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क्या उपराष्ट्रपति ने जगद्गुरु शंकराचार्य श्री विधुशेखर भारती सन्निधानम के नागरिक सम्मान समारोह को संबोधित किया?

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क्या उपराष्ट्रपति ने जगद्गुरु शंकराचार्य श्री विधुशेखर भारती सन्निधानम के नागरिक सम्मान समारोह को संबोधित किया?

सारांश

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने जगद्गुरु शंकराचार्य श्री श्री विधुशेखर भारती सन्निधानम के नागरिक सम्मान समारोह में भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं के संरक्षण पर बल दिया। समारोह का आयोजन इंडिया फाउंडेशन द्वारा किया गया, जिसमें उन्होंने अद्वैत वेदांत की महत्वपूर्णता पर प्रकाश डाला।

मुख्य बातें

उपराष्ट्रपति का संबोधन भारतीय संस्कृति के संरक्षण पर केंद्रित था।
श्रृंगेरी मठ की परंपराओं को सजीव रखने की आवश्यकता है।
वसुधैव कुटुम्बकम का आदर्श महत्वपूर्ण है।
भारतीय संस्कृति की अद्वितीयता को समझना आवश्यक है।
धर्म और संस्कृति का सामाजिक समरसता में योगदान है।

नई दिल्ली, २५ नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने सोमवार को नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दक्षिणाम्नाय श्रृंगेरी शारदा पीठम के जगद्गुरु शंकराचार्य श्री श्री विधुशेखर भारती सन्निधानम के नागरिक सम्मान समारोह को संबोधित किया।

उपराष्ट्रपति ने अपने भाषण में इस बात पर जोर दिया कि स्वामीजी जगद्गुरु श्री आदि शंकराचार्य की अखंड आध्यात्मिक परंपरा के उत्तराधिकारी हैं, जो श्रृंगेरी स्थित श्रद्धेय दक्षिणाम्नाय श्री शारदा पीठम से अद्वैत वेदांत की उज्ज्वल परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।

उपराष्ट्रपति ने बताया कि कैसे इस पूजनीय दार्शनिक-संत ने पूरे भारत की यात्रा की, सनातन धर्म को पुनर्जीवित किया और विभिन्न दार्शनिक धाराओं को एकीकृत किया, साथ ही श्रृंगेरी में चार आम्नाय पीठों में से प्रथम की स्थापना की। उन्होंने कहा कि बारह शताब्दियों से भी अधिक समय से श्रृंगेरी मठ ने करुणा और निस्वार्थता के मूल्यों को बनाए रखा है और हिंदू विचार और व्यवहार को आकार दिया है।

उन्होंने आगे कहा कि श्रृंगेरी मठ ने वेदों और शास्त्रों के गहन अध्ययन, संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने, शास्त्रीय कलाओं को संजोने और विद्वानों, आचार्यों और साधकों की पीढ़ियों को प्रशिक्षित करने जैसे अमूल्य परंपराओं को संरक्षित किया है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि इन पीठों ने विविध पृष्ठभूमि के लोगों का स्वागत करके, वसुधैव कुटुम्बकम ('विश्व एक परिवार है') के वैदिक आदर्श को मूर्त रूप दिया है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि इंडिया फाउंडेशन द्वारा इस प्रवचन के लिए चुना गया विषय अत्यंत प्रासंगिक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सनातन धर्म सिखाता है कि मानवता की सेवा ही ईश्वर की सेवा है, और मठ, मंदिर, आश्रम और पीठ भारतीय संस्कृति की जीवंत प्राणशक्ति हैं, जो धर्म की रक्षा करते हैं, प्राचीन ज्ञान प्रणालियों का पोषण करते हैं, समाज की सेवा करते हैं और सभी धर्मों के बीच सद्भाव को बढ़ावा देते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत की परंपराएं और रीति-रिवाज हमेशा संतुलन पर केंद्रित रहे हैं और भारत अपने अद्वितीय सभ्यतागत चरित्र के साथ कई धर्मों का जन्मस्थान रहा है, साथ ही इसने अपनी धरती पर शरण लेने वाली हर परंपरा को अपनाया है।

इंडिया फाउंडेशन ने नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में 'हिंदू धार्मिक संस्थाएं: परंपराएं, रीति-रिवाज और अंतर-धार्मिक जुड़ाव' विषय पर दक्षिणाम्नाय श्रृंगेरी शारदा पीठम के जगद्गुरु शंकराचार्य श्री श्री विधुशेखर भारती सन्निधानम के नागरिक सम्मान समारोह और आध्यात्मिक प्रवचन का आयोजन किया था।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो देश में सद्भाव और सहिष्णुता को बढ़ावा देता है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उपराष्ट्रपति का संबोधन किस विषय पर था?
उपराष्ट्रपति का संबोधन भारतीय संस्कृति और जगद्गुरु शंकराचार्य की आध्यात्मिक परंपराओं के संरक्षण पर था।
इस समारोह का आयोजन कहाँ हुआ था?
यह समारोह नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित किया गया था।
उपराष्ट्रपति ने किस धार्मिक परंपरा का उल्लेख किया?
उपराष्ट्रपति ने अद्वैत वेदांत की परंपरा का उल्लेख किया।
इस कार्यक्रम का महत्व क्या है?
यह कार्यक्रम भारतीय संस्कृति और धार्मिक एकता को प्रोत्साहित करता है।
इंडिया फाउंडेशन का इस कार्यक्रम में क्या योगदान था?
इंडिया फाउंडेशन ने इस कार्यक्रम का आयोजन किया और महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की।
राष्ट्र प्रेस
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