बिहार पोषण टेंडर पर सिसोदिया का हमला: ₹1,432 करोड़ में 'चहेती कंपनी' के लिए रास्ता बनाने का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने 20 सितंबर 2026 को बिहार सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य में बच्चों के पोषण के लिए जारी ₹1,432 करोड़ के टेंडर में जानबूझकर ऐसी शर्तें जोड़ी गई हैं जिससे छोटी कंपनियाँ और स्थानीय आपूर्तिकर्ता बाहर हो जाएँ। सिसोदिया ने आरोप लगाया कि यह टेंडर किसी 'खास' और 'चहेती कंपनी' के अनुकूल तैयार किया गया है।
टेंडर में क्या बदला और कैसे
सिसोदिया के अनुसार, बिहार सरकार ने बच्चों की पोषण योजना के लिए ₹1,432 करोड़ का टेंडर जारी किया, लेकिन इसमें शर्तें कई बार बदली गईं। पहले बैंक गारंटी मात्र ₹10 लाख थी, जिसे अचानक बढ़ाकर ₹28.64 करोड़ कर दिया गया। इसके बाद ₹100 करोड़ के न्यूनतम टर्नओवर की शर्त और 15,000 मीट्रिक टन आपूर्ति के अनुभव की अनिवार्यता भी जोड़ दी गई।
इन बदलावों से छोटे और मध्यम दर्जे के स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं के लिए इस टेंडर में भाग लेना व्यावहारिक रूप से असंभव हो गया। सिसोदिया ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'यह टेंडर निकाला गया है या किसी चहेती कंपनी के नाप का सूट सिलवाया गया है।'
सिसोदिया के आरोप और सवाल
सिसोदिया ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'भाजपा राज में टेंडर कैसे होता है, देखिए। बिहार के बच्चों के पोषण के लिए आवंटित 1,432 करोड़ रुपए का टेंडर भाजपा स्टाइल में जारी किया जा रहा है।' उन्होंने सवाल उठाया कि 'बार-बार शर्तें बदलकर आखिर किसे बाहर किया जा रहा है और किसके लिए रास्ता बनाया जा रहा है?'
गौरतलब है कि सिसोदिया स्वयं दिल्ली की पूर्व सरकार में उपमुख्यमंत्री रहे हैं और आबकारी नीति मामले में लंबे समय तक न्यायिक हिरासत में रह चुके हैं। उनकी इस टिप्पणी को राजनीतिक पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है, हालाँकि उनके आरोप तथ्यात्मक बिंदुओं पर आधारित हैं जिनकी स्वतंत्र जाँच अभी नहीं हुई है।
जाँच एजेंसियों पर निशाना
सिसोदिया ने आरोप लगाया कि इतने बड़े टेंडर में कथित अनियमितताओं के बावजूद केंद्रीय जाँच एजेंसियाँ चुप हैं। उन्होंने लिखा, 'इतने बड़े खेल पर न ईडी पूछेगी, न सीबीआई, न विजिलेंस — क्योंकि सरकार भाजपा की है।' उन्होंने केंद्र और राज्य, दोनों स्तरों पर जवाबदेही की माँग की।
यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल राज्य सरकारों पर टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। बिहार सरकार या भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
बच्चों के पोषण पर सवाल
बिहार में बाल कुपोषण एक दीर्घकालिक समस्या रही है। राज्य में पोषण अभियान के तहत सरकारी योजनाओं पर करोड़ों रुपए खर्च होते हैं। आलोचकों का कहना है कि यदि इन योजनाओं के टेंडर में ही गड़बड़ी होती है तो लाभ अंततः उन बच्चों तक नहीं पहुँचता जिनके लिए धन आवंटित किया गया है।
सिसोदिया ने माँग की है कि इस टेंडर की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए और बिहार के बच्चों के हित में पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए। अब देखना होगा कि विपक्ष के इन आरोपों पर बिहार सरकार क्या स्पष्टीकरण देती है।