बिहार टेंडर घोटाला: रिशु श्री कनेक्शन में दो IAS अधिकारी सस्पेंड, यूरोप यात्रा और बागवानी पर ₹21 लाख से अधिक का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
बिहार सरकार ने 30 मई को चर्चित टेंडर घोटाले में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के दो वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित कर दिया। दोनों अधिकारियों पर घोटाले के कथित मास्टरमाइंड रिशु श्री से अनुचित लाभ लेने का आरोप है। इस कार्रवाई के बाद पटना के प्रशासनिक गलियारों में हलचल मच गई है।
किन अधिकारियों पर हुई कार्रवाई
निलंबित किए गए अधिकारियों में 2017 बैच के IAS अधिकारी योगेश कुमार सागर और 2014 बैच की IAS अधिकारी अभिलाषा कुमारी शर्मा शामिल हैं। योगेश कुमार सागर समाज कल्याण विभाग के एक निदेशालय में निदेशक पद पर तैनात थे, जबकि अभिलाषा शर्मा ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत संचालित जीविका परियोजना की मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) के पद पर कार्यरत हैं।
योगेश कुमार सागर पर आरोप
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बरेली निवासी योगेश कुमार सागर पर आरोप है कि उन्होंने टेंडर घोटाले के आरोपी रिशु श्री के खर्चे पर अपने परिवार सहित यूरोप की यात्रा की। जाँच में सामने आया है कि इस यात्रा के दौरान उनके साथ 8 परिजन भी शामिल थे और दल ने कई यूरोपीय देशों का भ्रमण किया। यात्रा का संपूर्ण खर्च — जिसमें हवाई किराया, होटल और अन्य व्यय शामिल हैं — कथित तौर पर रिशु श्री ने वहन किया। जाँच एजेंसियों के अनुसार इस पूरी यात्रा की लागत लगभग ₹21.92 लाख आँकी गई है।
अभिलाषा शर्मा पर आरोप
IAS अधिकारी अभिलाषा शर्मा पर आरोप है कि उन्होंने रिशु श्री के खर्चे से अपने आवास की छत पर लगभग ₹9 लाख की लागत से बागवानी और सौंदर्यीकरण कार्य कराया। इसके अतिरिक्त उन पर रिशु श्री से महँगे उपहार स्वीकार करने का भी आरोप है। दोनों ही मामलों में आरोप अभी जाँच के दायरे में हैं।
प्रशासनिक असर और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में टेंडर आवंटन प्रक्रिया की पारदर्शिता पहले से सवालों के घेरे में है। गौरतलब है कि रिशु श्री से जुड़े इस घोटाले की जाँच पहले से जारी थी और यह निलंबन उसी की एक कड़ी है। प्रशासनिक विशेषज्ञों के अनुसार, वरिष्ठ IAS अधिकारियों का इस तरह सस्पेंड होना असाधारण है और यह संकेत देता है कि जाँच में ठोस साक्ष्य मिले हैं। आगे विभागीय जाँच और संभावित आपराधिक कार्यवाही की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।