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बजट 2026 में कूरियर निर्यात की ₹10 लाख मूल्य सीमा समाप्त, ई-कॉमर्स निर्यातकों को बड़ी राहत

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बजट 2026 में कूरियर निर्यात की ₹10 लाख मूल्य सीमा समाप्त, ई-कॉमर्स निर्यातकों को बड़ी राहत

सारांश

बजट 2026 में सरकार ने कूरियर माध्यम से ई-कॉमर्स निर्यात पर लागू ₹10 लाख की मूल्य सीमा हटा दी है और RTO प्रक्रिया को सरल बनाया है। FIEO, CBIC और दिल्ली एयर कार्गो के अधिकारियों ने इसे भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ी राहत बताया है।

मुख्य बातें

बजट 2026 में ई-कॉमर्स कूरियर निर्यात पर लागू ₹10 लाख की मूल्य सीमा पूरी तरह समाप्त कर दी गई।
FIEO के महानिदेशक अजय सहाय के अनुसार इससे उच्च मूल्य वाले उत्पादों के निर्यातकों को सीधा लाभ मिलेगा।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अस्वीकृत खेपों की वापसी — RTO प्रक्रिया — को भी सरल बनाया गया है।
CBIC सदस्य योगेंद्र गर्ग ने कहा कि ये सुधार कूरियर और एक्सप्रेस लॉजिस्टिक्स उद्योग को अधिक तेज़ और प्रतिस्पर्धी बनाएंगे।
18 जून 2026 को नई दिल्ली में आयोजित विशेष कार्यक्रम में उद्योग, सीमा शुल्क विभाग और व्यापार विशेषज्ञों ने भाग लिया।

केंद्रीय बजट 2026 में एक्सप्रेस और कूरियर सेक्टर के लिए घोषित नीतिगत सुधारों के तहत सरकार ने ई-कॉमर्स कूरियर एवं डाक माध्यम से होने वाले निर्यात पर लागू ₹10 लाख की मूल्य सीमा को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। 18 जून 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष उद्योग कार्यक्रम में उद्योग प्रतिनिधियों, सीमा शुल्क अधिकारियों और व्यापार विशेषज्ञों ने इन सुधारों के संभावित प्रभावों पर विस्तृत चर्चा की। विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम भारतीय निर्यातकों, ई-कॉमर्स कंपनियों और लॉजिस्टिक्स उद्योग के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।

मूल्य सीमा हटाने का सीधा असर

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस (FIEO) के महानिदेशक एवं सीईओ अजय सहाय ने कहा कि बजट 2026 में कूरियर आयात-निर्यात नियमों में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले ई-कॉमर्स के जरिए कूरियर और डाक माध्यम से होने वाले निर्यात पर ₹10 लाख की मूल्य सीमा लागू थी, लेकिन अब सरकार ने इस सीमा को समाप्त कर दिया है।

सहाय के अनुसार इस फैसले से भारतीय निर्यातकों को काफी फायदा होगा, खासकर उन कंपनियों को जो उच्च मूल्य वाले उत्पादों का निर्यात करती हैं। इससे भारतीय उत्पादों की वैश्विक बाज़ारों तक पहुँच और अधिक मज़बूत होगी।

आरटीओ प्रक्रिया का सरलीकरण

ईआईसीआई के सीईओ विजय कुमार ने कहा कि बजट में घोषित सुधारों का मुख्य उद्देश्य कारोबार को आसान बनाना है। उन्होंने बताया कि उच्च मूल्य वाले उत्पादों के निर्यात पर लगी सीमा हटाने से निर्यातकों को कूरियर माध्यम से बड़े मूल्य की शिपमेंट भेजने में सुविधा मिलेगी।

इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय गंतव्य पर अस्वीकार होने वाली खेपों — यानी रिटर्न-टू-ओरिजिन (RTO) — को वापस लाने की प्रक्रिया को भी सरल बनाया गया है। विजय कुमार का मानना है कि ये सुधार व्यापार जगत के सामने आने वाली कई चुनौतियों को कम करेंगे और निर्यात गतिविधियों को नई गति देंगे।

सीबीआईसी का नज़रिया

केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) के सदस्य योगेंद्र गर्ग ने कहा कि सरकार विभिन्न क्षेत्रों में 'ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस' को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने बताया कि एक्सप्रेस और कूरियर उद्योग की सबसे बड़ी चुनौतियों में मूल्य सीमा और RTO जैसी सुविधाओं का अभाव शामिल था।

