29 अक्टूबर 2026
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यूपी सरकारी नौकरी: चरित्र सत्यापन नियम सख्त, हिंसक गतिविधियों से जुड़े उम्मीदवार अयोग्य

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यूपी सरकारी नौकरी: चरित्र सत्यापन नियम सख्त, हिंसक गतिविधियों से जुड़े उम्मीदवार अयोग्य

सारांश

उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी भर्ती के चरित्र सत्यापन नियमों को सख्त कर दिया है — हिंसक संगठनों से जुड़े उम्मीदवार अब अयोग्य होंगे, लेकिन राजनीतिक विचारधारा आधार नहीं बनेगी। साथ ही, सत्यापन रिपोर्ट की प्रतीक्षा के बिना अनंतिम नियुक्ति पत्र जारी करने की भी व्यवस्था की गई है।

मुख्य बातें

नियुक्ति विभाग के प्रधान सचिव एम.
देवराज ने 29 अक्टूबर 2026 को संशोधित चरित्र सत्यापन दिशानिर्देश जारी किए।
हिंसा के ज़रिये मौजूदा सामाजिक व्यवस्था बदलने के उद्देश्य वाले संगठनों के सदस्य सरकारी नियुक्ति के लिए अयोग्य होंगे।
केवल राजनीतिक विचारधारा के आधार पर किसी को अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा।
21 वर्ष की उम्र के बाद और सत्यापन से पहले के 3 वर्षों की गतिविधियाँ सक्रिय संलिप्तता का प्रमाण मानी जाएँगी।
पुलिस को 30 दिनों में सत्यापन रिपोर्ट देनी होगी; अब अनंतिम नियुक्ति पत्र रिपोर्ट से पहले जारी किए जा सकेंगे।
समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने इस आदेश की आलोचना की है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने 29 अक्टूबर 2026 को सरकारी सेवाओं में सीधी भर्ती के लिए चरित्र सत्यापन के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए दिशानिर्देशों के तहत ऐसे उम्मीदवार — जो हिंसा के ज़रिये मौजूदा सामाजिक व्यवस्था को बदलने की वकालत करने वाले संगठनों से जुड़े हैं — सरकारी नियुक्ति के लिए अयोग्य माने जाएँगे। यह निर्देश नियुक्ति विभाग के प्रधान सचिव एम. देवराज द्वारा जारी किया गया है।

नई नीति में क्या बदला

संशोधित दिशानिर्देश राज्य सरकार के विभागों, निगमों, परिषदों और स्थानीय निकायों में सीधी भर्ती पर लागू होंगे। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि 'किसी भी व्यक्ति को केवल उसकी राजनीतिक विचारधारा के कारण नियुक्ति के लिए अनुपयुक्त नहीं माना जाएगा।' हालाँकि, जो व्यक्ति ऐसे संगठनों के सदस्य हैं जिनका घोषित उद्देश्य हिंसा के माध्यम से मौजूदा सामाजिक व्यवस्था को बदलना है, उन्हें सरकारी नियुक्तियों के लिए अनुपयुक्त माना जाएगा।

आदेश के अनुसार, 21 वर्ष की आयु के बाद और सत्यापन से ठीक पहले के तीन वर्षों के दौरान ऐसी गतिविधियों में सहभागिता को इस बात का प्रमाण माना जाएगा कि उम्मीदवार अभी भी इनसे सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ है — जब तक कि ठोस साक्ष्य अन्यथा न साबित करें।

किन उम्मीदवारों को छूट

नीति में यह भी स्पष्ट किया गया है कि एफआईआर दर्ज होने या जाँच लंबित होने मात्र से कोई उम्मीदवार स्वतः अयोग्य नहीं होगा। इसी तरह, जिन उम्मीदवारों को अदालत ने बरी कर दिया है, जिनके मामले आपसी सहमति से सुलझा लिए गए हैं, या जो किशोर न्याय कानूनों के दायरे में आते हैं, उन्हें भी स्वतः अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा।

पहले से कार्यरत सरकारी कर्मचारियों को दोबारा चरित्र सत्यापन कराने की आवश्यकता नहीं होगी, हालाँकि नियुक्ति प्राधिकारी ज़रूरत पड़ने पर उनके पूर्व विभागों से जानकारी माँग सकते हैं।

भर्ती प्रक्रिया होगी तेज़

सरकार ने निर्देश दिया है कि पुलिस 30 दिनों के भीतर चरित्र सत्यापन रिपोर्ट सौंपे, ताकि भर्ती में अनावश्यक देरी न हो। इससे पहले, सत्यापन रिपोर्ट में महीनों की देरी के चलते योग्य उम्मीदवार भी नियुक्ति पत्र समय पर नहीं पा पाते थे।

