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देवभूमि परिवार आईडी का यूकेडी ने किया विरोध, राज्यपाल को ज्ञापन; राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी

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देवभूमि परिवार आईडी का यूकेडी ने किया विरोध, राज्यपाल को ज्ञापन; राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी

सारांश

देवभूमि परिवार आईडी में 15 वर्ष के निवास को पात्रता मानने के प्रावधान ने उत्तराखंड में राजनीतिक तनाव बढ़ा दिया है। यूकेडी ने इसे राज्य आंदोलन की भावना के विरुद्ध बताते हुए राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा और सरकार को राज्यव्यापी उग्र आंदोलन की चेतावनी दी।

मुख्य बातें

उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) ने 17 जून को उत्तरकाशी में राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा।
विवाद की जड़ देवभूमि परिवार आईडी का वह प्रावधान है जो 15 वर्षों से राज्य में रह रहे लोगों को पंजीकरण का पात्र मानता है।
यूकेडी की माँग — मूल निवास का आधार वर्ष 1950 हो, न कि 15 वर्ष का निवास।
केंद्रीय अनुशासन समिति अध्यक्ष राकेश सेमवाल ने सरकार को राज्यव्यापी उग्र आंदोलन की चेतावनी दी।
यूकेडी ने चारधाम यात्रा के दौरान हुई हिंसक घटनाओं पर भी कड़ी कार्रवाई की माँग की।

उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) ने 17 जून को देवभूमि परिवार आईडी के नए प्रावधानों के विरोध में उत्तरकाशी में राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा और चेतावनी दी कि यदि मूल निवासियों के हितों की अनदेखी जारी रही तो पार्टी राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ेगी। जिलाधिकारी की अनुपलब्धता के कारण यह ज्ञापन उपजिलाधिकारी उत्तरकाशी को सौंपा गया।

मुख्य विवाद: 15 वर्ष का निवास प्रावधान

यूकेडी नेताओं का मुख्य एतराज उस प्रावधान से है जिसके तहत 15 वर्षों से उत्तराखंड में निवास कर रहे लोगों को भी देवभूमि परिवार आईडी के पंजीकरण का पात्र माना गया है। पार्टी का तर्क है कि यह व्यवस्था पृथक उत्तराखंड राज्य आंदोलन की मूल भावना और राज्य गठन के उद्देश्यों के सीधे विरुद्ध है। यूकेडी लंबे समय से वर्ष 1950 के आधार पर मूल निवास व्यवस्था लागू करने की माँग करती रही है।

नेताओं की प्रतिक्रिया

यूकेडी के जिलाध्यक्ष पंडित बिहारी लाल जगूड़ी ने कहा कि देवभूमि परिवार आईडी के वर्तमान प्रावधान मूल निवासियों के अधिकारों और हितों को प्रभावित करने वाले हैं तथा पार्टी इसका पुरजोर विरोध करती है।

पार्टी की केंद्रीय महामंत्री एवं महिला प्रकोष्ठ प्रभारी किरन रावत एडवोकेट ने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था से बाहरी लोगों के राज्य में बसने की आशंकाएँ बढ़ रही हैं, जिससे उत्तराखंड की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने माँग की कि सरकार इस कानून के पीछे की मंशा स्पष्ट करे।

केंद्रीय अनुशासन समिति के अध्यक्ष राकेश सेमवाल ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उचित निर्णय नहीं लिया तो यूकेडी राज्यव्यापी उग्र आंदोलन चलाने के लिए बाध्य होगी और इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार पर होगी।

चारधाम हिंसा पर भी उठाई आवाज़

ज्ञापन में यूकेडी नेताओं ने चारधाम यात्रा के दौरान सामने आई मारपीट और शस्त्रों के प्रयोग की घटनाओं पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की माँग करते हुए कहा कि देवभूमि की शांति, सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक गरिमा की रक्षा के लिए ऐसी घटनाओं पर प्रभावी अंकुश अनिवार्य है।

ज्ञापन में शामिल पदाधिकारी

ज्ञापन सौंपने के दौरान जिला उपाध्यक्ष जगत रमोला, जिला प्रचार मंत्री प्रताप रमोला, संदीप राणा, पंकज उनियाल, सुरजीत राणा, मोहित मथुरा और आशीष नेगी सहित यूकेडी के अनेक पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तराखंड में मूल निवास और बाहरी बसाहट को लेकर राजनीतिक संवेदनशीलता पहले से ऊँची है। यूकेडी की चेतावनी के बाद राज्य सरकार का रुख और देवभूमि परिवार आईडी के प्रावधानों पर संभावित पुनर्विचार आने वाले दिनों में इस विवाद की दिशा तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो पहाड़ी राज्यों में संसाधनों और भूमि पर पहले से चले आ रहे दबाव को और बढ़ाएगा। गौरतलब है कि उत्तराखंड में मूल निवास की परिभाषा दशकों से अनिर्णीत है और हर चुनावी चक्र में यह मुद्दा उभरता है। असली परीक्षा यह है कि क्या सरकार इस बार कोई ठोस और सत्यापन-योग्य ढाँचा देती है, या यह ज्ञापन भी पिछले विरोधों की तरह बिना नीतिगत बदलाव के दफ्तरी फाइलों में दब जाएगा।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

देवभूमि परिवार आईडी क्या है और यूकेडी इसका विरोध क्यों कर रही है?
देवभूमि परिवार आईडी उत्तराखंड सरकार की एक पहचान-पंजीकरण योजना है। यूकेडी का विरोध इस प्रावधान से है जो 15 वर्षों से राज्य में रह रहे लोगों को भी पात्र मानता है, जबकि पार्टी चाहती है कि पात्रता का आधार वर्ष 1950 का मूल निवास हो।
यूकेडी ने राज्यपाल को ज्ञापन कब और कहाँ सौंपा?
यूकेडी के प्रतिनिधिमंडल ने 17 जून को उत्तरकाशी में राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। जिलाधिकारी की व्यस्तता के कारण यह ज्ञापन उपजिलाधिकारी उत्तरकाशी को दिया गया।
यूकेडी ने क्या चेतावनी दी है?
केंद्रीय अनुशासन समिति के अध्यक्ष राकेश सेमवाल ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने देवभूमि परिवार आईडी के प्रावधानों पर उचित निर्णय नहीं लिया तो यूकेडी राज्यव्यापी उग्र आंदोलन चलाने के लिए बाध्य होगी और इसकी जिम्मेदारी सरकार पर होगी।
यूकेडी मूल निवास के लिए कौन-सा आधार वर्ष माँग रही है?
उत्तराखंड क्रांति दल लंबे समय से वर्ष 1950 को मूल निवास का आधार बनाने की माँग करती रही है। पार्टी का कहना है कि 15 वर्ष का निवास मानदंड पृथक राज्य आंदोलन की मूल भावना के विरुद्ध है।
ज्ञापन में चारधाम यात्रा का उल्लेख क्यों किया गया?
यूकेडी नेताओं ने चारधाम यात्रा के दौरान मारपीट और शस्त्रों के प्रयोग की घटनाओं पर भी चिंता जताई और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की माँग की। उनका कहना था कि देवभूमि की सांस्कृतिक गरिमा और सामाजिक शांति की रक्षा के लिए ऐसी घटनाओं पर अंकुश ज़रूरी है।
राष्ट्र प्रेस
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