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त्रिपुरा स्टेट कोऑपरेटिव बैंक का रिकॉर्ड ₹78.08 करोड़ का शुद्ध लाभ, लगातार सातवें वर्ष मुनाफे में

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त्रिपुरा स्टेट कोऑपरेटिव बैंक का रिकॉर्ड ₹78.08 करोड़ का शुद्ध लाभ, लगातार सातवें वर्ष मुनाफे में

सारांश

त्रिपुरा स्टेट कोऑपरेटिव बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 में ₹78.08 करोड़ का रिकॉर्ड शुद्ध लाभ दर्ज किया — पिछले वर्ष से 103% की छलांग। पूर्वोत्तर के सबसे पुराने सहकारी बैंक का यह लगातार सातवाँ लाभकारी वर्ष है, जो ग्रामीण त्रिपुरा में बढ़ती वित्तीय पहुँच का प्रमाण है।

मुख्य बातें

त्रिपुरा स्टेट कोऑपरेटिव बैंक (टीएससीबी) ने वित्त वर्ष 2025-26 में ₹78.08 करोड़ का रिकॉर्ड शुद्ध लाभ दर्ज किया — बैंक के इतिहास का सर्वाधिक मुनाफा।
शुद्ध लाभ में पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 103 प्रतिशत की वृद्धि; परिचालन लाभ ₹166.08 करोड़ — 40 प्रतिशत अधिक।
यह लगातार सातवाँ वर्ष है जब बैंक मुनाफे में रहा।
कुल बिजनेस वॉल्यूम ₹6,950.92 करोड़ ; 67 शाखाओं और 12 एटीएम का नेटवर्क।
बैंक का क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात 66% — राज्य के औसत 55% से काफी ऊपर।
बैंक की स्थापना 21 जनवरी 1957 को हुई थी; यह पूर्वोत्तर क्षेत्र का सबसे पुराना सहकारी बैंक है।

त्रिपुरा स्टेट कोऑपरेटिव बैंक (टीएससीबी) ने वित्त वर्ष 2025-26 में ₹78.08 करोड़ का रिकॉर्ड शुद्ध लाभ दर्ज किया है — जो बैंक के इतिहास में अब तक का सर्वाधिक मुनाफा है। यह लगातार सातवाँ वर्ष है जब यह सरकारी क्षेत्र का सहकारी बैंक लाभ में रहा है, जो पूर्वोत्तर भारत की सहकारी बैंकिंग के लिए एक उल्लेखनीय उपलब्धि मानी जा रही है।

मुख्य वित्तीय प्रदर्शन

बैंक के चेयरमैन नागधिराज दत्ता ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में शुद्ध मुनाफा ₹78.08 करोड़ रहा, जो पिछले वित्त वर्ष 2024-25 की तुलना में 103 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। उन्होंने कहा, 'यह लगातार सातवाँ साल है जब बैंक मुनाफे में रहा है और त्रिपुरा स्टेट कोऑपरेटिव बैंक के इतिहास में यह अब तक का सबसे अधिक मुनाफा है।'

परिचालन लाभ के मोर्चे पर भी बैंक ने उल्लेखनीय प्रगति की — वित्त वर्ष 2025-26 में परिचालन लाभ ₹166.08 करोड़ रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 40 प्रतिशत अधिक है। बैंक का कुल व्यावसायिक कारोबार (बिजनेस वॉल्यूम) ₹6,950.92 करोड़ तक पहुँच गया, जो पिछले वित्त वर्ष से ₹289.11 करोड़ अधिक है।

बैंक का ऐतिहासिक परिचय

त्रिपुरा स्टेट कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड की स्थापना 21 जनवरी 1957 को बॉम्बे कोऑपरेटिव सोसाइटीज़ एक्ट के तहत हुई थी। यह पूर्वोत्तर क्षेत्र का सबसे पुराना सहकारी बैंक है। सात दशकों से अधिक समय में इसने त्रिपुरा में सहकारी बैंकिंग और ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने में केंद्रीय भूमिका निभाई है। फिलहाल बैंक 67 शाखाओं और 12 एटीएम के नेटवर्क के ज़रिये राज्य भर में बैंकिंग सेवाएँ दे रहा है।

सरकार की प्रतिक्रिया

बैंक की वार्षिक आम बैठक (एजीएम) में उपस्थित त्रिपुरा के वित्त मंत्री प्रणजीत सिंघा रॉय ने बैंक की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि टीएससीबी केंद्र और राज्य सरकारों की विभिन्न योजनाओं के तहत छोटे एवं सीमांत किसानों और बेरोज़गार युवाओं को आर्थिक सहायता देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

