टीजीटी-पीजीटी अभ्यर्थियों का आंदोलन स्थगित, सीएम योगी के आश्वासन पर 18 दिन का आमरण अनशन समाप्त
सारांश
मुख्य बातें
प्रयागराज के शिक्षा निदेशालय पर पुरानी नियमावली के तहत अतिरिक्त अवसर की माँग को लेकर कई महीनों से चल रहा टीजीटी-पीजीटी अभ्यर्थियों का आंदोलन 23 सितंबर 2026 को आखिरकार स्थगित हो गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सार्वजनिक आश्वासन के बाद जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा और पुलिस कमिश्नर पीयूष मोर्डिया ने अनशन कर रहे चारों अभ्यर्थियों को जूस पिलाकर उनका आमरण अनशन तुड़वाया, जिसके बाद निदेशालय परिसर में जश्न का माहौल बन गया।
आंदोलन की पृष्ठभूमि
अभ्यर्थियों की माँग थी कि पीजीटी और टीजीटी भर्ती में पुरानी नियमावली के तहत — अर्थात् उसी अर्हता और उसी परीक्षा पैटर्न पर — उन्हें एक अतिरिक्त अवसर दिया जाए। इस माँग को लेकर पिछले तीन महीनों से क्रमिक अनशन चल रहा था। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब 18 दिन पहले चार अभ्यर्थी आमरण अनशन पर बैठ गए और प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा निदेशालय को तीन दिनों तक लगातार घेरे रखा।
सीएम योगी का हस्तक्षेप
अभ्यर्थी अतुल मिश्रा ने बताया, 'मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आश्वासन दिया है कि पुरानी नियमावली के तहत हमें एक अवसर दिया जाएगा। इसी वजह से जिलाधिकारी और पुलिस कमिश्नर ने हमारा अनशन तुड़वाया है। हम लिखित आश्वासन का इंतजार कर रहे हैं।' गौरतलब है कि मंगलवार को ही मुख्यमंत्री ने नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम के दौरान सार्वजनिक रूप से कहा था कि धरना दे रहे टीजीटी-पीजीटी अभ्यर्थियों को अवसर देने का कार्य किया जाएगा।
अभ्यर्थियों की प्रतिक्रिया
एक अन्य अभ्यर्थी अजीत प्रताप ने कहा, 'मुख्यमंत्री ने अवसर देने का आश्वासन दिया है। हमें विश्वास है कि अगर सीएम ने कहा है तो पुरानी नियमावली से अवसर आना चाहिए।' एक और अभ्यर्थी ने कहा, 'सभी भाई-बहन मिठाई खा रहे हैं। हमें बस जल्द से जल्द नोटिस मिल जाए, यही काफी है।'
आगे क्या होगा
अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया है कि वे अभी लिखित आश्वासन का इंतजार कर रहे हैं और जब तक आधिकारिक नोटिस जारी नहीं होता, आंदोलन केवल स्थगित है — समाप्त नहीं। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर अनेक अभ्यर्थी समूह न्यायालयों और सड़कों पर लड़ाई लड़ रहे हैं। अब सरकार की जवाबदेही होगी कि वह मुख्यमंत्री के मौखिक वचन को समयबद्ध लिखित नीति में तब्दील करे।