तंजावुर में सांबा सीजन 2026: बीज विक्रेताओं पर सख्त निगरानी, उल्लंघन पर बीज अधिनियम के तहत कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के तंजावुर जिले में सांबा धान सीजन की बुआई से पहले प्रशासन ने निजी बीज विक्रेताओं के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। 20 अगस्त 2026 को जारी इन निर्देशों के तहत डीलर केवल सांबा सीजन के लिए अनुमोदित धान की किस्में ही बेच सकेंगे और बीज प्रमाणन तथा रिकॉर्ड-कीपिंग के नियमों का पूर्ण अनुपालन अनिवार्य किया गया है। बीज निरीक्षण की उप निदेशक सुजाता ने स्पष्ट किया कि सांबा सीजन के लिए अनुपयुक्त किस्मों की बिक्री पर बीज अधिनियम 1966, बीज नियम 1968 और बीज नियंत्रण आदेश 1983 के अंतर्गत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सांबा सीजन और इसका महत्त्व
सांबा सीजन तमिलनाडु में धान की खेती का सबसे प्रमुख कृषि मौसम है, जो अगस्त से जनवरी तक चलता है। तंजावुर जिला, जिसे 'तमिलनाडु का चावल का कटोरा' कहा जाता है, इस सीजन में बड़े पैमाने पर धान उत्पादन करता है। उप निदेशक सुजाता के अनुसार, जिलेभर के किसान सांबा की खेती की तैयारी में जुटे हैं और उन्हें गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है।
बीज पैकेजिंग और टैगिंग के नियम
बिक्री के लिए रखे गए प्रत्येक प्रमाणित बीज पैकेट पर दो टैग अनिवार्य रूप से लगाने होंगे — एक प्रमाणन टैग और एक सूचना टैग। दोनों टैग सफेद या नीले रंग के होने चाहिए। सूचना टैग पर बीज अधिनियम के अनुसार 14 अनिवार्य विवरण दर्ज होने चाहिए, जिनमें फसल का नाम, किस्म, बैच नंबर, एक्सपायरी तारीख और सीजन-उपयुक्तता शामिल हैं।
सभी निजी डीलरों को बीज स्टॉक रजिस्टर और अंकुरण रिपोर्ट अनिवार्य रूप से रखनी होगी। प्रत्येक लॉट का स्टॉक अलग-अलग पन्नों पर दर्ज करना होगा, ताकि निरीक्षण के दौरान पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
अनुमोदित किस्में और प्राथमिकता क्रम
प्रशासन ने 150 से 160 दिन में तैयार होने वाली लंबी अवधि की धान की किस्मों को इस सांबा सीजन के लिए सर्वाधिक उपयुक्त बताया है। डीलरों को निम्न प्राथमिकता क्रम में बीज बेचने के निर्देश दिए गए हैं:
प्रथम प्राथमिकता: सावित्री सीआर 1009, सीआर 1009 सब-1 और एडीटी 51।
द्वितीय प्राथमिकता (मध्यम अवधि की किस्में): एडीटी 38, एडीटी 39, एडीटी 42, एडीटी 46, व्हाइट पोन्नी, आईआर 20, सीओ 43, सीओ 46, सीओ 50 और इम्प्रूव्ड व्हाइट पोन्नी।
तमिलनाडु के बाहर की किस्में — जैसे बीपीटी 5204, एमटीयू 7029, एनएलआर 34449 और केएनएम 1638 — बेचने पर डीलरों को फॉर्म II का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक किसान को बीज खरीद पर पक्की रसीद देना भी जरूरी है।
बीज स्टॉक और गुणवत्ता जाँच
जिले में निजी दुकानों पर बिक्री के लिए लगभग 2,750 टन लंबी और मध्यम अवधि के धान के बीज का स्टॉक किया गया है। बीज की अंकुरण गुणवत्ता की जाँच के लिए कुंभकोणम, तंजावुर और पट्टुकोट्टई में तैनात बीज निरीक्षक आधिकारिक नमूने ले रहे हैं, जिन्हें परीक्षण के लिए तंजावुर की बीज परीक्षण प्रयोगशाला में भेजा जा रहा है।
उल्लंघन पर कार्रवाई और आगे की राह
उप निदेशक सुजाता ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले डीलरों के खिलाफ बीज अधिनियम 1966, बीज नियम 1968 और बीज नियंत्रण आदेश 1983 के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। डीलरों को निर्देश दिया गया है कि किसान को बीज सौंपने से पहले हर लॉट का लेबल, अंकुरण रिपोर्ट और सीजन-उपयुक्तता की जाँच अनिवार्य रूप से करें — इसमें किसी प्रकार की छूट नहीं दी जाएगी। यह पहल तंजावुर के किसानों को सांबा सीजन में गुणवत्तापूर्ण उपज सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।