उमर अब्दुल्ला की NC विधायक बैठक: राज्य का दर्जा, शासन और विकास होंगे मुख्य एजेंडा — लारमी
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा बुलाई गई जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (JKNC) विधायकों की प्रस्तावित बैठक पूरी तरह पार्टी की आंतरिक बैठक होगी, गठबंधन की नहीं — यह स्पष्टीकरण JKNC विधायक अब्दुल मजीद लारमी ने 3 जून को श्रीनगर में दिया। उन्होंने बताया कि बैठक का मुख्य फोकस राज्य का दर्जा बहाली, शासन-प्रशासन और विकास से जुड़े मुद्दों पर रहेगा, और इसमें कांग्रेस विधायकों को आमंत्रित नहीं किया गया है।
बैठक का स्वरूप और एजेंडा
लारमी ने बातचीत में कहा कि बैठक में कैबिनेट विस्तार को लेकर कोई चर्चा नहीं है। उनके अनुसार चर्चा का केंद्र शासन-प्रशासन, जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा लौटाने की मांग और आम लोगों से जुड़े मसले होंगे। सभी विधायक अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों की समस्याएँ और जनता की शिकायतें बैठक में रखेंगे।
उन्होंने दोहराया कि यह विशुद्ध रूप से नेशनल कॉन्फ्रेंस की बैठक है और इसे गठबंधन की बैठक के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। पार्टी का समर्थन करने वाले चार निर्दलीय विधायक भी बैठक में शामिल होंगे, जबकि कांग्रेस इसका हिस्सा नहीं होगी।
राज्य के दर्जे पर दो टूक
राज्य के दर्जे के मुद्दे पर जोर देते हुए लारमी ने कहा कि यह जम्मू-कश्मीर के लोगों का अधिकार है और इसे बहाल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश के ढाँचे में काम करना आसान नहीं है और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला इन चुनौतियों को भली-भांति समझते हैं।
लारमी के शब्दों में, “हम अपना हक मांग रहे हैं और हमारा मानना है कि राज्य का दर्जा बहाल होना चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि जिस तरह लद्दाख से जुड़े प्रस्तावों पर गंभीर चर्चा होती है, उसी तरह जम्मू-कश्मीर के अधिकारों पर भी विचार किया जाना चाहिए।
विपक्ष पर तीखा हमला
विपक्ष पर निशाना साधते हुए लारमी ने कहा कि आलोचना करना विपक्ष का काम है, लेकिन “अतीत की राजनीतिक गलतियों” के कारण ही जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35A को हटाया गया। उन्होंने दावा किया कि यदि वे गलतियाँ नहीं हुई होतीं, तो आज स्थिति भिन्न होती।
विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा पर भी उन्होंने हमला बोला और कहा कि विपक्ष को नेशनल कॉन्फ्रेंस तथा उमर अब्दुल्ला को लगातार निशाना बनाने के बजाय महंगाई, विकास, शिक्षा और युवाओं के भविष्य जैसे वास्तविक मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।
आगे क्या
यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद जम्मू-कश्मीर में पहली निर्वाचित सरकार राज्य के दर्जे की बहाली को अपनी प्राथमिक राजनीतिक मांग के रूप में आगे बढ़ा रही है। गौरतलब है कि सत्तारूढ़ NC और कांग्रेस के बीच गठबंधन की रसायन शास्त्र को लेकर भी सवाल समय-समय पर उठते रहे हैं, और कांग्रेस विधायकों को इस बैठक से बाहर रखे जाने को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।