संशोधित नीति के तहत सत्यापन रिपोर्ट की प्रतीक्षा किए बिना उम्मीदवारों को आवश्यक दस्तावेज़ और स्व-घोषणा पत्र प्राप्त करने के बाद अनंतिम नियुक्ति पत्र जारी किए जा सकेंगे। यदि बाद में सत्यापन के दौरान कोई उम्मीदवार अयोग्य पाया गया या उसने गलत जानकारी दी, तो उसकी नियुक्ति तत्काल रद्द होगी और कानूनी कार्रवाई भी होगी।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

यह कदम हाल ही में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान उठी 'सत्ता परिवर्तन' की माँग से जुड़े विवाद की पृष्ठभूमि में उठाया गया है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने इस कदम की आलोचना की है। आलोचकों का कहना है कि 'हिंसक गतिविधि' की परिभाषा व्यापक और अस्पष्ट है, जिसका इस्तेमाल शांतिपूर्ण असहमति को दबाने के लिए किया जा सकता है।

गौरतलब है कि यह निर्देश ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ शुरू हो रही हैं और सरकारी नौकरी भर्ती प्रक्रिया को लेकर युवाओं में पहले से असंतोष है।

आगे क्या होगा

नए दिशानिर्देश तत्काल प्रभाव से लागू हैं और सभी संबंधित विभागों को इनका पालन करना होगा। यह देखना अहम होगा कि 'हिंसक गतिविधि' की व्याख्या किस तरह से की जाती है और क्या इसके लिए कोई स्वतंत्र समीक्षा तंत्र स्थापित किया जाता है। विपक्ष ने संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे को विधानसभा और अदालत — दोनों मंचों पर उठाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

दूसरी तरफ 'हिंसक संगठन' की परिभाषा इतनी व्यापक छोड़ी गई है कि इसकी व्याख्या पर विवाद अनिवार्य है। असली चिंता यह है कि ऐसे मामलों में तय करने का अधिकार किसे होगा — और क्या इसके लिए कोई स्वतंत्र अपीलीय तंत्र होगा। भर्ती प्रक्रिया को तेज़ करने के प्रावधान स्वागतयोग्य हैं, लेकिन अनंतिम नियुक्ति के बाद रद्दीकरण का खतरा उम्मीदवारों में अनिश्चितता बढ़ा सकता है। विरोध-आंदोलनों की गर्म राजनीतिक पृष्ठभूमि में यह नियम न्यायिक समीक्षा का सामना करेगा — और वहीं इसकी असली परीक्षा होगी।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपी के नए चरित्र सत्यापन नियमों के तहत कौन अयोग्य होगा?
ऐसे उम्मीदवार अयोग्य होंगे जो हिंसा के ज़रिये मौजूदा सामाजिक व्यवस्था बदलने के घोषित उद्देश्य वाले संगठनों के सदस्य हैं। केवल राजनीतिक विचारधारा रखने से कोई उम्मीदवार अयोग्य नहीं होगा।
क्या एफआईआर दर्ज होने से सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी?
नहीं। नई नीति के अनुसार एफआईआर दर्ज होने या जाँच लंबित रहने मात्र से कोई उम्मीदवार स्वतः अयोग्य नहीं होगा। अदालत से बरी हुए या किशोर न्याय कानूनों के दायरे में आने वाले उम्मीदवारों को भी स्वतः अयोग्य नहीं माना जाएगा।
अनंतिम नियुक्ति पत्र की व्यवस्था क्या है?
सत्यापन रिपोर्ट आने का इंतज़ार किए बिना उम्मीदवारों से आवश्यक दस्तावेज़ और स्व-घोषणा पत्र लेकर अनंतिम नियुक्ति पत्र जारी किया जा सकेगा। यदि बाद में सत्यापन में कोई उम्मीदवार अयोग्य पाया गया या गलत जानकारी दी, तो नियुक्ति तत्काल रद्द होगी।
सत्यापन रिपोर्ट देने के लिए पुलिस को कितना समय मिलेगा?
नए निर्देशों के तहत पुलिस को 30 दिनों के भीतर चरित्र सत्यापन रिपोर्ट सौंपनी होगी, ताकि भर्ती प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो।
विपक्ष ने इस आदेश की आलोचना क्यों की है?
समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने इस आदेश की आलोचना की है। आलोचकों का कहना है कि 'हिंसक गतिविधि' की परिभाषा अस्पष्ट है और इसका इस्तेमाल शांतिपूर्ण असहमति या विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने वाले युवाओं के खिलाफ किया जा सकता है। यह विवाद हाल ही में एक प्रदर्शन के दौरान 'सत्ता परिवर्तन' की माँग से जुड़े विवाद की पृष्ठभूमि में उभरा है।
राष्ट्र प्रेस
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