22 सितंबर 2026
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यूपी में छात्रसंघ चुनाव बहाली की माँग, NSUI नेता आदित्य शुक्ला बोले — 'राजनीति को महंगा कर दिया गया'

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यूपी में छात्रसंघ चुनाव बहाली की माँग, NSUI नेता आदित्य शुक्ला बोले — 'राजनीति को महंगा कर दिया गया'

सारांश

यूपी में छात्रसंघ चुनाव लंबे समय से बंद हैं — और NSUI ने पोस्टर के ज़रिए सीधे सवाल पूछा है कि जब ABVP की दिल्ली जीत पर बधाई दी जाती है, तो यूपी में ताला क्यों? देश की 65% युवा आबादी और लोकतांत्रिक भागीदारी का यह सवाल अब और बड़ा होता जा रहा है।

मुख्य बातें

NSUI यूपी के स्टेट जनरल सेक्रेटरी आदित्य शुक्ला ने 22 सितंबर 2026 को लखनऊ में कांग्रेस स्टेट ऑफिस पर पोस्टर लगाकर छात्रसंघ चुनाव बहाली की माँग उठाई।
पोस्टर में लिखा — 'यूपी में छात्रसंघ पर ताला और दिल्ली में जीत पर माला' — CM योगी आदित्यनाथ पर दोहरे मानदंड का आरोप।
शुक्ला का कहना है कि छात्रसंघ चुनाव बंद रहने से राजनीति में प्रवेश महंगा हो गया है और पढ़े-लिखे युवा मुख्यधारा से दूर हो रहे हैं।
देश की 65% आबादी युवाओं की है — शुक्ला ने सवाल उठाया कि राजनीति में उन्हें अवसर क्यों नहीं मिल रहा।
उत्तर प्रदेश सरकार या BJP की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

एनएसयूआई उत्तर प्रदेश के स्टेट जनरल सेक्रेटरी और गोरखपुर विश्वविद्यालय के छात्र नेता आदित्य शुक्ला ने 22 सितंबर 2026 को लखनऊ स्थित कांग्रेस स्टेट ऑफिस में एक पोस्टर लगाकर उत्तर प्रदेश में छात्रसंघ चुनाव की बहाली की माँग को तेज़ कर दिया। पोस्टर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए तीखे सवाल उठाए गए हैं।

पोस्टर में क्या है

आदित्य शुक्ला ने बताया कि पोस्टर में लिखा है — 'यूपी में छात्रसंघ पर ताला और दिल्ली में जीत पर माला' — यह सीधा निशाना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर है। उनका तर्क है कि जब अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) दिल्ली के छात्रसंघ चुनावों में जीत हासिल करती है, तो मुख्यमंत्री उन्हें बधाई देते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश में छात्रसंघ चुनाव लंबे समय से निलंबित हैं।

शुक्ला ने सवाल उठाया, 'उत्तर प्रदेश में छात्रसंघ के चुनाव से क्यों डर लगता है?' उनके अनुसार यह चुप्पी महज़ प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक है।

युवाओं पर असर

आदित्य शुक्ला ने कहा कि लाखों विद्यार्थी इस सवाल का जवाब चाहते हैं कि छात्रसंघ चुनाव आखिर बहाल क्यों नहीं हो रहे। उन्होंने कहा कि 'जेन-ज़ी' पीढ़ी भी इस माँग में साझेदार है।

उनके अनुसार, छात्रसंघ चुनावों को बंद रखने से राजनीति में प्रवेश महंगा हो गया है और आम पढ़े-लिखे युवा इस क्षेत्र से दूर होते जा रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र और राज्य सरकारें विभिन्न क्षेत्रों में युवा नेतृत्व को बढ़ावा देने का दावा करती हैं।

राजनीतिक विरोधाभास

गौरतलब है कि देश की 65 प्रतिशत आबादी युवाओं की है। शुक्ला ने इस आँकड़े का हवाला देते हुए कहा कि जब हर क्षेत्र में युवाओं को आगे करने की बात होती है, तो राजनीति में उन्हें पीछे क्यों धकेला जा रहा है। यह सवाल केवल छात्र राजनीति तक सीमित नहीं, बल्कि लोकतंत्र में भागीदारी की व्यापक बहस से जुड़ा है।

उन्होंने याद दिलाया कि देश के कई बड़े नेता छात्रसंघ चुनावों से ही निकले हैं और यह मंच लोकतांत्रिक प्रशिक्षण का सबसे सुलभ माध्यम रहा है।

NSUI की स्पष्ट माँग

एनएसयूआई की ओर से साफ माँग रखी गई है कि उत्तर प्रदेश में तत्काल छात्रसंघ चुनाव बहाल किए जाएँ, ताकि छात्रों की लड़ाई लड़ने वाले युवाओं को चुनाव लड़ने और आगे बढ़ने का समान अवसर मिल सके। उत्तर प्रदेश सरकार या भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से अभी तक इस पोस्टर अभियान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें उठाया गया विरोधाभास — दिल्ली में ABVP की जीत पर बधाई और यूपी में ताला — इसे केवल विपक्षी राजनीति तक सीमित नहीं रहने देता। असली सवाल यह है कि लोकतांत्रिक प्रशिक्षण के इस मंच को बंद रखकर क्या हम एक ऐसी पीढ़ी तैयार कर रहे हैं जो राजनीति में विरासत और धन के बिना प्रवेश ही न कर सके।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपी में छात्रसंघ चुनाव क्यों बंद हैं?
उत्तर प्रदेश में छात्रसंघ चुनाव लंबे समय से निलंबित हैं, हालाँकि सरकार ने कोई आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं किया है। NSUI जैसे छात्र संगठन इसे लोकतांत्रिक भागीदारी के दमन के रूप में देखते हैं।
आदित्य शुक्ला कौन हैं?
आदित्य शुक्ला एनएसयूआई उत्तर प्रदेश के स्टेट जनरल सेक्रेटरी और गोरखपुर विश्वविद्यालय के छात्र नेता हैं। उन्होंने 22 सितंबर 2026 को लखनऊ में कांग्रेस स्टेट ऑफिस पर पोस्टर लगाकर छात्रसंघ चुनाव बहाली की माँग उठाई।
NSUI के पोस्टर में क्या लिखा है?
पोस्टर में लिखा है — 'यूपी में छात्रसंघ पर ताला और दिल्ली में जीत पर माला।' इसके ज़रिए CM योगी आदित्यनाथ पर यह आरोप लगाया गया है कि वे ABVP की दिल्ली जीत पर बधाई देते हैं, लेकिन यूपी में छात्रसंघ चुनाव बंद रखते हैं।
छात्रसंघ चुनाव बंद रहने से युवाओं पर क्या असर पड़ता है?
आदित्य शुक्ला के अनुसार, छात्रसंघ चुनाव बंद रहने से राजनीति में प्रवेश महंगा हो गया है और आम पढ़े-लिखे युवा इस क्षेत्र से दूर होते जा रहे हैं। देश की 65% युवा आबादी को लोकतांत्रिक नेतृत्व का अवसर नहीं मिल पाता।
उत्तर प्रदेश सरकार ने इस पर क्या कहा?
22 सितंबर 2026 तक उत्तर प्रदेश सरकार या भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से NSUI के इस पोस्टर अभियान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राष्ट्र प्रेस
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