तमिलनाडु: टीटीवी दिनाकरन ने CM विजय के नए दफ्तर के टेंडर में अनियमितता का आरोप लगाया
सारांश
मुख्य बातें
अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कझगम (एएमएमके) के महासचिव टीटीवी दिनाकरन ने 18 अगस्त को तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) सरकार पर गंभीर आरोप लगाए — उनका कहना है कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नए कार्यालय के नवीनीकरण का काम टेंडर प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही शुरू कर दिया गया, जो प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है। दिनाकरन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर इस मामले में मुख्यमंत्री से सीधे जवाब माँगा।
मुख्य घटनाक्रम
दिनाकरन ने उन रिपोर्टों का हवाला दिया जिनके अनुसार पिछले महीने तमिलनाडु सचिवालय की मुख्य इमारत से मुख्यमंत्री कार्यालय को 'नमक्कल कविग्नार मालिगाई' की 10वीं मंजिल पर स्थानांतरित करने का काम आरंभ हो गया था। उनके अनुसार टेंडर का विज्ञापन 13 अगस्त को समाचारपत्रों में प्रकाशित हुआ, जबकि संबंधित दस्तावेज सरकारी वेबसाइट पर चार दिन बाद अपलोड किए गए।
दिनाकरन ने आरोप लगाया कि टेंडर दस्तावेजों में परियोजना की अनुमानित लागत का कोई उल्लेख नहीं था, जिससे पारदर्शिता की कमी स्पष्ट होती है। उन्होंने कहा कि यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब राज्य सरकार आर्थिक तंगी का सामना कर रही है।
दिनाकरन के सवाल
एएमएमके नेता ने कई तीखे सवाल उठाए — टेंडर जारी होने से पहले नवीनीकरण की अनुमति किसने दी? कॉन्ट्रैक्टर का चयन किस आधार पर हुआ? और काम शुरू होने की खबरें सामने आने के बाद ही बोलियाँ क्यों आमंत्रित की गईं? उन्होंने यह भी पूछा कि सार्वजनिक सूचना प्रकाशित होने के बावजूद टेंडर दस्तावेज तत्काल ऑनलाइन उपलब्ध क्यों नहीं कराए गए।
दिनाकरन ने तर्क दिया कि अगर मुख्यमंत्री के अपने कार्यालय से जुड़े टेंडर में प्रक्रियात्मक उल्लंघन होता है, तो आम जनता अन्य सरकारी विभागों की खरीद प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता पर भी स्वाभाविक रूप से संदेह करेगी।
TVK सरकार की पारदर्शिता पर सवाल
दिनाकरन ने याद दिलाया कि मुख्यमंत्री विजय ने पदभार संभालने के बाद से बार-बार भ्रष्टाचार-मुक्त और पारदर्शी प्रशासन का वादा किया है। उनका कहना है कि इस प्रकरण ने उस वादे की परीक्षा ले ली है। उन्होंने कहा, 'पारदर्शिता सिर्फ विज्ञापनों और सार्वजनिक भाषणों में इस्तेमाल होने वाला नारा नहीं होना चाहिए।'
गौरतलब है कि टीवीके सरकार अपेक्षाकृत नई है और उस पर सुशासन का दबाव विशेष रूप से अधिक है। ऐसे में यह विवाद विपक्ष को सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाने का अवसर दे रहा है।
आगे क्या होगा
दिनाकरन ने मुख्यमंत्री विजय से आग्रह किया है कि वे स्वयं इस मामले में हस्तक्षेप करें और टेंडर प्रक्रिया से जुड़ी परिस्थितियों को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करें। अभी तक टीवीके सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह देखना बाकी है कि सरकार इन सवालों का जवाब देती है या नहीं।