सिंघा रॉय ने बैंक के क्रेडिट-डिपॉजिट (सीडी) अनुपात को रेखांकित किया, जो 66 प्रतिशत है — राज्य के औसत 55 प्रतिशत से काफी ऊपर। उन्होंने ग्राहक सेवा की गुणवत्ता सुधारने और ऋण प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर ज़ोर दिया, ताकि छोटे व्यापारी, उद्यमी और आम नागरिक सहजता से ऋण प्राप्त कर सकें।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर

गौरतलब है कि त्रिपुरा एक छोटा पहाड़ी राज्य है जहाँ कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की केंद्रीय भूमिका है। टीएससीबी का लगातार बढ़ता मुनाफा इस बात का संकेत है कि बैंक न केवल वित्तीय रूप से मज़बूत हो रहा है, बल्कि ग्रामीण साख (क्रेडिट) की पहुँच बढ़ाने में भी सफल हो रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में सहकारी बैंकों की वित्तीय सेहत पर नज़र रखी जा रही है।

आगे की राह

चेयरमैन दत्ता के अनुसार बैंक आने वाले वर्षों में अपनी शाखा-नेटवर्क का विस्तार करने और डिजिटल बैंकिंग सेवाओं को मज़बूत करने की दिशा में काम कर रहा है। वित्त मंत्री की ओर से ऋण प्रक्रियाओं को सरल बनाने के निर्देश से बैंक के कारोबारी विस्तार को और गति मिलने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या यह वित्तीय सफलता ज़मीनी स्तर पर ऋण की सुलभता में तब्दील हो रही है। 66 प्रतिशत का सीडी अनुपात राज्य औसत से बेहतर ज़रूर है, पर इसका अर्थ यह भी है कि जमा राशि का एक बड़ा हिस्सा अभी भी उत्पादक कर्ज़ में नहीं बदल रहा। वित्त मंत्री का ऋण प्रक्रियाओं को सरल बनाने का आह्वान सही दिशा में है, लेकिन 67 शाखाओं के नेटवर्क के ज़रिये दूरदराज़ के ग्रामीण और आदिवासी इलाकों तक पहुँच बनाना अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

त्रिपुरा स्टेट कोऑपरेटिव बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 में कितना मुनाफा कमाया?
टीएससीबी ने वित्त वर्ष 2025-26 में ₹78.08 करोड़ का शुद्ध लाभ दर्ज किया, जो बैंक के इतिहास का सर्वाधिक मुनाफा है। यह पिछले वित्त वर्ष 2024-25 की तुलना में 103 प्रतिशत अधिक है।
त्रिपुरा स्टेट कोऑपरेटिव बैंक कितने वर्षों से लगातार लाभ में है?
वित्त वर्ष 2025-26 लगातार सातवाँ वर्ष है जब टीएससीबी मुनाफे में रहा है। बैंक के चेयरमैन नागधिराज दत्ता ने इसे बैंक की निरंतर वित्तीय प्रगति का प्रमाण बताया।
टीएससीबी का क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
टीएससीबी का क्रेडिट-डिपॉजिट (सीडी) अनुपात 66 प्रतिशत है, जो त्रिपुरा के राज्य औसत 55 प्रतिशत से काफी अधिक है। यह दर्शाता है कि बैंक अपनी जमा राशि का एक बड़ा हिस्सा ऋण के रूप में वितरित कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहयोग दे रहा है।
त्रिपुरा स्टेट कोऑपरेटिव बैंक की स्थापना कब हुई और यह क्यों खास है?
टीएससीबी की स्थापना 21 जनवरी 1957 को बॉम्बे कोऑपरेटिव सोसाइटीज़ एक्ट के तहत हुई थी। यह पूर्वोत्तर भारत का सबसे पुराना सहकारी बैंक है और सात दशकों से त्रिपुरा की ग्रामीण बैंकिंग एवं सहकारी विकास में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
टीएससीबी की एजीएम में वित्त मंत्री ने क्या कहा?
त्रिपुरा के वित्त मंत्री प्रणजीत सिंघा रॉय ने एजीएम में कहा कि बैंक छोटे एवं सीमांत किसानों और बेरोज़गार युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने ग्राहक सेवा की गुणवत्ता सुधारने और ऋण प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर विशेष ज़ोर दिया।
राष्ट्र प्रेस
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