ट्विशा शर्मा केस: पूर्व डीजीपी एसपी वैद का सवाल — पुलिस को सूचना दिए बिना शव क्यों हटाया गया?
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू में ट्विशा शर्मा संदिग्ध मौत मामले में पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने 22 मई को गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि शुरुआती स्तर पर ही जांच प्रक्रिया में कई चूकें हुई हैं, जिनमें सबसे अहम यह है कि मृतका के शव को पुलिस को सूचित किए बिना घटनास्थल से हटाया गया। उनके अनुसार, यह लापरवाही पूरे मामले को और पेचीदा बना देती है।
एसओपी की अनदेखी पर गहरी चिंता
वैद ने कहा कि ऐसे किसी भी संदिग्ध मौत के मामले में सबसे पहली प्राथमिकता यह होनी चाहिए थी कि पुलिस को तत्काल सूचना दी जाती, ताकि क्राइम सीन को सुरक्षित किया जा सके, उसकी फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी हो सके और कोई भी साक्ष्य नष्ट न हो। उन्होंने कहा, 'लेकिन इस केस में ऐसा नहीं हुआ और यही वजह है कि अब कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं।'
सीसीटीवी फुटेज में क्या दिखा
पूर्व डीजीपी ने बताया कि उपलब्ध वीडियो फुटेज और सीसीटीवी में यह स्पष्ट दिख रहा है कि मृतका के शव को पुलिस को सूचना दिए बिना स्थानांतरित किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर परिवार या संबंधित लोग निर्दोष थे, तो पुलिस को तुरंत क्यों नहीं बुलाया गया? यह सवाल जांच की दिशा को निर्धारित करने में निर्णायक भूमिका निभाता है।
रिटायर्ड जज की भूमिका और अग्रिम जमानत
वैद ने यह भी उल्लेख किया कि इस मामले में एक रिटायर्ड सेशन जज, जो मृतका की सास हैं, को भी कथित तौर पर आरोपी बताया जा रहा है। हालाँकि उन्हें एंटीसिपेटरी बेल मिल चुकी है। उनके अनुसार, सभी संदिग्ध व्यक्तियों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया जाना चाहिए, क्योंकि कई बार केवल पूछताछ से ही पूरी घटना का क्रम स्पष्ट हो जाता है।
जांच में किन पहलुओं पर ध्यान जरूरी
वैद के अनुसार, मृतका के मोबाइल कॉल रिकॉर्ड्स, महत्वपूर्ण संपर्कों और घटनास्थल से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि अगर यह आत्महत्या का मामला भी हो, तो यह पता करना जरूरी है कि क्राइम सीन को क्यों डिस्टर्ब किया गया और शव को क्यों हटाया गया। यह सवाल मामले को और अधिक गंभीर बनाते हैं।
पारदर्शिता और जवाबदेही की माँग
पूर्व डीजीपी ने कहा कि यह मामला 'बेहद दुखद और चिंताजनक' है। उन्होंने जोर दिया कि पुलिस, न्यायपालिका और प्रशासन — तीनों की जिम्मेदारी है कि वे संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ काम करें। उन्होंने कहा कि समाज को यह भरोसा मिलना चाहिए कि किसी भी मामले में सच्चाई को दबाया नहीं जाएगा और दोषियों को सजा अवश्य मिलेगी। यह मामला आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों के लिए एक कड़ी परीक्षा साबित होगा।