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अनीश गवांडे का केंद्र पर हमला: यूसीसी, राम मंदिर ट्रस्ट विवाद और टीईटी पेपर लीक पर जवाबदेही की मांग

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अनीश गवांडे का केंद्र पर हमला: यूसीसी, राम मंदिर ट्रस्ट विवाद और टीईटी पेपर लीक पर जवाबदेही की मांग

सारांश

एनसीपी (शरद पवार) के नेता अनीश गवांडे ने एक साथ कई मोर्चों पर केंद्र को घेरा — यूसीसी के असमान क्रियान्वयन, राम मंदिर ट्रस्ट में कथित वित्तीय अनियमितताओं, टीईटी पेपर लीक और ट्रंप ट्रेड डील की अपारदर्शिता पर। हर मुद्दे पर उनकी एक ही माँग: स्वतंत्र जांच और जवाबदेही।

मुख्य बातें

अनीश गवांडे ने 28 जून 2025 को केंद्र सरकार पर यूसीसी, राम मंदिर ट्रस्ट विवाद, टीईटी पेपर लीक और ट्रंप दौरे समेत कई मुद्दों पर निशाना साधा।
यूसीसी पर उनका कहना है कि इसे पूरे देश में एकसमान लागू किया जाए, राज्यवार अलग-अलग प्रावधान इसके उद्देश्य को नष्ट करेंगे।
राम मंदिर ट्रस्ट में कथित वित्तीय अनियमितताओं और चंपत राय व अनिल मिश्रा के इस्तीफे के मुद्दे पर स्वतंत्र जांच की मांग।
महाराष्ट्र टीईटी पेपर लीक पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री और राज्य के शिक्षा विभाग की जवाबदेही तय करने की मांग।
ट्रंप के भारत दौरे पर स्वागत की भावना, लेकिन भारत-अमेरिका ट्रेड डील के प्रावधानों को सार्वजनिक करने की मांग।
राजनीतिक दलों की तोड़-फोड़ पर चिंता जताई; ममता बनर्जी को संघर्षशील नेता बताया।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के नेता अनीश गवांडे ने 28 जून 2025 को केंद्र सरकार पर कई मोर्चों पर तीखा हमला बोला — समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के असमान क्रियान्वयन से लेकर राम मंदिर ट्रस्ट में कथित वित्तीय अनियमितताओं और महाराष्ट्र टीईटी पेपर लीक तक। गवांडे ने प्रत्येक मुद्दे पर स्वतंत्र जांच और जवाबदेही की मांग दोहराई।

यूसीसी पर गवांडे का रुख

पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता लागू करने की चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए गवांडे ने कहा कि यदि यूसीसी लागू करना है तो उसे पूरे देश में एकसमान रूप से लागू किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, राज्य-दर-राज्य अलग-अलग प्रकार का यूसीसी लागू होने से इस कानून का मूल उद्देश्य ही नष्ट हो जाएगा। उन्होंने जोर दिया कि इस विषय पर सभी राज्यों और हितधारकों के साथ व्यापक संवाद आवश्यक है — केवल कानून बना देने से समस्या का समाधान नहीं होगा।

राम मंदिर ट्रस्ट विवाद और स्वतंत्र जांच की मांग

राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे के मुद्दे पर गवांडे ने कहा कि कथित चढ़ावा, चंदा, चांदी और अन्य वित्तीय अनियमितताओं को लेकर लगातार आरोप सामने आ रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि ट्रस्ट एक स्वतंत्र संस्था है, तो सरकारी दबाव में इस्तीफों की चर्चा क्यों हो रही है। साथ ही उन्होंने पूछा कि ट्रस्ट सदस्यों की नियुक्ति किस प्रक्रिया के तहत हुई और क्या नियुक्ति से पूर्व उनका समुचित परीक्षण किया गया था।

अखिलेश यादव के 'नेशन फर्स्ट' से 'डोनेशन फर्स्ट' वाले बयान का समर्थन करते हुए गवांडे ने कहा कि कथित रूप से जुटाए गए चंदे और धन के उपयोग पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने इस पूरे मामले में निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच की मांग की।

ट्रंप के भारत दौरे और व्यापार समझौते पर पारदर्शिता की मांग

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संभावित भारत दौरे पर गवांडे ने कहा कि भारत 'अतिथि देवो भव:' की परंपरा का सम्मान करता है और ट्रंप का स्वागत होगा। हालांकि, उन्होंने प्रस्तावित भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर सरकार से पारदर्शिता की मांग की। उनके अनुसार, ऐतिहासिक व्यापार समझौते की बात कही गई थी, लेकिन अब तक उसके प्रमुख प्रावधान सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। सोयाबीन, मक्का (कॉर्न) आयात और व्यापारिक संतुलन जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सरकार को स्पष्टीकरण देना चाहिए।

