करेगुट्टा में तेलंगाना डीजीपी ने फहराया तिरंगा, 50 साल बाद माओवाद मुक्त इलाके में विकास का संकल्प
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सी.वी. आनंद ने सोमवार, 10 अगस्त 2026 को तेलंगाना-छत्तीसगढ़-ओडिशा की त्रिकोणीय सीमा पर स्थित करेगुट्टा में राष्ट्रीय ध्वज फहराया — वह इलाका जो दशकों तक माओवादी प्रभाव का केंद्र रहा। यह यात्रा उस ऐतिहासिक बदलाव का प्रतीक है जब 50 वर्षों के वामपंथी उग्रवाद के बाद यह क्षेत्र शांति और विकास की राह पर अग्रसर हो रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
डीजीपी आनंद ने दूर-दराज के इस घने जंगली इलाके में जारी सड़क निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया और शांति के प्रतीक के रूप में सफेद कबूतर छोड़े। उनके साथ पुलिस, केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), वन, राजस्व और अन्य सरकारी विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों का संयुक्त दल भी मौजूद रहा। यह उपस्थिति इस बात का संकेत है कि प्रशासन अब सुरक्षा के बाद विकास की ओर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
ऑपरेशन कगार और माओवाद पर अंकुश
मीडिया से बातचीत में डीजीपी आनंद ने बताया कि तेलंगाना पुलिस, ग्रेहाउंड्स, स्पेशल पुलिस फोर्स, सीआरपीएफ, कोबरा यूनिट और छत्तीसगढ़ पुलिस के संयुक्त अभियानों ने इस इलाके में माओवादी गतिविधियों को निर्णायक रूप से कमज़ोर किया है। उन्होंने बताया कि 'ऑपरेशन कगार' के दौरान लगभग 700 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया, कई बड़े नेता मुठभेड़ में मारे गए और अन्य मुख्यधारा में लौट आए। उनके अनुसार, देशभर में अब सेंट्रल कमेटी के केवल कुछ ही नेता सक्रिय बचे हैं।
गौरतलब है कि यह वही इलाका है जहाँ कभी माओवादी संगठन की पकड़ इतनी मज़बूत थी कि सरकारी अधिकारी वहाँ जाने से कतराते थे। आज उसी करेगुट्टा में डीजीपी का तिरंगा फहराना एक प्रतीकात्मक और रणनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण घटना है।
सरेंडर करने वाले माओवादियों के पुनर्वास की योजना
डीजीपी आनंद ने बताया कि राज्य सरकार आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों के पुनर्वास के लिए ठोस कदम उठा रही है। इसमें आर्थिक सहायता, भूमि आवंटन और रोज़गार के अवसर शामिल हैं। साथ ही, समाज में उनकी सहज वापसी सुनिश्चित करने के लिए निरंतर निगरानी भी की जा रही है। दौरे के दौरान डीजीपी ने पामुरु कैंप के निकट रहने वाले गुट्टी कोया परिवारों को आवश्यक सामग्री वितरित की और सरकार की ओर से निरंतर सहयोग का आश्वासन दिया।
बुनियादी ढाँचे और पर्यटन की संभावनाएँ
करेगुट्टा में पर्यटन की व्यापक संभावनाओं का उल्लेख करते हुए आनंद ने कहा कि सरकार पर्यावरण और कानूनी नियमों के अनुरूप इस इलाके का विकास करना चाहती है। पामुरु से चलामादावा तक डामर सड़क का निर्माण पूरा हो चुका है और जल्द ही बीटी सड़क बिछाने का कार्य शुरू होगा। इसके अलावा, पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बिजली, मोबाइल कनेक्टिविटी और अन्य बुनियादी सुविधाएँ भी विकसित की जाएंगी।
सीआरपीएफ की भूमिका की सराहना
डीजीपी ने सीआरपीएफ की 196 बटालियन के जवानों की विशेष सराहना की। उन्होंने कहा कि ये जवान महीनों तक अपने परिवारों से दूर रहकर दुर्गम इलाकों में सेवा देते हैं और इलाके में शांति बहाल करने में उनकी प्रतिबद्धता तथा पेशेवर रवैये ने अहम भूमिका निभाई है। इस दौरे में अतिरिक्त डीजीपी संजय जैन, आईजी चंद्र शेखर रेड्डी, इंटेलिजेंस आईजी कार्तिकेय, एसआईबी एसपी सिंधु शर्मा, मुलुगु कलेक्टर बोरकडे हेमंत सहदेवराव, मुलुगु एसपी सुधीर रामनाथ केकन और जिला वन अधिकारी विकास मीना सहित राजस्व, पर्यटन और अन्य विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
करेगुट्टा का यह रूपांतरण — हथियारों से सड़कों की ओर, भय से पर्यटन की ओर — भारत के माओवाद-विरोधी अभियान के एक नए अध्याय की शुरुआत का संकेत देता है।