यूपी में छात्रसंघ चुनाव बहाली की माँग, NSUI नेता आदित्य शुक्ला बोले — 'राजनीति को महंगा कर दिया गया'
सारांश
मुख्य बातें
एनएसयूआई उत्तर प्रदेश के स्टेट जनरल सेक्रेटरी और गोरखपुर विश्वविद्यालय के छात्र नेता आदित्य शुक्ला ने 22 सितंबर 2026 को लखनऊ स्थित कांग्रेस स्टेट ऑफिस में एक पोस्टर लगाकर उत्तर प्रदेश में छात्रसंघ चुनाव की बहाली की माँग को तेज़ कर दिया। पोस्टर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए तीखे सवाल उठाए गए हैं।
पोस्टर में क्या है
आदित्य शुक्ला ने बताया कि पोस्टर में लिखा है — 'यूपी में छात्रसंघ पर ताला और दिल्ली में जीत पर माला' — यह सीधा निशाना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर है। उनका तर्क है कि जब अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) दिल्ली के छात्रसंघ चुनावों में जीत हासिल करती है, तो मुख्यमंत्री उन्हें बधाई देते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश में छात्रसंघ चुनाव लंबे समय से निलंबित हैं।
शुक्ला ने सवाल उठाया, 'उत्तर प्रदेश में छात्रसंघ के चुनाव से क्यों डर लगता है?' उनके अनुसार यह चुप्पी महज़ प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक है।
युवाओं पर असर
आदित्य शुक्ला ने कहा कि लाखों विद्यार्थी इस सवाल का जवाब चाहते हैं कि छात्रसंघ चुनाव आखिर बहाल क्यों नहीं हो रहे। उन्होंने कहा कि 'जेन-ज़ी' पीढ़ी भी इस माँग में साझेदार है।
उनके अनुसार, छात्रसंघ चुनावों को बंद रखने से राजनीति में प्रवेश महंगा हो गया है और आम पढ़े-लिखे युवा इस क्षेत्र से दूर होते जा रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र और राज्य सरकारें विभिन्न क्षेत्रों में युवा नेतृत्व को बढ़ावा देने का दावा करती हैं।
राजनीतिक विरोधाभास
गौरतलब है कि देश की 65 प्रतिशत आबादी युवाओं की है। शुक्ला ने इस आँकड़े का हवाला देते हुए कहा कि जब हर क्षेत्र में युवाओं को आगे करने की बात होती है, तो राजनीति में उन्हें पीछे क्यों धकेला जा रहा है। यह सवाल केवल छात्र राजनीति तक सीमित नहीं, बल्कि लोकतंत्र में भागीदारी की व्यापक बहस से जुड़ा है।
उन्होंने याद दिलाया कि देश के कई बड़े नेता छात्रसंघ चुनावों से ही निकले हैं और यह मंच लोकतांत्रिक प्रशिक्षण का सबसे सुलभ माध्यम रहा है।
NSUI की स्पष्ट माँग
एनएसयूआई की ओर से साफ माँग रखी गई है कि उत्तर प्रदेश में तत्काल छात्रसंघ चुनाव बहाल किए जाएँ, ताकि छात्रों की लड़ाई लड़ने वाले युवाओं को चुनाव लड़ने और आगे बढ़ने का समान अवसर मिल सके। उत्तर प्रदेश सरकार या भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से अभी तक इस पोस्टर अभियान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।