ट्राइडेंट व्याख्यान 2025: संजय सेठ बोले — सेमीकंडक्टर, AI और सिविल-मिलिट्री फ्यूजन से लड़े जाएंगे भविष्य के युद्ध
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने 1 सितंबर 2025 को नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में आयोजित ट्राइडेंट व्याख्यान को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि भारत के भविष्य के युद्ध केवल सीमाओं पर हथियारों से नहीं, बल्कि प्रयोगशालाओं, स्टार्टअप और तकनीकी संस्थानों में भी लड़े जाएंगे। सेंटर फॉर ज्वाइंट वॉरफेयर स्टडीज (CENJOWS) द्वारा आयोजित इस वार्षिक कार्यक्रम का इस वर्ष का विषय 'राष्ट्र निर्माण में अगली पीढ़ी की क्षमता का इस्तेमाल' था।
मुख्य घोषणाएँ और मंत्री का संबोधन
संजय सेठ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में भारत अपनी रक्षा क्षमताओं को निरंतर सुदृढ़ कर रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश का लक्ष्य अब केवल रक्षा उपकरणों में आत्मनिर्भर बनना नहीं, बल्कि 'मेक फॉर द वर्ल्ड' की सोच के साथ वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी उत्पाद और तकनीक तैयार करना है।
मंत्री ने कहा कि भारत की युवा शक्ति रक्षा, उद्योग, स्टार्टअप, अंतरिक्ष, कृषि और खेल — हर क्षेत्र में अपना योगदान दे रही है। उन्होंने सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और उन्नत तकनीकों में क्षमता विस्तार को भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए अनिवार्य बताया। साथ ही MSME और स्वदेशी उद्योगों की बढ़ती भूमिका की सराहना की।
चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ का दृष्टिकोण
चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ एयर मार्शल तेजिंदर सिंह ने कार्यक्रम में कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा की परिभाषा अब बदल चुकी है। उनके अनुसार, इसमें आर्थिक सुरक्षा, तकनीकी प्रतिस्पर्धा, समुद्री सामर्थ्य, महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचा, आपूर्ति श्रृंखला और सूचना की विश्वसनीयता — सभी शामिल हो गए हैं।
उन्होंने हाल के सैन्य अनुभवों, विशेषकर ऑपरेशन सिंदूर, का उल्लेख करते हुए संयुक्त योजना और एकीकृत तरीके से अभियानों को अंजाम देने की आवश्यकता पर बल दिया। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब वैश्विक स्तर पर युद्ध का स्वरूप तेज़ी से बहु-आयामी होता जा रहा है।
सेना उप प्रमुख और विशेषज्ञों की राय
सेना उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों ने सिविल-मिलिट्री फ्यूजन, मल्टी-डोमेन वॉरफेयर, उभरती तकनीकों और संयुक्तता जैसे विषयों पर अपने विचार रखे। विशेषज्ञों का मत है कि सेना, उद्योग, स्टार्टअप, वैज्ञानिक संस्थानों और नागरिक क्षेत्र के बीच बेहतर तालमेल भारत की रणनीतिक ताकत को कई गुना बढ़ा सकता है।
गौरतलब है कि यह व्याख्यान ऐसे समय में आयोजित हुआ जब भारत अपने रक्षा निर्यात को नई ऊँचाइयों पर ले जाने और घरेलू रक्षा उद्योग को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एकीकृत करने की दिशा में ठोस कदम उठा रहा है।
पुस्तक विमोचन
कार्यक्रम के दौरान रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने 'ऐन एरा इन ऑलिव ग्रीन: जनरल अनिल चौहान, ड्यूटी, लीडरशिप एंड लिगेसी' नामक पुस्तक का विमोचन भी किया, जो भारत के पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के नेतृत्व और विरासत पर केंद्रित है।
आगे की राह
ट्राइडेंट व्याख्यान से उभरा सामूहिक संदेश यह है कि भारत को विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ने के लिए एकीकृत, नवाचार-आधारित और दूरदर्शी रक्षा रणनीति अपनानी होगी। तीनों सेनाओं में संयुक्तता बढ़ाने के साथ-साथ स्वदेशी तकनीक और घरेलू रक्षा उद्योग को सशक्त करना समय की माँग है।