बिहार टेंडर घोटाला: SVU ने पटना में दो निलंबित IAS अधिकारियों के आवासों पर एक साथ छापा मारा
सारांश
मुख्य बातें
बिहार की विशेष सतर्कता इकाई (SVU) ने शुक्रवार, 19 जून 2026 को पटना में हाई-प्रोफाइल रिशु श्री निविदा घोटाले की जांच के तहत कई स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। निलंबित आईएएस अधिकारियों अभिलाषा शर्मा और योगेश सागर के आवासों के साथ-साथ निजी ठेकेदार पवन कुमार से जुड़े परिसरों पर भी तलाशी अभियान चलाया गया। यह कार्रवाई मुख्य आरोपी रिशु श्री से पूछताछ के दौरान मिली जानकारी के आधार पर की गई बताई जा रही है।
छापेमारी का घटनाक्रम
SVU की एक टीम तड़के सुबह योगेश सागर के गार्डनीबाग कॉलोनी स्थित सरकारी आवास पर पहुँची और व्यापक तलाशी अभियान चलाया। जांचकर्ताओं ने सरकारी ठेकों और वित्तीय लेनदेन से संबंधित दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अभिलेखों की जांच की। कई दस्तावेजों को आगे की जांच के लिए जब्त किया गया।
उसी समय एक अन्य टीम ने अभिलाषा शर्मा के नेहरू पथ स्थित आवास पर दस्तक दी। सूत्रों के अनुसार, जांचकर्ताओं के पहुँचने पर घर बंद था, जिसके बाद टीम ने स्टाफ क्वार्टर के रास्ते प्रवेश किया और तलाशी शुरू की। बताया जा रहा है कि इस अभियान के दौरान न तो शर्मा और न ही सागर अपने-अपने आवासों पर मौजूद थे।
ठेकेदार के परिसर पर भी तलाशी
SVU ने विहार कॉलोनी, बेउर में पवन कुमार — जो मातृ सेवा इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक हैं — से जुड़े स्थानों की भी तलाशी ली। जांचकर्ता कंपनी के रिकॉर्ड, वित्तीय दस्तावेज और सरकारी टेंडरों से संबंधित फाइलों की जांच कर रहे हैं। अधिकारियों को संदेह है कि जब्त की गई सामग्री से वित्तीय लेनदेन और कथित अनियमितताओं से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य मिल सकते हैं।
घोटाले की पृष्ठभूमि
जांचकर्ताओं के अनुसार, यह जांच उन आरोपों पर केंद्रित है कि कुछ सरकारी अधिकारियों ने मुख्य आरोपी रिशु श्री से जुड़ी कंपनियों को सरकारी ठेके दिलाने में मदद की और इसके बदले में कथित तौर पर भारी रिश्वत का लेन-देन हुआ। घोटाले के सामने आने और SVU द्वारा एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद, बिहार सरकार ने जांच लंबित रहने तक दोनों आईएएस अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। गौरतलब है कि मुख्य आरोपी रिशु श्री फिलहाल जांच एजेंसियों की हिरासत में हैं और पिछले कई दिनों से उनसे गहन पूछताछ की जा रही है।
जांच का दायरा और आगे की कार्रवाई
सूत्रों के अनुसार, रिशु श्री से पूछताछ के दौरान मिली जानकारी के आधार पर जांचकर्ताओं ने जांच का दायरा बढ़ाया है और इस मामले से कथित तौर पर जुड़े अधिकारियों, ठेकेदारों व अन्य व्यक्तियों की भूमिकाओं की गहन जांच की जा रही है। जांच एजेंसियाँ छापेमारी के दौरान एकत्र किए गए दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और वित्तीय साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि कथित नेटवर्क की पूरी जानकारी और किसी भी प्रकार की अनियमितता का खुलासा जांच पूरी होने के बाद ही होगा। तलाशी अभियान जारी है और आगे की कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।