29 सितंबर 2026
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कालिंदी पास रेस्क्यू पूरा: उत्तरकाशी में सभी 19 ट्रेकर्स-पोर्टर्स सुरक्षित, दो दिन चला हेलीकॉप्टर अभियान

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कालिंदी पास रेस्क्यू पूरा: उत्तरकाशी में सभी 19 ट्रेकर्स-पोर्टर्स सुरक्षित, दो दिन चला हेलीकॉप्टर अभियान

सारांश

उत्तरकाशी प्रशासन ने दो दिन के हेलीकॉप्टर अभियान में 5,900 मीटर से अधिक ऊँचे कालिंदी पास से सभी 19 ट्रेकर्स और पोर्टर्स को सुरक्षित निकाल लिया। प्रतिकूल मौसम और ऑक्सीजन की कमी के बावजूद सभी बचाए गए लोगों का स्वास्थ्य सामान्य पाया गया।

मुख्य बातें

29 सितंबर 2026 को कालिंदी पास रेस्क्यू अभियान सफलतापूर्वक समाप्त घोषित किया गया।
कुल 19 ट्रेकर्स और पोर्टर्स को दो दिन के हेलीकॉप्टर अभियान में सुरक्षित निकाला गया।
28 सितंबर को 11 और 29 सितंबर को 8 लोगों को हर्षिल हेलीपैड पर उतारा गया।
अभियान जिला मजिस्ट्रेट प्रशांत आर्य की देखरेख और अपर जिलाधिकारी मुक्ता मिश्रा की उपस्थिति में संचालित हुआ।
सभी बचाए गए लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया और स्वास्थ्य सामान्य पाया गया।
कालिंदी पास 5,900 मीटर से अधिक ऊँचाई पर स्थित है और गंगोत्री को बद्रीनाथ से जोड़ता है।

उत्तराखंड के उच्च हिमालयी दर्रे कालिंदी पास में फँसे 19 ट्रेकर्स और पोर्टर्स को 29 सितंबर 2026 को सुरक्षित निकाल लिया गया, जिसके साथ ही उत्तरकाशी जिला प्रशासन द्वारा चलाया गया दो दिवसीय हेलीकॉप्टर रेस्क्यू अभियान सफलतापूर्वक समाप्त घोषित कर दिया गया। जिला मजिस्ट्रेट प्रशांत आर्य की देखरेख में संचालित इस अभियान में सभी बचाए गए लोगों को हर्षिल हेलीपैड पर उतारा गया और उनका स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया।

दो दिन में कैसे हुआ रेस्क्यू

जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) उत्तरकाशी के अनुसार, अभियान 28 सितंबर को शुरू हुआ, जब पहले दिन हेलीकॉप्टर की सहायता से 11 ट्रेकर्स और पोर्टर्स को हर्षिल हेलीपैड तक सुरक्षित पहुँचाया गया। 29 सितंबर को दूसरे दिन पहले चार और फिर चार और लोगों को निकाला गया, जिससे कुल संख्या 19 हो गई।

हर्षिल हेलीपैड पर अपर जिलाधिकारी मुक्ता मिश्रा की उपस्थिति में रेस्क्यू दल के सदस्यों और हेलीकॉप्टर पायलट ने मिलकर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की। सभी टीमों ने परस्पर समन्वय के साथ निर्धारित योजना के अनुसार अभियान को व्यवस्थित और सुरक्षित ढंग से अंजाम दिया।

मौसम और ऊँचाई की चुनौतियाँ

कालिंदी पास समुद्र तल से 5,900 मीटर से अधिक की ऊँचाई पर स्थित है और उत्तराखंड के सर्वाधिक कठिन एवं खतरनाक ट्रैकिंग मार्गों में गिना जाता है। यह दर्रा गंगोत्री को बद्रीनाथ से जोड़ता है। इस क्षेत्र में मौसम अत्यंत अनिश्चित रहता है और ऑक्सीजन की कमी के कारण ट्रेकर्स को गंभीर शारीरिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

