अनीता देवी की प्रेरणादायक कहानी: 4,400 महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर

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अनीता देवी की प्रेरणादायक कहानी: 4,400 महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर

सारांश

अनीता देवी, जो कभी आर्थिक तंगी का सामना कर रही थीं, अब 4,400 महिलाओं के समूह की अध्यक्ष हैं। जानिए कैसे उन्होंने जीवन में बदलाव लाया।

Key Takeaways

  • अनीता देवी ने अपनी मेहनत और समूह के सहयोग से आत्मनिर्भरता प्राप्त की।
  • 4,400 महिलाओं का समूह आर्थिक रूप से सशक्त बना है।
  • योगी सरकार की योजनाएं महिलाओं को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
  • सामुदायिक निवेश निधि ने अनीता के व्यवसाय को मजबूती प्रदान की।
  • महिलाओं को समूह से जुड़ने के लिए प्रेरित करना महत्वपूर्ण है।

लखनऊ, 24 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के गजरौला विकास खंड के सलेमपुर गोसाईं गांव की अनीता देवी अब उन हजारों महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं, जो कभी आर्थिक संकट और सीमित संसाधनों के कारण अपनी आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर पाती थीं। पहले, वे अपने पति के साथ मजदूरी कर किसी तरह अपने परिवार का गुजारा करती थीं। जीवन में स्थिर आय का कोई साधन नहीं था और हर दिन संघर्ष से भरा होता था।

लेकिन आज वही अनीता 'लखपति दीदी' के नाम से जानी जाती हैं, जो अपनी मेहनत से लाखों की वार्षिक आय कमा रही हैं। उनके समूह में शामिल 4,400 महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन गई हैं। सरकार द्वारा संचालित राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ने अनीता देवी के जीवन में एक अद्भुत परिवर्तन लाया है। आज वह अपने समूह की अध्यक्ष हैं।

शक्ति स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद अनीता को न केवल वित्तीय सहायता मिली, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास, प्रशिक्षण और आगे बढ़ने का अवसर भी प्राप्त हुआ। योगी सरकार के सहयोग से वर्ष 2021 में उन्हें सामुदायिक निवेश निधि के तहत 1,10,000 रुपए प्राप्त हुए, जिसने उनके व्यवसाय को सुदृढ़ किया। इसके बाद, उन्हें वर्ष 2023 में समूह के माध्यम से 15 हजार रिवॉल्विंग फंड मिला। वर्ष 2024 में 3,00,000 सीसीएल और 2025 में 4,00,000 सीसीएल प्राप्त हुआ। आज समूह के सहयोग से अनीता ने साबित कर दिया है कि यदि सही मार्गदर्शन और अवसर मिले, तो कोई भी महिला अपने जीवन को बदल सकती है।

अनीता ने आज सलेमपुर में 27 समूह स्थापित किए हैं। उन्होंने सिलाई के कार्य की शुरुआत अपने घर से की और धीरे-धीरे इसे व्यवसाय में परिणत किया। कोरोना काल में उनके समूह ने मिलकर मास्क और उससे संबंधित कई उत्पाद बनाए। उनकी मेहनत रंग लाई और आज उनकी आमदनी में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है। दिसंबर 2023 में, उन्होंने 'शक्ति ट्रेडर्स' के नाम से एक किराना दुकान खोली, जिसे उनके पति और बेटा मिलकर चलाते हैं। इससे उनकी आय के नए स्रोत उत्पन्न हुए।

वर्तमान में, उनकी मासिक आय 40,000 से 45,000 रुपए तक हो जाती है। यह सफलता केवल उनके परिश्रम का परिणाम नहीं है, बल्कि यह इस बात का उदाहरण भी है कि योगी सरकार की योजनाएं कैसे जमीनी स्तर पर महिलाओं को सशक्त बना रही हैं। आज अनीता न केवल अपने परिवार का सहारा बन गई हैं, बल्कि पूरे गांव के लिए प्रेरणा का स्रोत भी हैं।

इसके अलावा, जब भी समय मिलता है, वह अपने घर से कॉस्मेटिक उत्पाद भी बेचने का कार्य करती हैं। उन्होंने मेहनत से यह साबित किया है कि आत्मनिर्भरता से ही सच्चा सम्मान मिलता है। अब वह अन्य महिलाओं को भी समूह से जुड़ने के लिए प्रेरित करती हैं, ताकि वे भी अपने पैरों पर खड़ी हो सकें।

अनीता इसके लिए योगी सरकार का धन्यवाद करती हैं। उनका कहना है कि समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में बहुत बड़ा बदलाव आया है। अब उनके परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से बहुत बेहतर हुई है। अनीता की यह कहानी केवल एक महिला की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस बदलाव की कहानी है, जो सरकारी योजनाओं, सामूहिक प्रयास और मजबूत इच्छाशक्ति से संभव हुई है।

Point of View

बल्कि यह दर्शाती है कि सरकारी योजनाएं और सामूहिक प्रयास कैसे महिलाओं को सशक्त बनाते हैं। अनीता का अनुभव इस बात की पुष्टि करता है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर कोई भी महिला अपने जीवन को बदल सकती है।
NationPress
25/03/2026

Frequently Asked Questions

अनीता देवी का संघर्ष किस प्रकार का था?
अनीता देवी ने आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के कारण कठिनाइयों का सामना किया।
अनीता देवी ने आत्मनिर्भरता कैसे हासिल की?
उन्होंने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता प्राप्त की।
क्या अनीता देवी का समूह सफल है?
जी हां, अनीता देवी के समूह में 4,400 महिलाएं शामिल हैं जो आत्मनिर्भर बन चुकी हैं।
योगी सरकार का योगदान क्या था?
योगी सरकार ने अनीता को सामुदायिक निवेश निधि के माध्यम से वित्तीय सहायता प्रदान की।
अनीता देवी की मासिक आय कितनी है?
अनीता देवी की मासिक आय 40,000 से 45,000 रुपए है।
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