बद्रीनाथ धाम: 40 दिनों में 8 लाख श्रद्धालु पहुंचे, उत्तराखंड पुलिस की सेवा-व्यवस्था की सराहना
सारांश
मुख्य बातें
चमोली स्थित बद्रीनाथ धाम में इस वर्ष तीर्थयात्रियों की अभूतपूर्व आमद के बीच उत्तराखंड पुलिस और जिला प्रशासन ‘सेवा, सुरक्षा और सुविधा’ के आदर्श वाक्य के तहत श्रद्धालुओं की सहायता में जुटे हैं। मंदिर के कपाट खुलने के महज 40 दिनों के भीतर ही दर्शनार्थियों की संख्या 8 लाख के आँकड़े को पार कर गई है, जिसके बाद भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को नई प्रणाली से सुदृढ़ किया गया है।
मुख्य घटनाक्रम
पुलिसकर्मी कतार प्रबंधन, सुरक्षा जाँच और आपात सहायता के माध्यम से तीर्थयात्रियों को सुगम ‘दर्शन’ अनुभव उपलब्ध करा रहे हैं। अधिकारियों ने दोहराया कि उनका लक्ष्य प्रत्येक भक्त की आध्यात्मिक यात्रा को सुरक्षित और यादगार बनाना है।
श्रद्धालुओं की प्रतिक्रिया
दुबई से आए एक श्रद्धालु ने कहा, ‘हम यहाँ दुबई से आए हैं और यहाँ की व्यवस्थाएं बहुत ही बेहतरीन हैं। सुरक्षा के उपाय और कतार प्रबंधन बहुत ही व्यवस्थित ढंग से किए गए हैं। हम पुलिसकर्मियों के प्रयासों की सचमुच सराहना करते हैं। पूरे भारत और दुनिया भर के लोगों को बद्रीनाथ अवश्य आना चाहिए।’
मध्य प्रदेश से आए एक अन्य तीर्थयात्री ने कहा, ‘हम भगवान बद्रीनाथ के दर्शन के लिए आए हैं और यहाँ की व्यवस्थाएँ बहुत अच्छी हैं। हम उत्तराखंड प्रशासन को भक्तों के लिए एक आरामदायक अनुभव सुनिश्चित करने हेतु धन्यवाद देना चाहेंगे।’ एक तीसरे श्रद्धालु ने बताया कि यात्रा के दौरान उनकी पत्नी अस्वस्थ हो गई थीं, परंतु सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत सहायता उपलब्ध कराई।
VIP दर्शन के लिए नई योगदान-आधारित प्रणाली
बढ़ती भीड़ को देखते हुए श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने प्रोटोकॉल और VIP ‘दर्शन’ के लिए योगदान-आधारित प्रणाली शुरू की है। मंदिर परिसर के पास बाधाओं को कम करने के लिए स्थानीय पुलिस थाने के निकट स्थित नीलकंठ रेस्ट हाउस में एक विशेष VIP कार्यालय स्थापित किया गया है, जहाँ से प्रवेश से पूर्व पास प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
संशोधित व्यवस्था के तहत राज्य सरकार से प्राप्त लिखित सिफारिशों के आधार पर जिला प्रशासन और मंदिर समिति द्वारा प्रोटोकॉल स्लिप जारी की जाएगी। प्रोटोकॉल ‘दर्शन’ के लिए प्रति व्यक्ति ₹1,100 का योगदान लिया जाएगा, जिसकी आधिकारिक रसीद मंदिर समिति द्वारा दी जाएगी। यह व्यवस्था मौजूदा मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत लागू की गई है।
बद्रीनाथ धाम का धार्मिक महत्व
चमोली जिले में अलकनंदा नदी के तट पर हिमालय की गोद में स्थित बद्रीनाथ मंदिर, जिसे बद्रीनारायण या बद्री विशाल भी कहा जाता है, हिंदू धर्म के सर्वाधिक पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है। यह ‘चार धाम’ में शामिल है और भगवान विष्णु के 108 ‘दिव्य देशमों’ में गिना जाता है। माना जाता है कि इस मंदिर की पुनः स्थापना 9वीं शताब्दी में संत आदि शंकराचार्य द्वारा की गई थी। मंदिर में स्थापित भगवान विष्णु की एक मीटर ऊँची काले पत्थर की मूर्ति को आठ ‘स्वयं व्यक्त क्षेत्रों’ में से एक माना जाता है। निकट स्थित प्राकृतिक गर्म जल कुंड ‘तप्त कुंड’ भी प्रमुख आकर्षण है।
क्या होगा आगे
मंदिर मई से नवंबर तक श्रद्धालुओं के लिए खुला रहता है, और जून-सितंबर के बीच ‘बद्री-केदार उत्सव’ तथा ‘माता मूर्ति का मेला’ जैसे आयोजन तीर्थ अनुभव को और समृद्ध करते हैं। पुलिस-प्रशासन ने संकेत दिया है कि शेष यात्रा सीज़न में भीड़ बढ़ने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा बल और चिकित्सा सहायता टीमों की तैनाती को और सघन किया जाएगा।