प्रतिकूल मौसम और अत्यधिक ऊँचाई के बावजूद हेलीकॉप्टर के ज़रिए एक-एक कर सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। रेस्क्यू एजेंसियाँ हर्षिल हेलीपैड पर पूरे अभियान के दौरान लगातार तैनात रहीं।

बचाए गए लोगों का स्वास्थ्य

हर्षिल पहुँचाए गए सभी 15 लोगों का प्रारंभिक स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया और सभी का स्वास्थ्य सामान्य पाया गया। शेष चार लोगों को भी बाद में सुरक्षित निकाल लिया गया। अधिकारियों के अनुसार किसी के भी गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं है।

क्या होगा आगे

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तराखंड के उच्च हिमालयी ट्रैक पर मानसून के बाद के मौसम में ट्रेकिंग गतिविधियाँ बढ़ जाती हैं और प्रशासन को बार-बार ऐसे रेस्क्यू अभियान चलाने पड़ते हैं। गौरतलब है कि कालिंदी पास जैसे अत्यधिक ऊँचाई वाले दर्रों पर ट्रेकिंग के लिए विशेष अनुमति और तैयारी अनिवार्य मानी जाती है। अधिकारियों ने ट्रेकर्स से अपील की है कि वे ऐसे दुर्गम क्षेत्रों में यात्रा से पहले उचित पंजीकरण और सुरक्षा उपाय अवश्य सुनिश्चित करें।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो अक्सर अनदेखे रह जाते हैं। पंजीकरण और सुरक्षा प्रोटोकॉल की अनिवार्यता कागज़ों पर तो है, लेकिन ज़मीन पर उसका पालन सुनिश्चित करने की प्रणाली अभी भी कमज़ोर है। जब तक उच्च हिमालयी ट्रैकिंग के लिए सख्त सत्यापन तंत्र नहीं बनता, ऐसे अभियान नियमित होते रहेंगे।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कालिंदी पास रेस्क्यू ऑपरेशन में कितने लोगों को बचाया गया?
कालिंदी पास रेस्क्यू अभियान में कुल 19 ट्रेकर्स और पोर्टर्स को सुरक्षित निकाला गया। यह अभियान 28 और 29 सितंबर 2026 को हेलीकॉप्टर की सहायता से दो दिन में पूरा किया गया।
कालिंदी पास कहाँ स्थित है और यह क्यों खतरनाक है?
कालिंदी पास उत्तराखंड में समुद्र तल से 5,900 मीटर से अधिक ऊँचाई पर स्थित है और गंगोत्री को बद्रीनाथ से जोड़ता है। यहाँ मौसम अत्यंत अनिश्चित रहता है और ऑक्सीजन की कमी के कारण ट्रेकर्स को गंभीर शारीरिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
रेस्क्यू अभियान की देखरेख किसने की?
यह अभियान जिला मजिस्ट्रेट प्रशांत आर्य की देखरेख में चलाया गया। हर्षिल हेलीपैड पर अपर जिलाधिकारी मुक्ता मिश्रा की उपस्थिति में हेलीकॉप्टर पायलट और रेस्क्यू दल ने समन्वय के साथ कार्ययोजना तैयार कर अभियान को अंजाम दिया।
बचाए गए ट्रेकर्स का स्वास्थ्य कैसा है?
हर्षिल हेलीपैड पर पहुँचाए गए सभी बचाए गए लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया और सभी का स्वास्थ्य सामान्य पाया गया। किसी के भी गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं है।
कालिंदी पास ट्रेकिंग के लिए क्या सावधानियाँ ज़रूरी हैं?
कालिंदी पास जैसे दुर्गम और अत्यधिक ऊँचाई वाले मार्गों पर ट्रेकिंग के लिए उचित पंजीकरण और प्रशासनिक अनुमति अनिवार्य है। अधिकारियों ने ट्रेकर्स से आग्रह किया है कि वे यात्रा से पहले सभी आवश्यक सुरक्षा उपाय और तैयारी सुनिश्चित करें।
राष्ट्र प्रेस
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