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सर्वदलीय बैठक से विपक्ष का वॉकआउट: टीएमसी बागी सांसदों को बुलाने पर कांग्रेस, सपा और 'आप' भड़के

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सर्वदलीय बैठक से विपक्ष का वॉकआउट: टीएमसी बागी सांसदों को बुलाने पर कांग्रेस, सपा और 'आप' भड़के

सारांश

मानसून सत्र से पहले ही संसद का माहौल गरमा गया। TMC के कथित बागी सांसदों को सर्वदलीय बैठक में बुलाने पर कांग्रेस, सपा, AAP और अन्य विपक्षी दलों ने वॉकआउट किया। 20 अयोग्यता याचिकाएँ लंबित हैं और लोकसभा अध्यक्ष की मंजूरी भी नहीं — फिर भी निमंत्रण। विपक्ष इसे असंवैधानिक बता रहा है।

मुख्य बातें

19 जुलाई को मानसून सत्र पूर्व बुलाई गई सर्वदलीय बैठक से कांग्रेस, सपा, AAP, DMK, नेशनल कॉन्फ्रेंस, वामपंथी दल और शिवसेना (UBT) ने वॉकआउट किया।
TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि लोकसभा टेबल ऑफिस में TMC के 28 आधिकारिक सांसद दर्ज हैं, फिर भी 20 कथित बागी सांसदों को आमंत्रित किया गया।
इन बागी सांसदों के खिलाफ 20 अयोग्यता याचिकाएँ लंबित हैं और लोकसभा अध्यक्ष ने उन्हें अभी तक मान्यता नहीं दी है।
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने वॉकआउट को संविधान की रक्षा और विपक्षी एकजुटता का प्रतीक बताया।
JMM सांसद महुआ माजी ने परिसीमन पर चिंता जताई — 2011 जनगणना आधारित परिसीमन से झारखंड में ST आरक्षित सीटों को नुकसान की आशंका।

मानसून सत्र की पूर्व संध्या पर 19 जुलाई को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक उस समय विवादों में घिर गई जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कथित बागी सांसदों को आमंत्रित किए जाने के विरोध में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा), आम आदमी पार्टी (AAP), DMK, नेशनल कॉन्फ्रेंस, वामपंथी दलों और शिवसेना (UBT) समेत कई विपक्षी दलों ने एकजुट होकर बैठक से वॉकआउट कर दिया। यह घटनाक्रम संसद सत्र की शुरुआत से पहले ही सरकार और विपक्ष के बीच टकराव का संकेत दे रहा है।

विवाद की जड़: किसे मिला निमंत्रण?

TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने पत्रकारों को बताया कि लोकसभा टेबल ऑफिस की आधिकारिक सूची में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के 28 सांसद दर्ज हैं, फिर भी संसदीय कार्य मंत्री ने पार्टी के 20 कथित बागी सांसदों को बैठक में आमंत्रित किया। मोइत्रा ने सवाल उठाया कि किस संवैधानिक या संसदीय आधार पर इन सांसदों को एक अलग गुट के रूप में मान्यता दी गई।

उन्होंने स्पष्ट किया कि इन सांसदों के किसी भी संभावित विलय को लोकसभा अध्यक्ष की मंजूरी नहीं मिली है और उनके खिलाफ दायर 20 अयोग्यता याचिकाएँ अभी भी लंबित हैं। मोइत्रा ने यह भी रेखांकित किया कि संविधान के 91वें संशोधन के पश्चात किसी अलग गुट को स्वतंत्र मान्यता देने का कोई प्रावधान नहीं है।

कांग्रेस और सपा की प्रतिक्रिया

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने वॉकआउट को संवैधानिक दायित्व बताया। उनका कहना था कि कांग्रेस ने AAP, TMC और शिवसेना (UBT) के समर्थन में और संविधान की रक्षा के लिए यह कदम उठाया। तिवारी ने कहा कि किसी भी मामले में अंतिम निर्णय आने से पहले कोई निष्कर्ष निकालना पूरी तरह असंवैधानिक है।

समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि बैठक में आधिकारिक TMC सांसदों की सूची से पहले बागी सांसदों की सूची दिखाई गई, जिसे उन्होंने सरकार का अलोकतांत्रिक कदम करार दिया।

