योगी सरकार का अगस्त में दोहरा टीकाकरण अभियान, UP के 75 जिलों में परिषदीय स्कूलों के बच्चों को मिलेगा सुरक्षा कवच
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार ने अगस्त 2025 में प्रदेश के 75 जिलों के परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए दो चरणों में विशेष टीकाकरण अभियान चलाने का निर्णय लिया है, जिससे उन्हें गंभीर संक्रामक बीमारियों से दोहरी सुरक्षा मिल सके। पहले चरण में 3 से 7 अगस्त तक टीडी/टीडीएपी (टिटनेस, डिप्थीरिया एवं काली खांसी) और दूसरे चरण में 18 से 28 अगस्त तक एमआर (मीजल्स-रूबेला) टीकाकरण किया जाएगा। यह पहल परिषदीय विद्यालयों को शिक्षा के साथ-साथ बाल स्वास्थ्य संरक्षण के केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
अभियान का दायरा और लक्षित संस्थाएँ
यह अभियान केवल परिषदीय विद्यालयों तक सीमित नहीं है — सहायता प्राप्त विद्यालयों, मदरसों और आंगनबाड़ी केंद्रों में अध्ययनरत पात्र बच्चों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। इससे सुनिश्चित होगा कि समाज के हर वर्ग के बच्चों तक टीकाकरण की पहुँच हो।
महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी ने प्रदेश के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों एवं जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को अभियान के प्रभावी संचालन हेतु विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रत्येक जनपद में स्वास्थ्य एवं शिक्षा विभाग संयुक्त रूप से कार्य-योजना तैयार करेंगे।
टीडी/टीडीएपी अभियान: लक्ष्य और आयु वर्ग
3, 4, 6 और 7 अगस्त को आयोजित होने वाले टीडी/टीडीएपी अभियान के अंतर्गत तीन आयु वर्गों के बच्चों को टीके दिए जाएंगे — 5 से 6 वर्ष (संभावित कक्षा-1) के बच्चों को टीडीएपी-2, 10 वर्ष (संभावित कक्षा-5) के बच्चों को टीडी-10 तथा 16 वर्ष (संभावित कक्षा-10 एवं 11) के बच्चों को टीडी-16 की अतिरिक्त खुराक दी जाएगी।
प्रत्येक टीकाकरण सत्र में 50 से 75 बच्चों को आच्छादित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अभियान से पूर्व राज्य, जिला एवं ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षण, समन्वय बैठकें तथा विद्यालयवार तैयारी पूरी की जाएगी।
एमआर अभियान: खसरा-रूबेला से सुरक्षा
पहले चरण के बाद 18 से 28 अगस्त तक एमआर (मीजल्स-रूबेला) अभियान चलाया जाएगा। इसके अंतर्गत 5 से 10 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को एमआर वैक्सीन की अतिरिक्त खुराक दी जाएगी। प्रत्येक विद्यालय में प्रतिदिन 100 से 125 बच्चों के टीकाकरण का लक्ष्य रखा गया है।
गौरतलब है कि खसरा और रूबेला बच्चों में गंभीर जटिलताएँ पैदा कर सकते हैं, और यह अभियान इन बीमारियों की रोकथाम की दिशा में एक सुदृढ़ कदम माना जा रहा है।
क्रियान्वयन तंत्र और अभिभावक जागरूकता
दोनों अभियानों के तहत प्रत्येक विद्यालय में एक नोडल शिक्षक नामित किया जाएगा। आशा कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं शिक्षकों के सहयोग से पात्र बच्चों की सूची तैयार होगी। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी तथा जिला विद्यालय निरीक्षक परस्पर समन्वय से विद्यालयवार माइक्रोप्लान तैयार कराएंगे।
अभिभावकों को जागरूक करने के लिए प्रार्थना सभाओं, अभिभावक-शिक्षक बैठकों तथा जनजागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। अभियानों की प्रगति की निगरानी राज्य एवं जिला स्तर पर नियमित रूप से होगी और सभी गतिविधियों की सूचना निर्धारित पोर्टलों पर अपलोड की जाएगी। यह सुनिश्चित करने का लक्ष्य है कि कोई भी पात्र बच्चा टीकाकरण से वंचित न रहे।