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उषा देवी की आत्मनिर्भरता की कहानी: NRLM और स्वयं सहायता समूह ने बदली गोरखपुर की 130 महिलाओं की जिंदगी

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उषा देवी की आत्मनिर्भरता की कहानी: NRLM और स्वयं सहायता समूह ने बदली गोरखपुर की 130 महिलाओं की जिंदगी

सारांश

गोरखपुर के नाहरपुर गांव की उषा देवी की कहानी महज एक व्यक्तिगत सफलता नहीं — यह NRLM की उस शक्ति का प्रमाण है जो ₹1.50 लाख के एक ऋण को 130 महिलाओं के आर्थिक पुनर्जागरण में बदल देती है।

मुख्य बातें

उषा देवी , नाहरपुर गांव, चरगांवा ब्लॉक, गोरखपुर — NRLM के तहत स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं और आत्मनिर्भर बनीं।
जुलाई 2022 में स्वयं सहायता समूह के माध्यम से ₹1.50 लाख का ऋण मिला, जिससे किराने की दुकान का विस्तार हुआ।
उषा देवी अब समूह सखी के रूप में 9 स्वयं सहायता समूहों का नेतृत्व कर रही हैं।
इन समूहों से जुड़ी लगभग 130 महिलाएं बकरी पालन, सिलाई, कढ़ाई और छोटे व्यापार से आय अर्जित कर रही हैं।
NRLM का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को बचत, ऋण, प्रशिक्षण और स्वरोजगार के अवसर देकर आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।

गोरखपुर के चरगांवा ब्लॉक के नाहरपुर गांव की उषा देवी आज उन हजारों ग्रामीण महिलाओं की प्रतीक बन चुकी हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) और स्वयं सहायता समूहों के जरिए आर्थिक स्वावलंबन की राह पकड़ी। करीब चार वर्ष पहले जो परिवार रोज़मर्रा के खर्चों के लिए जूझता था, वह आज एक सफल किराने की दुकान और 9 सक्रिय स्वयं सहायता समूहों के नेतृत्व के बल पर खड़ा है।

कैसे शुरू हुई बदलाव की यात्रा

उषा देवी के अनुसार, लगभग चार वर्ष पहले उनके घर की आर्थिक स्थिति बेहद कमज़ोर थी और आय का कोई स्थायी साधन नहीं था। पड़ोसी गांव की महिलाओं से स्वयं सहायता समूह की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने इस अवसर को थामा और समूह से जुड़ गईं। समूह ने उन्हें बचत, बैंकिंग और स्वरोजगार की बारीकियाँ सिखाईं, जिससे उनका आत्मविश्वास कई गुना बढ़ा।

₹1.50 लाख के ऋण ने पलटी किस्मत

जुलाई 2022 में उषा देवी को स्वयं सहायता समूह के माध्यम से ₹1.50 लाख का ऋण प्राप्त हुआ। इस राशि से उन्होंने अपनी किराने की दुकान को सुदृढ़ किया और व्यवसाय का विस्तार किया। आज यह दुकान न केवल गांव की ज़रूरतें पूरी करती है, बल्कि परिवार की नियमित आय का मुख्य स्रोत भी बन चुकी है। पिछले चार वर्षों में उनकी मेहनत ने परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार किया है।

समूह सखी बनकर 130 महिलाओं को दी नई दिशा

उषा देवी अब समूह सखी के रूप में भी कार्यरत हैं। उनके नेतृत्व में 9 स्वयं सहायता समूह संचालित हो रहे हैं, जिनसे लगभग 130 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इन महिलाओं ने बकरी पालन, गाय पालन, मुर्गी पालन, सिलाई, कढ़ाई और छोटे व्यापार जैसे विविध स्वरोजगार अपनाए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश सरकार ग्रामीण महिला सशक्तिकरण को अपनी प्राथमिकताओं में रख रही है।

NRLM की भूमिका और व्यापक प्रभाव

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) का मूल उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को संगठित कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों के ज़रिए बचत, ऋण, प्रशिक्षण और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं। उषा देवी का कहना है कि इन योजनाओं ने महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता नहीं दी, बल्कि आत्मनिर्भर बनने का आत्मविश्वास भी दिया — 'पहले जो महिलाएं घर की चारदीवारी तक सीमित थीं, वे आज परिवार की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।'

आगे की राह

उषा देवी का मानना है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर महिलाएं किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकती हैं। नाहरपुर गांव की यह कहानी उत्तर प्रदेश के उन अनगिनत गांवों के लिए एक मॉडल बन सकती है, जहाँ NRLM अभी अपनी पहुँच बढ़ा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक बड़े सवाल को भी सामने रखती है — NRLM जैसी योजनाओं की सफलता अक्सर व्यक्तिगत उद्यमशीलता पर टिकी होती है, न कि संरचनागत बदलाव पर। जब एक समूह सखी 130 महिलाओं को संभाल रही है, तो यह क्षमता की सीमा भी दर्शाता है। असली प्रश्न यह है कि क्या ये समूह बाज़ार से जुड़ाव, उचित मूल्य और दीर्घकालिक ऋण तक पहुँच सुनिश्चित कर पा रहे हैं — या केवल आत्मनिर्भरता की भावना तक सीमित हैं।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उषा देवी को स्वयं सहायता समूह से कितना ऋण मिला और उन्होंने उसका उपयोग कैसे किया?
जुलाई 2022 में उषा देवी को स्वयं सहायता समूह के माध्यम से ₹1.50 लाख का ऋण मिला। इस राशि से उन्होंने अपनी किराने की दुकान को सुदृढ़ किया और व्यवसाय का विस्तार किया, जो अब परिवार की नियमित आय का स्रोत है।
NRLM (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन) क्या है और यह महिलाओं की कैसे मदद करता है?
NRLM एक केंद्र सरकार की योजना है जो ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर बचत, ऋण, प्रशिक्षण और स्वरोजगार के अवसर प्रदान करती है। इसका लक्ष्य ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाना है।
उषा देवी के नेतृत्व में कितने स्वयं सहायता समूह काम कर रहे हैं?
उषा देवी समूह सखी के रूप में 9 स्वयं सहायता समूहों का नेतृत्व कर रही हैं, जिनसे लगभग 130 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। ये महिलाएं बकरी पालन, गाय पालन, मुर्गी पालन, सिलाई और कढ़ाई जैसे विविध स्वरोजगार कर रही हैं।
स्वयं सहायता समूह से जुड़ने पर महिलाओं को क्या-क्या लाभ मिलते हैं?
स्वयं सहायता समूह से जुड़ने पर महिलाओं को बचत की आदत, बैंकिंग सुविधाएं, कम ब्याज पर ऋण और स्वरोजगार प्रशिक्षण मिलता है। इससे न केवल आर्थिक सुधार होता है, बल्कि सामाजिक पहचान और आत्मविश्वास भी बढ़ता है।
नाहरपुर गांव की महिलाएं किन स्वरोजगार गतिविधियों से जुड़ी हैं?
नाहरपुर गांव और आसपास के क्षेत्र की महिलाएं बकरी पालन, गाय पालन, मुर्गी पालन, सिलाई, कढ़ाई और छोटे व्यापार जैसी विविध आजीविका गतिविधियों से जुड़ी हैं। ये सभी गतिविधियां NRLM के स्वयं सहायता समूह ढांचे के तहत संचालित हो रही हैं।
राष्ट्र प्रेस
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