त्रिपुरा स्टेट कोऑपरेटिव बैंक का रिकॉर्ड ₹78.08 करोड़ का शुद्ध लाभ, लगातार सातवें वर्ष मुनाफे में
सारांश
मुख्य बातें
त्रिपुरा स्टेट कोऑपरेटिव बैंक (टीएससीबी) ने वित्त वर्ष 2025-26 में ₹78.08 करोड़ का रिकॉर्ड शुद्ध लाभ दर्ज किया है — जो बैंक के इतिहास में अब तक का सर्वाधिक मुनाफा है। यह लगातार सातवाँ वर्ष है जब यह सरकारी क्षेत्र का सहकारी बैंक लाभ में रहा है, जो पूर्वोत्तर भारत की सहकारी बैंकिंग के लिए एक उल्लेखनीय उपलब्धि मानी जा रही है।
मुख्य वित्तीय प्रदर्शन
बैंक के चेयरमैन नागधिराज दत्ता ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में शुद्ध मुनाफा ₹78.08 करोड़ रहा, जो पिछले वित्त वर्ष 2024-25 की तुलना में 103 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। उन्होंने कहा, 'यह लगातार सातवाँ साल है जब बैंक मुनाफे में रहा है और त्रिपुरा स्टेट कोऑपरेटिव बैंक के इतिहास में यह अब तक का सबसे अधिक मुनाफा है।'
परिचालन लाभ के मोर्चे पर भी बैंक ने उल्लेखनीय प्रगति की — वित्त वर्ष 2025-26 में परिचालन लाभ ₹166.08 करोड़ रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 40 प्रतिशत अधिक है। बैंक का कुल व्यावसायिक कारोबार (बिजनेस वॉल्यूम) ₹6,950.92 करोड़ तक पहुँच गया, जो पिछले वित्त वर्ष से ₹289.11 करोड़ अधिक है।
बैंक का ऐतिहासिक परिचय
त्रिपुरा स्टेट कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड की स्थापना 21 जनवरी 1957 को बॉम्बे कोऑपरेटिव सोसाइटीज़ एक्ट के तहत हुई थी। यह पूर्वोत्तर क्षेत्र का सबसे पुराना सहकारी बैंक है। सात दशकों से अधिक समय में इसने त्रिपुरा में सहकारी बैंकिंग और ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने में केंद्रीय भूमिका निभाई है। फिलहाल बैंक 67 शाखाओं और 12 एटीएम के नेटवर्क के ज़रिये राज्य भर में बैंकिंग सेवाएँ दे रहा है।
सरकार की प्रतिक्रिया
बैंक की वार्षिक आम बैठक (एजीएम) में उपस्थित त्रिपुरा के वित्त मंत्री प्रणजीत सिंघा रॉय ने बैंक की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि टीएससीबी केंद्र और राज्य सरकारों की विभिन्न योजनाओं के तहत छोटे एवं सीमांत किसानों और बेरोज़गार युवाओं को आर्थिक सहायता देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
सिंघा रॉय ने बैंक के क्रेडिट-डिपॉजिट (सीडी) अनुपात को रेखांकित किया, जो 66 प्रतिशत है — राज्य के औसत 55 प्रतिशत से काफी ऊपर। उन्होंने ग्राहक सेवा की गुणवत्ता सुधारने और ऋण प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर ज़ोर दिया, ताकि छोटे व्यापारी, उद्यमी और आम नागरिक सहजता से ऋण प्राप्त कर सकें।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर
गौरतलब है कि त्रिपुरा एक छोटा पहाड़ी राज्य है जहाँ कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की केंद्रीय भूमिका है। टीएससीबी का लगातार बढ़ता मुनाफा इस बात का संकेत है कि बैंक न केवल वित्तीय रूप से मज़बूत हो रहा है, बल्कि ग्रामीण साख (क्रेडिट) की पहुँच बढ़ाने में भी सफल हो रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में सहकारी बैंकों की वित्तीय सेहत पर नज़र रखी जा रही है।
आगे की राह
चेयरमैन दत्ता के अनुसार बैंक आने वाले वर्षों में अपनी शाखा-नेटवर्क का विस्तार करने और डिजिटल बैंकिंग सेवाओं को मज़बूत करने की दिशा में काम कर रहा है। वित्त मंत्री की ओर से ऋण प्रक्रियाओं को सरल बनाने के निर्देश से बैंक के कारोबारी विस्तार को और गति मिलने की उम्मीद है।