रामलला चढ़ावा विवाद: यूपी विधानसभा में सपा का हंगामा, कार्यवाही 12:20 बजे तक स्थगित
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार, 4 अगस्त को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने अयोध्या रामलला चढ़ावा विवाद पर चर्चा की मांग को लेकर जोरदार हंगामा किया। समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायकों के लगातार शोरगुल के बीच विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12:20 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
मुख्य घटनाक्रम
नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने नियम 311 के तहत रामलला चढ़ावा विवाद पर तत्काल चर्चा कराने की मांग रखी। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने इसे खारिज करते हुए कहा कि यह मामला तात्कालिक प्रकृति का नहीं है, इसलिए उक्त नियम के तहत चर्चा की अनुमति नहीं दी जा सकती। अध्यक्ष के इस जवाब से असंतुष्ट सपा विधायक अपनी सीटों से उठ खड़े हुए और 'चंदा चोर, चढ़ावा चोर' के नारे लगाने लगे।
इससे पहले सपा समेत विपक्षी दलों के विधायक चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा के सामने एकत्र हुए और हाथों में तख्तियाँ लेकर विधानसभा परिसर पहुँचे। इन तख्तियों पर रामलला चढ़ावा विवाद के अलावा शिक्षक भर्ती में आरक्षण, नीट पेपर लीक और अन्य जनसरोकार के मुद्दे भी अंकित थे।
सरकार की प्रतिक्रिया
हंगामे के दौरान वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने विपक्ष पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने कारसेवकों पर गोलियाँ चलवाईं, उनका आस्था से कोई संबंध नहीं हो सकता। खन्ना ने यह भी कहा कि समाजवादी पार्टी ने राम मंदिर निर्माण में बाधाएँ खड़ी कीं और सर्वोच्च न्यायालय में भी मंदिर निर्माण के विरोध में वकील उतारे।
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि रामलला चढ़ावा मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए सदन में इस पर चर्चा संभव नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार ने इस मामले की जाँच के लिए विशेष जाँच दल (एसआईटी) का गठन किया है और दोषियों को जेल भेजा जा चुका है।
शिवपाल का अनुपूरक बजट पर हमला
सपा के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में राज्य सरकार के वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जो सरकार अपना मूल बजट ही 30 से 50 प्रतिशत तक खर्च नहीं कर पाई, वह अनुपूरक बजट के नाम पर अपनी नाकामी छिपाने की कोशिश कर रही है।
शिवपाल ने यह भी तर्क दिया कि जब रामलला के दरबार के चढ़ावे में कथित गड़बड़ियों पर जवाबदेही तय नहीं हो सकी, तो प्रदेश के खजाने के प्रबंधन पर जनता कैसे भरोसा करेगी। उनके अनुसार उत्तर प्रदेश को अनुपूरक बजट की नहीं, बल्कि ईमानदार नीयत और बेहतर वित्तीय प्रबंधन की आवश्यकता है।
अनुपूरक बजट की पृष्ठभूमि
राज्य सरकार ने मंगलवार को विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 का पहला अनुपूरक बजट पेश किया। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि इस बजट का उद्देश्य चल रही विकास योजनाओं को पूरा करना और जनहित के उन कार्यों को गति देना है जिनके लिए अतिरिक्त धन की आवश्यकता है। गौरतलब है कि यह हंगामा ऐसे समय में हुआ जब सदन के समक्ष वित्तीय एजेंडा प्राथमिकता में था।
आगे क्या
रामलला चढ़ावा विवाद का मामला सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है और एसआईटी जाँच जारी है। विपक्ष के तेवर देखते हुए मानसून सत्र के शेष दिनों में भी सदन में तीखी नोकझोंक की संभावना बनी हुई है।