JMM की चिंता: दल-तोड़ राजनीति और परिसीमन

झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की सांसद महुआ माजी ने वॉकआउट का समर्थन करते हुए कहा कि देश में विभिन्न तरीकों से सांसदों को लालच देकर राजनीतिक दलों को सुनियोजित ढंग से तोड़ा जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में बगावत करने वाले सांसदों को भी इसी बैठक में बुलाया गया, जबकि लोकसभा अध्यक्ष ने अभी तक उन्हें मान्यता नहीं दी है।

माजी ने परिसीमन के मुद्दे पर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि यदि 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन किया जाता है तो झारखंड जैसे राज्यों में अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटों का काफी नुकसान होगा। उन्होंने शर्त रखी कि यदि सरकार यह आश्वासन दे कि किसी भी राज्य की सीटें कम नहीं होंगी और सभी विपक्षी दल सहमत हों, तो JMM अपने रुख पर पुनर्विचार कर सकती है।

आगे क्या होगा

मानसून सत्र की शुरुआत से पहले हुए इस टकराव ने संसद में सहज कामकाज की संभावनाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्षी एकता का यह प्रदर्शन बताता है कि सत्र के दौरान टीएमसी बागी मुद्दा, परिसीमन और दल-विरोधी गतिविधियाँ प्रमुख विवाद बिंदु बने रहेंगे। अयोग्यता याचिकाओं पर लोकसभा अध्यक्ष का अगला कदम इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुविचारित संकेत लगता है — खासकर तब जब 20 अयोग्यता याचिकाएँ लंबित हों और अध्यक्ष की मंजूरी भी न मिली हो। विपक्ष का एकजुट वॉकआउट दिखाता है कि INDIA गठबंधन की आंतरिक दरारों के बावजूद साझा संवैधानिक मुद्दों पर सहमति बन सकती है। असली सवाल यह है कि लोकसभा अध्यक्ष इन याचिकाओं पर कब और कैसे फैसला करते हैं — क्योंकि वही निर्णय TMC के भीतर की राजनीतिक लड़ाई का परिणाम तय करेगा। परिसीमन पर JMM की चिंता को मुख्यधारा की कवरेज में जगह नहीं मिली, जबकि यह दक्षिण और पूर्वोत्तर के कई राज्यों की साझा पीड़ा है।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सर्वदलीय बैठक से विपक्ष ने वॉकआउट क्यों किया?
विपक्षी दलों ने वॉकआउट इसलिए किया क्योंकि संसदीय कार्य मंत्री ने TMC के 20 कथित बागी सांसदों को बैठक में आमंत्रित किया, जबकि लोकसभा अध्यक्ष ने उन्हें अभी तक मान्यता नहीं दी है और उनके खिलाफ 20 अयोग्यता याचिकाएँ लंबित हैं। विपक्ष ने इसे असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक कदम बताया।
TMC के बागी सांसद कौन हैं और उनकी स्थिति क्या है?
ये वे 20 TMC सांसद हैं जिन्होंने कथित तौर पर पार्टी से बगावत की है। लोकसभा टेबल ऑफिस की सूची में TMC के 28 आधिकारिक सांसद दर्ज हैं, लेकिन इन 20 सांसदों के विलय या अलग गुट को लोकसभा अध्यक्ष की मंजूरी नहीं मिली है और उनके खिलाफ अयोग्यता याचिकाएँ विचाराधीन हैं।
संविधान का 91वाँ संशोधन इस विवाद से कैसे जुड़ा है?
TMC सांसद महुआ मोइत्रा के अनुसार, संविधान के 91वें संशोधन के बाद किसी अलग गुट को स्वतंत्र मान्यता देने का कोई संसदीय प्रावधान नहीं है। इसलिए बागी सांसदों को एक अलग इकाई के रूप में बैठक में बुलाना संवैधानिक रूप से संदिग्ध है।
कौन-कौन से दल वॉकआउट में शामिल हुए?
कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, DMK, आम आदमी पार्टी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, वामपंथी दल और शिवसेना (UBT) ने बैठक से वॉकआउट किया। झारखंड मुक्ति मोर्चा ने भी इस कदम का समर्थन किया।
JMM ने परिसीमन पर क्या चिंता जताई?
JMM सांसद महुआ माजी ने कहा कि यदि 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन किया जाता है तो झारखंड जैसे राज्यों में अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटों को काफी नुकसान होगा। उन्होंने माँग की कि सरकार आश्वासन दे कि किसी भी राज्य की सीटें कम नहीं होंगी।
राष्ट्र प्रेस
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