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महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन: बाबा महाकाल को अर्पित हुई पहली राखी, सवा लाख लड्डुओं का भोग

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महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन: बाबा महाकाल को अर्पित हुई पहली राखी, सवा लाख लड्डुओं का भोग

सारांश

उज्जैन में रक्षाबंधन की शुरुआत पहले बाबा महाकाल से होती है — यह सिर्फ परंपरा नहीं, नगर की आस्था का केंद्र है। इस बार भस्म आरती में सवा लाख लड्डुओं के भोग और पुजारी परिवार की महिलाओं द्वारा अर्पित राखी के साथ हज़ारों श्रद्धालुओं ने पर्व का आरंभ किया।

मुख्य बातें

28 अगस्त को सावन पूर्णिमा पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में रक्षाबंधन मनाया गया।
पुजारी परिवार की महिलाओं ने भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल को नगर की पहली राखी अर्पित की।
मंदिर में सवा लाख लड्डुओं का विशेष भोग लगाया गया और श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया।
पंचामृत अभिषेक और भांग-चंदन-सूखे मेवों से बाबा का श्रृंगार किया गया।
महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा भस्म रमाए जाने के बाद बाबा साकार रूप में दर्शन देते हैं — यह प्राचीन मान्यता है।

उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में 28 अगस्त को सावन पूर्णिमा पर रक्षाबंधन का पर्व विशेष धार्मिक उत्साह के साथ मनाया गया। ब्रह्मांड के राजा माने जाने वाले बाबा महाकाल को परंपरानुसार उज्जैन की सबसे पहली राखी अर्पित की गई और मंदिर में सवा लाख लड्डुओं का विशेष भोग लगाया गया। मान्यता है कि जब तक बाबा को राखी नहीं बंधती, तब तक नगर में रक्षाबंधन का पर्व आरंभ नहीं माना जाता।

भस्म आरती और पंचामृत अभिषेक

शुक्रवार की तड़के भस्म आरती से पूर्व भगवान महाकाल का पंचामृत अभिषेक किया गया। दूध, दही, घी, शहद और शर्करा से बाबा का अभिषेक कर उन्हें भांग, चंदन और सूखे मेवों से सुसज्जित किया गया। इसके बाद बाबा को नए वस्त्र धारण कराए गए और भव्य रूप से श्रृंगार किया गया।

भस्म आरती के आरंभ होते ही महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा को भस्म रमाई गई। धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पित होने के पश्चात बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।

पुजारी परिवार की महिलाओं ने बांधी पहली राखी

भस्म आरती के दौरान पुजारी परिवार की महिलाओं द्वारा विशेष रूप से तैयार की गई राखी बाबा महाकाल को अर्पित की गई। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है — नगर में किसी भी भाई को राखी बंधने से पहले बाबा को राखी बांधी जाती है। इसके बाद ही उज्जैन की बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी सजाती हैं।

सवा लाख लड्डुओं का भोग और प्रसाद वितरण

इस पावन अवसर पर मंदिर में सवा लाख लड्डुओं का विशेष भोग अर्पित किया गया। भस्म आरती की समाप्ति के बाद बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच यह लड्डू प्रसाद के रूप में वितरित किए गए। पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' और 'हर हर महादेव' के जयकारों से गुंजायमान रहा।

आम जनता पर असर और श्रद्धालुओं की भीड़

रक्षाबंधन के इस विशेष अवसर पर उज्जैन में दूर-दराज से हज़ारों श्रद्धालु पहुँचे। भस्म आरती में सम्मिलित होकर भक्तों ने बाबा महाकाल के दर्शन किए और पर्व की शुरुआत दिव्य आशीर्वाद के साथ की। गौरतलब है कि महाकालेश्वर मंदिर देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यहाँ के उत्सव देशभर के श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं। यह आयोजन उज्जैन की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान को और सुदृढ़ करता है और आने वाले वर्षों में भी इस परंपरा के निरंतर जीवंत रहने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ नगर का हर पर्व पहले देवाधिदेव की स्वीकृति से शुरू होता है। यह परंपरा दर्शाती है कि भारत के तीर्थ नगरों में धर्म और सामाजिक जीवन अभी भी अविभाज्य हैं। मीडिया कवरेज अक्सर इस आयोजन की भव्यता पर केंद्रित रहती है, लेकिन इसके पीछे की पुजारी परिवारों की पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही जिम्मेदारी और अनुशासन को अनदेखा कर देती है। यही सांस्थानिक निरंतरता इस मंदिर को बारह ज्योतिर्लिंगों में विशिष्ट स्थान देती है।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उज्जैन में महाकाल को सबसे पहले राखी क्यों बांधी जाती है?
बाबा महाकाल को ब्रह्मांड का राजा माना जाता है और परंपरा के अनुसार उज्जैन में रक्षाबंधन का पर्व तब तक आरंभ नहीं माना जाता जब तक बाबा को राखी नहीं बंधती। पुजारी परिवार की महिलाएँ भस्म आरती के दौरान विशेष रूप से तैयार राखी बाबा को अर्पित करती हैं, उसके बाद ही नगर में बहनें अपने भाइयों को राखी बांधती हैं।
महाकालेश्वर मंदिर में रक्षाबंधन पर सवा लाख लड्डुओं का भोग क्यों लगाया जाता है?
सावन पूर्णिमा पर रक्षाबंधन के विशेष अवसर पर मंदिर में सवा लाख लड्डुओं का भोग लगाने की परंपरा है। भस्म आरती के बाद यह लड्डू श्रद्धालुओं में प्रसाद के रूप में वितरित किए जाते हैं।
भस्म आरती क्या है और यह महाकालेश्वर में क्यों खास है?
भस्म आरती महाकालेश्वर मंदिर की सबसे विशिष्ट और प्राचीन आरती है, जो प्रतिदिन तड़के होती है। महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा बाबा को भस्म रमाई जाती है और मान्यता है कि इसके बाद बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में श्रद्धालुओं को दर्शन देते हैं।
रक्षाबंधन पर उज्जैन महाकाल मंदिर में पंचामृत अभिषेक में क्या होता है?
पंचामृत अभिषेक में दूध, दही, घी, शहद और शर्करा से बाबा महाकाल का अभिषेक किया जाता है। इसके बाद भांग, चंदन और सूखे मेवों से उनका श्रृंगार कर नए वस्त्र धारण कराए जाते हैं।
रक्षाबंधन पर महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालु कहाँ से आते हैं?
रक्षाबंधन पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में देशभर के दूर-दराज क्षेत्रों से हज़ारों श्रद्धालु भस्म आरती में सम्मिलित होने और बाबा के दर्शन करने पहुँचते हैं। महाकालेश्वर देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है, जिससे यहाँ के उत्सवों का आकर्षण विशेष रूप से अधिक रहता है।
राष्ट्र प्रेस
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