तृणमूल नेता कैलाश मिश्रा बिहार के मधुबनी से गिरफ्तार, जबरन वसूली और मारपीट के कई मामले दर्ज
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल पुलिस ने हावड़ा जिले की बाली विधानसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पूर्व उम्मीदवार कैलाश मिश्रा को बिहार के मधुबनी जिले से गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने रविवार, 7 जून को यह जानकारी दी। मिश्रा पर जबरन वसूली, मारपीट और धमकी देने के कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।
मुख्य घटनाक्रम
अधिकारियों के अनुसार, 2021 के विधानसभा चुनावों के दौरान पश्चिम बंगाल के बाली, हावड़ा और लिलुआ पुलिस स्टेशनों के अधिकार क्षेत्र में मिश्रा के खिलाफ अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई थीं। इन मामलों में मारपीट, धमकी और जबरन वसूली के आरोप शामिल हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, पश्चिम बंगाल पुलिस की एक विशेष टीम ने उन्हें मधुबनी जिले के बेनीपट्टी ब्लॉक के अरर पुवारी टोला — जो उनका मूल निवास स्थान है — से गिरफ्तार किया।
कौन हैं कैलाश मिश्रा
कैलाश मिश्रा मूल रूप से बिहार के मधुबनी जिले के निवासी हैं और TMC सांसद अभिषेक बनर्जी के करीबी सहयोगी माने जाते हैं। वे बाली विधानसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा और आपराधिक आरोपों से जुड़े मामले लगातार सुर्खियों में हैं।
कानूनी प्रक्रिया
गिरफ्तारी के बाद पश्चिम बंगाल पुलिस आवश्यक कानूनी औपचारिकताएँ पूरी करने के बाद मिश्रा को संबंधित अदालत में पेश करेगी। गौरतलब है कि यह गिरफ्तारी राज्य-अंतर समन्वय के तहत बिहार में जाकर की गई, जो प्रक्रियागत दृष्टि से उल्लेखनीय है।
बंगाल में और गिरफ्तारियाँ
इसी सप्ताह राज्य में दो अन्य उल्लेखनीय गिरफ्तारियाँ भी हुईं। शुक्रवार को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने पूर्वी मिदनापुर जिला परिषद के TMC पदाधिकारी (स्वास्थ्य इकाई) शम्सुल इस्लाम को गिरफ्तार किया। उन पर सहकारी बैंक के पदाधिकारियों के चुनावों के दौरान अपने साथियों के साथ दंगा करने का आरोप है। उल्लेखनीय है कि पूर्वी मिदनापुर विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी का गृह जिला है।
गुरुवार को पश्चिम बंगाल के पूर्व खेल मंत्री अरूप बिस्वास के भाई स्वरूप बिस्वास को कोलकाता पुलिस ने हिरासत में लिया। वे पिछले वर्ष 13 दिसंबर को लियोनेल मेसी के 'गोट इंडिया टूर' के दौरान साल्ट लेक स्थित युवा भारती क्रीड़ांगन में हुई तोड़फोड़ के मामले में आरोपी हैं। राज्य पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह गिरफ्तारी बंगाली फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े तकनीशियनों से जबरन वसूली के आरोपों के सिलसिले में भी की गई।
आगे क्या होगा
मिश्रा को अदालत में पेश किए जाने के बाद उनकी न्यायिक हिरासत या ज़मानत पर फैसला होना है। इस सप्ताह की एक के बाद एक गिरफ्तारियाँ यह संकेत देती हैं कि पश्चिम बंगाल में राजनीतिक रसूख वाले आरोपियों पर कानूनी शिकंजा कसने की प्रक्रिया तेज हो रही है।