाल समय-समय पर उठते रहे हैं, और कांग्रेस विधायकों को इस बैठक से बाहर रखे जाने को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर राजनीतिक रूप से यह NC-कांग्रेस गठबंधन की महीन दरारों का संकेत भी है। लारमी का राज्य के दर्जे पर ज़ोर वही पुरानी मांग है, जिसे केंद्र अब तक टालता आया है — और मुख्यमंत्री बनने के बाद उमर अब्दुल्ला के पास इसे आगे बढ़ाने के संवैधानिक उपकरण सीमित हैं। अनुच्छेद 370 हटने की जिम्मेदारी ‘अतीत की गलतियों’ पर डालना सुविधाजनक राजनीति है, पर यह उस सवाल को टाल देता है कि बहाली के लिए NC की ठोस रणनीति क्या है। असली परीक्षा बयानबाज़ी नहीं, बल्कि दिल्ली के साथ बातचीत में मूर्त प्रगति होगी।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उमर अब्दुल्ला की प्रस्तावित बैठक किस बारे में है?
यह जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों की आंतरिक बैठक है, जिसका मुख्य एजेंडा राज्य का दर्जा बहाली, शासन-प्रशासन और विकास से जुड़े मुद्दे हैं। विधायक अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याएँ भी बैठक में रखेंगे।
क्या यह बैठक NC-कांग्रेस गठबंधन की बैठक है?
नहीं। विधायक अब्दुल मजीद लारमी के अनुसार यह विशुद्ध रूप से नेशनल कॉन्फ्रेंस की आंतरिक बैठक है, और इसमें कांग्रेस विधायकों को आमंत्रित नहीं किया गया है। पार्टी का समर्थन करने वाले चार निर्दलीय विधायक ज़रूर शामिल होंगे।
क्या बैठक में कैबिनेट विस्तार पर चर्चा होगी?
लारमी के अनुसार बैठक में कैबिनेट विस्तार को लेकर कोई चर्चा नहीं है। चर्चा का केंद्र शासन-प्रशासन, राज्य का दर्जा और जनता से जुड़े मुद्दे रहेंगे।
राज्य के दर्जे पर नेशनल कॉन्फ्रेंस का रुख क्या है?
लारमी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करना लोगों का अधिकार है और यह तत्काल बहाल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश के ढाँचे में काम करना आसान नहीं है।
लारमी ने विपक्ष पर क्या आरोप लगाए?
लारमी ने कहा कि अतीत की राजनीतिक गलतियों के कारण ही अनुच्छेद 370 और 35A हटाए गए। उन्होंने विपक्ष के नेता सुनील शर्मा से NC पर हमले बंद कर महंगाई, शिक्षा, विकास और युवाओं के मुद्दों पर ध्यान देने को कहा।
राष्ट्र प्रेस
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