टीईटी पेपर लीक और शिक्षा तंत्र पर सवाल

महाराष्ट्र टीईटी पेपर लीक मामले पर गवांडे ने कहा कि देश में प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रहीं। पहले नीट और अब टीईटी परीक्षा को लेकर सवाल उठे हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक जिम्मेदारी तय नहीं होगी और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसी घटनाएं नहीं रुकेंगी। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री और महाराष्ट्र के शिक्षा विभाग की जवाबदेही तय करने की मांग की।

राजनीतिक दलों की तोड़-फोड़ और टीएमसी विवाद

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम के कथित दुरुपयोग को लेकर बागी नेताओं के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के सवाल पर गवांडे ने आरोप लगाया कि देश में लगातार राजनीतिक दलों को तोड़ने की राजनीति हो रही है। उनके अनुसार, पहले आम आदमी पार्टी (AAP), फिर तृणमूल कांग्रेस और उसके बाद शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) को तोड़ा गया। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी एक संघर्षशील नेता हैं और आगामी 'शहीद दिवस' कार्यक्रम में उनके गुट की ताकत स्पष्ट दिखाई देगी।

गवांडे ने यह भी कहा कि देश की राजनीति को हिंदू-मुस्लिम बहस तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए और विपक्ष का उद्देश्य धार्मिक विवाद नहीं, बल्कि जनहित और जवाबदेही से जुड़े मुद्दे उठाना है। आने वाले दिनों में इन मुद्दों पर विपक्षी दलों का दबाव और बढ़ने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यूसीसी पर 'सर्वसम्मति पहले' की शर्त उस दल की ओर से आ रही है जिसने खुद कभी इस पर ठोस वैकल्पिक प्रस्ताव नहीं रखा। टीईटी पेपर लीक पर जवाबदेही की मांग सही दिशा में है, लेकिन जब तक विपक्ष केवल बयान देता रहेगा और संसद में ठोस विधायी प्रस्ताव नहीं लाएगा, तब तक यह दबाव प्रतीकात्मक ही रहेगा।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अनीश गवांडे ने यूसीसी पर क्या कहा?
गवांडे ने कहा कि यदि समान नागरिक संहिता लागू करनी है तो उसे पूरे देश में एकसमान रूप से लागू किया जाना चाहिए। राज्यवार अलग-अलग यूसीसी होने से इस कानून का मूल उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा और सभी हितधारकों से व्यापक संवाद आवश्यक है।
राम मंदिर ट्रस्ट विवाद में गवांडे की क्या मांग है?
गवांडे ने ट्रस्ट में कथित वित्तीय अनियमितताओं — चढ़ावा, चंदा और चांदी से जुड़े आरोपों — की स्वतंत्र जांच की मांग की है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि ट्रस्ट स्वतंत्र संस्था है तो महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे में सरकारी दबाव की चर्चा क्यों है।
महाराष्ट्र टीईटी पेपर लीक पर उन्होंने क्या कहा?
गवांडे ने नीट के बाद टीईटी पेपर लीक को परीक्षा तंत्र की व्यापक विफलता बताया। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री और महाराष्ट्र के शिक्षा विभाग की जवाबदेही तय करने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की।
ट्रंप के भारत दौरे और ट्रेड डील पर गवांडे का क्या रुख है?
गवांडे ने कहा कि भारत 'अतिथि देवो भव:' की परंपरा के अनुसार ट्रंप का स्वागत करेगा, लेकिन प्रस्तावित भारत-अमेरिका ट्रेड डील के प्रमुख प्रावधान अब तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। सोयाबीन, मक्का आयात और व्यापारिक संतुलन जैसे मुद्दों पर सरकार से पारदर्शिता की मांग की।
राजनीतिक दलों की तोड़-फोड़ पर गवांडे ने क्या आरोप लगाए?
गवांडे ने आरोप लगाया कि देश में लगातार राजनीतिक दलों को तोड़ा जा रहा है — पहले AAP, फिर TMC और फिर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे)। उन्होंने TMC की ओर से बागी नेताओं के खिलाफ दर्ज शिकायत को उचित बताया और ममता बनर्जी को संघर्षशील नेता कहा।
राष्ट्र प्रेस
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