उज्ज्वला योजना में सब्सिडी 12 से घटकर 4 सिलेंडर: मनोज झा बोले — 'आम लोगों के बीच जाइए, हकीकत पता चलेगी'
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद मनोज झा ने 9 जून को केंद्र सरकार की उज्ज्वला योजना में की गई सब्सिडी कटौती पर तीखा हमला बोला। योजना के तहत अब सालाना सिर्फ 4 सिलेंडरों पर सब्सिडी मिलेगी — जो योजना की शुरुआत में 12 थी, फिर घटाकर 9 की गई और अब 4 पर आ गई है। झा ने सरकार से सीधे आग्रह किया कि वह आम नागरिकों से संवाद स्थापित करे।
मुख्य घटनाक्रम
मनोज झा ने कहा, 'आखिर यह सरकार क्या कर रही है? कार्यशैली से यह साफ जाहिर हो रहा है कि यह सरकार अब पूरी तरह से विलीन हो चुकी है, जिसे जनता के हितों से कोई सरोकार नहीं है।' उन्होंने उज्ज्वला योजना में सब्सिडी की क्रमिक कटौती — 12 से 9 और फिर 4 सिलेंडर — को सरकार की जन-विरोधी नीति का प्रमाण बताया।
राजद सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि मीडिया का एक हिस्सा सरकार के पक्ष में एकतरफा आख्यान प्रस्तुत कर रहा है, जिससे ज़मीनी हकीकत दब जाती है। उन्होंने कहा, 'मीडिया का एक इकोसिस्टम सरकार के पक्ष में तुहरी बजाएगा और कहेगा कि आपकी सुबह में भी जय हो रही है और शाम को भी जय हो रही है।'
आम जनता पर असर
झा ने कहा कि देश में मध्यम वर्गीय और निम्न मध्यम वर्गीय परिवारों के बीच आर्थिक संकट गहरा हो रहा है। उनका कहना था, 'मेरा अनुरोध है कि आप ऐसे लोगों के बीच में जाइए, वो आपको हकीकत से रूबरू कराएंगे।' उन्होंने सरकार से द्विपक्षीय संवाद स्थापित करने की अपील की।
गौरतलब है कि उज्ज्वला योजना की शुरुआत गरीब परिवारों — विशेषकर महिलाओं — को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन और सब्सिडी देने के उद्देश्य से की गई थी। सब्सिडी में यह कटौती ऐसे समय में हुई है जब एलपीजी सिलेंडर की कीमतें पहले से ही आम परिवारों के बजट पर दबाव बना रही हैं।
इंडिया गठबंधन पर रुख
झा ने हाल ही में हुई इंडिया ब्लॉक की बैठक को 'सार्थक' बताया। उन्होंने कहा कि बैठक में कई बिंदुओं पर विस्तारपूर्वक चर्चा हुई और कांग्रेस की ओर से आश्वासन मिला कि गठबंधन के साथ सकारात्मक रवैया बनाए रखा जाएगा।
राजद सांसद के अनुसार, सभी दलों के बीच आगामी दिनों में तालमेल की रूपरेखा तय करने पर खुले मन से बातचीत हुई और किसी भी मुद्दे को नज़रअंदाज़ नहीं किया गया।
क्या होगा आगे
विपक्षी दलों का दबाव बढ़ने के साथ यह देखना होगा कि केंद्र सरकार उज्ज्वला योजना की सब्सिडी नीति पर कोई पुनर्विचार करती है या नहीं। इंडिया ब्लॉक के एकजुट होने की स्थिति में यह मुद्दा संसद में भी उठाया जा सकता है।