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यूएपीए के तहत 23 आतंकी घोषित: जैश और लश्कर से जुड़े 17 पाकिस्तानी नागरिक सूची में शामिल

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यूएपीए के तहत 23 आतंकी घोषित: जैश और लश्कर से जुड़े 17 पाकिस्तानी नागरिक सूची में शामिल

सारांश

केंद्र सरकार ने यूएपीए के तहत एक साथ 23 व्यक्तियों को आतंकवादी घोषित किया — इनमें 17 पाकिस्तानी नागरिक शामिल हैं। जैश और लश्कर से जुड़े ये नाम सुनजवां और नगरोटा जैसे बड़े हमलों से सीधे जोड़े गए हैं। यह कार्रवाई भारत की 'जीरो टॉलरेंस' नीति का ठोस कानूनी विस्तार है।

मुख्य बातें

केंद्र सरकार ने 4 जुलाई 2026 को यूएपीए के तहत 23 व्यक्तियों को आतंकवादी घोषित किया।
सूची में 17 पाकिस्तानी नागरिक और 6 भारतीय नागरिक शामिल हैं, सभी पाकिस्तान व PoK से गतिविधियाँ संचालित करते बताए गए हैं।
नामित आतंकी जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) सहित प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े हैं।
मसूद इलियास कश्मीरी पर 2022 सुनजवां आर्मी कैंप हमले और मुफ्ती मोहम्मद असगर खान पर 2016 नगरोटा हमले की साजिश का आरोप।
यूएपीए नामांकन के बाद संपत्ति जब्ती, वित्तीय लेन-देन पर प्रतिबंध और अंतरराष्ट्रीय प्रत्यर्पण अनुरोध का रास्ता खुलता है।

केंद्र सरकार ने 4 जुलाई 2026 को आतंकवाद के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करते हुए गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के प्रावधानों के तहत 23 व्यक्तियों को आधिकारिक रूप से आतंकवादी घोषित किया। केंद्रीय गृह मंत्रालय की राजपत्र अधिसूचनाओं में जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़े पाकिस्तान स्थित कई कुख्यात आतंकियों के नाम दर्ज किए गए हैं। इनमें से 17 पाकिस्तानी नागरिक और 6 भारतीय नागरिक हैं, जो कथित तौर पर पाकिस्तान और पाक-अधिकृत कश्मीर (PoK) से आतंकी गतिविधियाँ संचालित कर रहे हैं।

मुख्य घटनाक्रम

गृह मंत्रालय ने अपनी आधिकारिक अधिसूचना में स्पष्ट किया कि सूची में शामिल सभी व्यक्तियों पर आतंकियों की भर्ती, प्रशिक्षण, हथियारों की तस्करी, फंडिंग, सीमापार घुसपैठ कराने तथा भारत में आतंकी हमलों की साजिश रचने और उन्हें अंजाम देने में सक्रिय भूमिका के आरोप हैं। मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा, "प्रधानमंत्री मोदी के आतंकवाद के खिलाफ शून्य सहिष्णुता के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए, गृह मंत्रालय ने आज प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े 23 कुख्यात आतंकियों को यूएपीए के प्रावधानों के तहत आतंकवादी घोषित किया है।"

प्रमुख नामित आतंकी और उन पर आरोप

अधिसूचना में मसूद इलियास कश्मीरी का नाम शामिल है, जिन पर वर्ष 2022 में सुनजवां आर्मी कैंप पर हुए हमले की साजिश रचने का आरोप है। मोहम्मद मुसद्दिक (JeM) पर उसी हमले के लिए घुसपैठ कराने और पूरे आतंकी अभियान का समन्वय करने का आरोप लगाया गया है।

मुफ्ती मोहम्मद असगर खान को सरकार ने वर्ष 2016 के नगरोटा आर्मी कैंप हमले से जुड़े घुसपैठ नेटवर्क का प्रमुख संचालक बताया है। इसी मामले में हाफिज अब्दुल शकूर पर हमले से पूर्व स्थानीय नेटवर्क से संपर्क बनाए रखने और आतंकियों की घुसपैठ कराने का आरोप है।