गर्ग ने कहा कि सरकार ने इन बाधाओं को दूर करने के लिए आवश्यक सुधार किए हैं, जिससे कूरियर और एक्सप्रेस लॉजिस्टिक्स उद्योग को अधिक तेज़, सरल और प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकेगा।

एयर कार्गो क्षेत्र पर प्रभाव

दिल्ली एयर कार्गो के कमिश्नर योगेंद्र सिंह ने कहा कि इस बार के केंद्रीय बजट में व्यापार और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के लिए कई सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं। उन्होंने बताया कि इन्हीं सुधारों की जानकारी उद्योग जगत तक पहुँचाने के उद्देश्य से इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उनके अनुसार सरकार द्वारा किए गए बदलावों से व्यापार प्रक्रियाएँ अधिक सरल और प्रभावी बनेंगी।

आगे की राह

विशेषज्ञों का मानना है कि बजट 2026 के ये सुधार भारतीय निर्यातकों, ई-कॉमर्स कंपनियों और लॉजिस्टिक्स उद्योग के लिए महत्वपूर्ण साबित होंगे। मूल्य सीमा हटने और प्रक्रियाओं के सरलीकरण से भारतीय उत्पादों की वैश्विक बाज़ारों में पहुँच बढ़ेगी, जबकि व्यापार करने में आसानी आने से देश के निर्यात को भी नया बल मिलेगा। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन नीतिगत बदलावों को ज़मीनी स्तर पर लागू करने की गति कितनी तेज़ रहती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या सीमा शुल्क निकासी की बुनियादी ढाँचागत क्षमता इस बढ़ी हुई शिपमेंट मात्रा को संभाल पाएगी। भारत का एक्सप्रेस कार्गो ढाँचा वर्षों से प्रक्रियागत अड़चनों से जूझ रहा है — नीतिगत घोषणा और ज़मीनी क्रियान्वयन के बीच की खाई अक्सर लाभार्थियों तक पहुँचने से पहले ही सुधारों को निष्प्रभावी कर देती है। RTO सरलीकरण स्वागत योग्य है, परंतु इसके लिए सीमा शुल्क विभाग और लॉजिस्टिक्स प्रदाताओं के बीच डिजिटल समन्वय की आवश्यकता होगी जो अभी तक पूरी तरह स्थापित नहीं है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बजट 2026 में कूरियर निर्यात के लिए क्या बदलाव किए गए हैं?
बजट 2026 में ई-कॉमर्स के जरिए कूरियर और डाक माध्यम से होने वाले निर्यात पर लागू ₹10 लाख की मूल्य सीमा को समाप्त कर दिया गया है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अस्वीकृत खेपों की वापसी यानी RTO प्रक्रिया को भी सरल बनाया गया है।
मूल्य सीमा हटने से किन निर्यातकों को फायदा होगा?
FIEO के महानिदेशक अजय सहाय के अनुसार इस बदलाव से विशेष रूप से उन कंपनियों को लाभ मिलेगा जो उच्च मूल्य वाले उत्पादों का निर्यात करती हैं। पहले ₹10 लाख से अधिक की शिपमेंट कूरियर माध्यम से नहीं भेजी जा सकती थी, जो अब संभव होगा।
RTO यानी रिटर्न-टू-ओरिजिन प्रक्रिया क्या है और इसे सरल क्यों बनाया गया?
RTO वह प्रक्रिया है जिसमें अंतरराष्ट्रीय गंतव्य पर अस्वीकृत या वापस की गई खेपों को भारत लाया जाता है। ईआईसीआई के सीईओ विजय कुमार के अनुसार पहले यह प्रक्रिया जटिल थी, जिससे निर्यातकों को अनावश्यक देरी और लागत का सामना करना पड़ता था — नए सुधारों से यह बाधा दूर होगी।
CBIC ने इन सुधारों के बारे में क्या कहा?
CBIC के सदस्य योगेंद्र गर्ग ने कहा कि सरकार 'ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस' को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। उनके अनुसार मूल्य सीमा और RTO सुविधा का अभाव कूरियर उद्योग की सबसे बड़ी चुनौतियाँ थीं, जिन्हें इन सुधारों से दूर किया गया है।
18 जून 2026 को नई दिल्ली में कौन-सा कार्यक्रम आयोजित हुआ?
18 जून 2026 को नई दिल्ली में बजट 2026 के कूरियर सेक्टर सुधारों पर एक विशेष उद्योग कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें FIEO, ईआईसीआई, CBIC और दिल्ली एयर कार्गो के वरिष्ठ अधिकारियों सहित उद्योग जगत और व्यापार विशेषज्ञों ने भाग लिया।
राष्ट्र प्रेस
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