उमाशंकर सिंह को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई, गंगा तट पर उमड़ा जनसैलाब
सारांश
मुख्य बातें
बहुजन समाज पार्टी (BSP) के वरिष्ठ नेता और रसड़ा विधानसभा क्षेत्र से लगातार तीन बार विधायक रहे उमाशंकर सिंह को 8 अगस्त 2025 को बलिया के श्रीरामपुर घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। उनकी शवयात्रा में हजारों की संख्या में उमड़ी भीड़ ने यह साबित किया कि उनकी लोकप्रियता किसी एक दल या विचारधारा की मोहताज नहीं थी।
अंतिम यात्रा का विवरण
उमाशंकर सिंह का पार्थिव शरीर गुरुवार देर रात उनके पैतृक गाँव खनवर (नगरा, बलिया) पहुँचा, जहाँ रात से ही अंतिम दर्शन के लिए लोगों की कतार लग गई। शुक्रवार सुबह उनके आवास से शवयात्रा आरंभ होते ही 'उमाशंकर सिंह अमर रहें' और 'जब तक सूरज-चाँद रहेगा, भैया तेरा नाम रहेगा' के नारों से पूरा क्षेत्र गूँज उठा। हल्की बारिश के बावजूद जनसैलाब थमा नहीं।
करीब सात घंटे की यात्रा के बाद शवयात्रा श्रीरामपुर घाट पहुँची। रास्ते भर लोगों ने पुष्पवर्षा कर और श्रद्धासुमन अर्पित कर अपने जनप्रतिनिधि को विदाई दी। गंगा तट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। उनके पुत्र प्रिंस यूकेश सिंह ने मुखाग्नि दी और इस दौरान भावुक होकर फफक पड़े।
प्रशासन और नेताओं की श्रद्धांजलि
जिला प्रशासन की ओर से जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह और पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह ने पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। अंतिम यात्रा में BSP प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल, सुभासपा विधायक हंसूराम, पूर्व मंत्री नारद राय, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के जिलाध्यक्ष संजय मिश्र सहित विभिन्न दलों के नेता शामिल रहे।
उत्तर प्रदेश सरकार में स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह — जो उमाशंकर सिंह के समधी हैं — भी इस अवसर पर उपस्थित रहे। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर लिखा कि जिन लोगों ने उमाशंकर सिंह की 'कमाई' उनके लॉकर और बैंक खातों में तलाशी, उन्हें बलिया की जनता की आँखों के आँसू और उमड़े जनसैलाब को देखना चाहिए था। उन्होंने कहा, 'लोगों के दिलों में कमाई गई यह पूँजी किसी भी लॉकर में बंद नहीं की जा सकती।'
उमाशंकर सिंह का जीवन परिचय
उमाशंकर सिंह का जन्म 2 जनवरी 1971 को बलिया जिले के खनवर गाँव में एक किसान परिवार में हुआ था। उनके पिता घुरहू सिंह भारतीय सेना में कार्यरत रहे। प्रारंभिक शिक्षा गाँव में प्राप्त करने के बाद उन्होंने जनता इंटर कॉलेज, नगरा से इंटरमीडिएट और सतीश चंद्र कॉलेज, बलिया से स्नातक की डिग्री ली।
छात्र राजनीति से सार्वजनिक जीवन में कदम रखने वाले उमाशंकर सिंह 1990-91 में छात्रसंघ के महामंत्री रहे। वर्ष 2000 में वे जिला पंचायत सदस्य चुने गए और 2012 में पहली बार रसड़ा विधानसभा सीट से विधायक बने। इसके बाद 2017 और 2022 में भी उन्होंने लगातार जीत दर्ज की, जिससे वे BSP के सबसे विश्वसनीय जनप्रतिनिधियों में शामिल हो गए।
निधन और शोक संदेश
उमाशंकर सिंह का बुधवार रात नई दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल में उपचार के दौरान निधन हो गया। वे 55 वर्ष के थे और लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, BSP प्रमुख मायावती, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और BJP प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी सहित अनेक नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया।
आगे की राह
उमाशंकर सिंह के निधन से रसड़ा विधानसभा सीट रिक्त हो गई है, जिससे इस क्षेत्र में उपचुनाव की संभावना बन गई है। BSP के लिए यह सीट विशेष महत्व रखती है क्योंकि उमाशंकर सिंह पार्टी के एकमात्र विधायक थे। उनकी विरासत और जनाधार को बनाए रखना पार्टी के लिए आने वाले समय में सबसे बड़ी चुनौती होगी।