अब्दुल्ला जेहादी — जिसे शाह नवाज और अल हिजामा के नाम से भी जाना जाता है — पर नगरोटा हमले में शामिल आतंकियों की सहायता करने और जैश-ए-मोहम्मद के कई आतंकी प्रशिक्षण शिविर संचालित करने के आरोप लगाए गए हैं।

लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े नामित आतंकी

लश्कर-ए-तैयबा से संबद्ध फिरदौस अहमद भट (LeT) को संगठन का लॉन्चिंग कमांडर बताया गया है। उन पर सीमापार घुसपैठ कराने और आतंकियों को लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराने का आरोप है। वहीं, बिलाल अहमद मीर उर्फ अहमद भाई (LeT/TRF) पर लश्कर-ए-तैयबा और द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) के लिए सीमापार आतंकी गतिविधियाँ संचालित करने और हथियारों की आपूर्ति कराने के आरोप हैं।

आगे क्या होगा

यूएपीए के तहत आतंकवादी घोषित किए जाने के बाद इन व्यक्तियों की संपत्तियाँ जब्त की जा सकती हैं, उनसे किसी भी प्रकार का लेन-देन दंडनीय होगा और उनकी गिरफ्तारी के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग माँगा जा सकता है। गौरतलब है कि यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब भारत-पाकिस्तान के बीच सीमापार आतंकवाद को लेकर तनाव पहले से ऊँचे स्तर पर है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस कदम से भारत की अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान को कूटनीतिक रूप से घेरने की रणनीति को भी बल मिलेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ भारत की कानूनी पहुँच व्यावहारिक रूप से शून्य है। इसलिए यह कदम घरेलू कानूनी ढाँचे को मज़बूत करने के साथ-साथ FATF जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने की रणनीति का हिस्सा अधिक प्रतीत होता है।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूएपीए के तहत आतंकवादी घोषित करने का क्या अर्थ है?
यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधियाँ रोकथाम अधिनियम) के तहत किसी व्यक्ति को आतंकवादी घोषित करने पर उसकी संपत्तियाँ जब्त की जा सकती हैं, उससे किसी भी प्रकार का वित्तीय लेन-देन दंडनीय हो जाता है और उसकी गिरफ्तारी के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग माँगा जा सकता है। यह नामांकन राजपत्र अधिसूचना के ज़रिए किया जाता है।
इस बार घोषित 23 आतंकियों में कौन-कौन से संगठन शामिल हैं?
घोषित 23 आतंकियों में जैश-ए-मोहम्मद (JeM), लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) से जुड़े व्यक्ति शामिल हैं। इनमें 17 पाकिस्तानी नागरिक और 6 भारतीय नागरिक हैं।
सुनजवां और नगरोटा हमलों से जुड़े कौन-से नाम सूची में हैं?
2022 के सुनजवां आर्मी कैंप हमले से मसूद इलियास कश्मीरी और मोहम्मद मुसद्दिक (JeM) के नाम जुड़े हैं। 2016 के नगरोटा हमले से मुफ्ती मोहम्मद असगर खान, हाफिज अब्दुल शकूर और अब्दुल्ला जेहादी के नाम शामिल किए गए हैं।
क्या इन आतंकियों को भारत गिरफ्तार कर सकता है?
अधिकांश नामित व्यक्ति कथित तौर पर पाकिस्तान और PoK में हैं, जहाँ भारत की प्रत्यक्ष कानूनी पहुँच नहीं है। यूएपीए नामांकन मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दबाव बनाने, संपत्ति जब्ती और यदि ये व्यक्ति भारत आएँ तो उनकी तत्काल गिरफ्तारी सुनिश्चित करने का कानूनी आधार तैयार करता है।
भारत ने पहले भी यूएपीए के तहत इस तरह की कार्रवाई की है?
हाँ, भारत सरकार समय-समय पर यूएपीए के तहत व्यक्तियों और संगठनों को प्रतिबंधित करती रही है। हालाँकि, एक साथ 23 व्यक्तियों का नामांकन और उनमें बड़े हमलों से सीधा जुड़ाव इस कार्रवाई को पिछले नामांकनों की तुलना में व्यापक और उल्लेखनीय बनाता है।
राष्ट्र प्रेस
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