तमिलनाडु में अक्टूबर से बिजली मीटर रीडिंग के लिए कॉन्ट्रैक्ट भर्ती, 60% पद खाली होने से गलत बिलों की समस्या
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन (TNPDCL) ने अक्टूबर 2026 से राज्यभर में बिजली मीटर रीडिंग के लिए कॉन्ट्रैक्ट आधार पर कर्मचारियों की भर्ती का फैसला किया है। इसका प्रमुख उद्देश्य मीटर आकलनकर्ताओं (असेसर्स) की भारी कमी को दूर करना और उपभोक्ताओं को मिल रहे गलत या अधिक बिजली बिलों की शिकायतों पर लगाम लगाना है। निगम के पास पूरे तमिलनाडु में लगभग 3.5 करोड़ लो-टेंशन सर्विस कनेक्शन हैं, जिनमें 2.5 करोड़ घरेलू उपभोक्ता शामिल हैं।
मुख्य घटनाक्रम: क्यों उठाया गया यह कदम
TNPDCL में स्वीकृत 7,565 असेसर पदों के मुकाबले अभी केवल 3,063 कर्मचारी ही कार्यरत हैं। इसका अर्थ है कि 4,502 पद — यानी लगभग 60 प्रतिशत — रिक्त पड़े हैं। इस कमी की भरपाई के लिए निगम अब तक सेवानिवृत्त कर्मचारियों की सेवाएँ प्रति रीडिंग ₹5 के मानदेय पर ले रहा था।
गौरतलब है कि हर दो महीने में मीटर रीडिंग ली जाती है, जिसके आधार पर बिजली खपत का हिसाब लगाकर बिल तैयार किया जाता है। पर्याप्त कर्मचारियों के अभाव में रीडिंग या तो समय पर नहीं हो पाती थी या गलत दर्ज होती थी, जिससे उपभोक्ताओं को वास्तविक खपत से अधिक बिल मिलने की शिकायतें बढ़ती जा रही थीं।
नई व्यवस्था: कैसे काम करेगा कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम
फील्ड इंजीनियरों को जारी एक आधिकारिक सर्कुलर के अनुसार, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर छह महीने की अवधि के लिए सीमित टेंडर (लिमिटेड टेंडर) आमंत्रित कर सकते हैं। प्रस्तावों की जाँच संबंधित सुपरिटेंडिंग इंजीनियर करेंगे।
ठेके पर नियुक्त मीटर रीडर घर-घर जाकर रीडिंग लेंगे और इसे मोबाइल ऐप, ब्लूटूथ तथा ऑप्टिकल प्रोब की सहायता से दर्ज करेंगे। चेन्नई में प्रत्येक कर्मचारी को प्रतिदिन कम से कम 250 कनेक्शन और अन्य शहरों में 220 कनेक्शन की रीडिंग लेनी होगी।
इन कर्मचारियों के लिए डिग्री या डिप्लोमा की शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य होगी। ठेकेदारों की जिम्मेदारी होगी कि वे योग्य मीटर रीडर उपलब्ध कराएँ और निर्धारित समयसीमा में काम पूरा करें।
उपभोक्ताओं पर असर
रीडिंग की अनियमितता से उत्पन्न समस्याएँ केवल गलत बिल तक सीमित नहीं थीं। यदि किसी बिलिंग चक्र में रीडिंग छूट जाए या गलत हो, तो अगले चक्र में खपत समायोजित करते वक्त उपभोक्ता और निगम दोनों के लिए भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब उपभोक्ताओं की शिकायतें लगातार यह संकेत दे रही थीं कि उनके बिल वास्तविक खपत को नहीं दर्शाते। नई तकनीक-समर्थित रीडिंग प्रक्रिया से रीडिंग को गलत खाते में दर्ज होने या बिलिंग अवधि के बाद देरी से दर्ज होने की संभावना कम होगी।
निगरानी और समीक्षा
छह महीने की कॉन्ट्रैक्ट अवधि के दौरान फील्ड इंजीनियर पूरी व्यवस्था की निगरानी करेंगे। TNPDCL यह भी आकलन करेगा कि अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती से राज्यभर में बिलिंग प्रक्रिया में कितना सुधार आता है।
सेवानिवृत्त कर्मचारियों के संबंध में निगम ने स्पष्ट किया है कि जिनका कार्य संतोषजनक नहीं पाया जाएगा, उन्हें प्रति रीडिंग ₹5 के मानदेय पर दी जा रही जिम्मेदारी से हटाया जा सकता है। साथ ही, नए कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम के लागू होने के बाद नियमित मीटर रीडिंग कर्मचारियों पर पड़ रहे कार्य-भार की भी समीक्षा की जाएगी।
आने वाले महीनों में इस व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ठेकेदार योग्य जनशक्ति समय पर उपलब्ध करा पाते हैं या नहीं और तकनीकी माध्यमों से रीडिंग की सटीकता किस हद तक सुनिश्चित हो पाती है।