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टीएमसी बिखर चुकी है, ममता बनर्जी का अस्तित्व खत्म: बिहार मंत्री राम कृपाल यादव

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टीएमसी बिखर चुकी है, ममता बनर्जी का अस्तित्व खत्म: बिहार मंत्री राम कृपाल यादव

सारांश

बिहार मंत्री राम कृपाल यादव ने टीएमसी को 'पूरी तरह बिखरी हुई' पार्टी बताया और कहा कि ममता बनर्जी का राजनीतिक अस्तित्व समाप्त हो गया है। 20 कथित बागी सांसदों के एनडीए को समर्थन के बीच यह बयान पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर सकता है।

मुख्य बातें

बिहार मंत्री राम कृपाल यादव ने 10 जून 2026 को पटना में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को 'खंड-खंड विखंडित' बताया।
कथित 20 बागी टीएमसी सांसदों के एनडीए को समर्थन के मुद्दे पर यह बयान आया।
यादव ने कहा कि ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी दोनों का राजनीतिक प्रभाव समाप्त हो गया है।
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर विवादित टिप्पणी की भी निंदा की।
यादव ने कर्पूरी ठाकुर और लालू प्रसाद यादव का हवाला देते हुए संवैधानिक पदों की गरिमा बनाए रखने की अपील की।

बिहार सरकार में मंत्री राम कृपाल यादव ने 10 जून 2026 को पटना में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी पूरी तरह बिखर चुकी है और ममता बनर्जी का राजनीतिक अस्तित्व समाप्त हो गया है। एनडीए सरकार को कथित समर्थन देने वाले 20 बागी टीएमसी सांसदों के मुद्दे पर उन्होंने यह बयान दिया।

टीएमसी पर सीधा हमला

राम कृपाल यादव ने कहा कि ममता बनर्जी की पार्टी खंड-खंड होकर विखंडित हो गई है। उनके शब्दों में, 'टीएमसी की पहचान खत्म हो गई है और एक नई टीएमसी सामने आई है, जो एनडीए के साथ है।' उन्होंने आगे कहा कि अभिषेक बनर्जी की दादागिरी भी समाप्त हो गई है और ममता दीदी का कोई अस्तित्व नहीं बचा है।

यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल की राजनीति में टीएमसी के भीतर कथित बगावत की खबरें सामने आ रही हैं। गौरतलब है कि 20 टीएमसी सांसदों के एनडीए को समर्थन देने के दावों ने पार्टी की एकजुटता पर सवाल खड़े किए हैं।

तेजस्वी यादव की टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया

बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव द्वारा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर की गई विवादित टिप्पणी को लेकर भी राम कृपाल यादव ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष का पद एक संवैधानिक पद है और इसकी गरिमा बनाए रखी जानी चाहिए।

उन्होंने कहा, 'विपक्ष के नेता का पद एक संवैधानिक पद है। कर्पूरी ठाकुर और लालू प्रसाद यादव सहित कई सम्मानित नेताओं ने इस पद को सुशोभित किया है। ऐसे बयान देकर आप अपना ही कद क्यों घटा रहे हैं?'

संवैधानिक पदों की गरिमा पर जोर

राम कृपाल यादव ने मुख्यमंत्री पद का भी हवाला देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री, मुख्यमंत्री ही होता है और उस पर अमर्यादित टिप्पणी उचित नहीं है। उन्होंने कहा, 'यह ठीक है कि आप विपक्ष में हैं, लेकिन अपने पद की गरिमा को कम नहीं करना चाहिए। इससे दुनिया में जगहंसाई हो रही है और सवाल आप पर ही उठ रहे हैं।'

उन्होंने भाषाई मर्यादा पर भी जोर देते हुए कहा कि बोली, वचन और भाषा — इन सबमें व्यक्ति को संतुलन बनाए रखना चाहिए। विपक्ष का नेता होने का अर्थ यह नहीं कि अपशब्दों या अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया जाए।

राजनीतिक संदर्भ

बिहार और पश्चिम बंगाल दोनों राज्यों में सियासी सरगर्मी बढ़ी हुई है। बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार और विपक्ष के बीच वाकयुद्ध तेज हो गया है, जबकि बंगाल में टीएमसी के भीतर कथित विभाजन की खबरें राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। आने वाले दिनों में इन दोनों राज्यों की राजनीतिक दिशा स्पष्ट होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

इसे भाजपा नेताओं द्वारा बार-बार उठाया जा रहा है। दूसरी ओर, तेजस्वी यादव पर की गई टिप्पणी बिहार में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ते वाकयुद्ध को दर्शाती है, जो आगामी चुनावी समीकरणों की पृष्ठभूमि में और तीखी होती जा रही है। मुख्यधारा की कवरेज बयानबाजी पर केंद्रित है, लेकिन असली सवाल यह है कि टीएमसी के भीतर कथित विभाजन की जमीनी सच्चाई क्या है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम कृपाल यादव ने टीएमसी के बारे में क्या कहा?
बिहार मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पूरी तरह बिखर चुकी है और ममता बनर्जी का राजनीतिक अस्तित्व समाप्त हो गया है। उन्होंने अभिषेक बनर्जी की राजनीतिक ताकत के भी खत्म होने का दावा किया।
20 बागी टीएमसी सांसदों का मामला क्या है?
कथित तौर पर 20 टीएमसी सांसदों ने एनडीए सरकार को समर्थन देने का संकेत दिया है, जिससे पार्टी की एकजुटता पर सवाल उठे हैं। हालाँकि यह दावा अभी तक स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुआ है।
तेजस्वी यादव की किस टिप्पणी पर विवाद हुआ?
बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर एक विवादित टिप्पणी की, जिसे राम कृपाल यादव ने संवैधानिक पद की गरिमा के विरुद्ध बताया। यादव ने कहा कि इस तरह की भाषा से तेजस्वी का अपना कद घटता है।
राम कृपाल यादव ने संवैधानिक पदों पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष और मुख्यमंत्री दोनों संवैधानिक पद हैं और इनकी गरिमा बनाए रखना हर नेता की जिम्मेदारी है। उन्होंने कर्पूरी ठाकुर और लालू प्रसाद यादव का उदाहरण देते हुए कहा कि इस पद को सुशोभित करने वाले नेताओं ने हमेशा मर्यादा बनाए रखी।
इस बयान का बिहार और बंगाल की राजनीति पर क्या असर पड़ सकता है?
यह बयान दोनों राज्यों में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा सकता है। बंगाल में टीएमसी के भीतर कथित दरार को एनडीए राष्ट्रीय स्तर पर उठा रही है, जबकि बिहार में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच वाकयुद्ध आगामी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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