वंदे मातरम बिल पर हाजी ताहिर उद्दीन का समर्थन: 'संसद का कानून मानना हर नागरिक का फर्ज'
सारांश
मुख्य बातें
प्रस्तावित वंदे मातरम बिल को लेकर देशभर में छिड़ी बहस के बीच आगरा की खुद्दाम-ए-रोजा ताजमहल उर्स कमेटी के अध्यक्ष हाजी ताहिर उद्दीन ताहिर ने 20 जुलाई को इस विधेयक के प्रति खुला समर्थन जताया। उनका कहना है कि किसी भी नागरिक की जिम्मेदारी केवल अपने धर्म की शिक्षाओं तक सीमित नहीं होती — जिस देश में वह रहता है, उस देश के कानूनों का सम्मान करना और उनका पालन करना भी उतना ही आवश्यक है।
हाजी ताहिर का स्पष्ट रुख
हाजी ताहिर उद्दीन ताहिर ने कहा कि वंदे मातरम बिल पर किसी भी नागरिक को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा, 'यदि संसद कोई कानून पारित करती है तो उसका पालन सभी नागरिकों को करना चाहिए।' उनके अनुसार, बिल चाहे जैसा भी हो, उसका स्वागत किया जाना चाहिए क्योंकि किसी विधेयक को पारित करना या न करना सरकार और संसद का संवैधानिक अधिकार है।
इस्लामी शिक्षाओं का हवाला
विशेष रूप से मुस्लिम समाज को संबोधित करते हुए हाजी ताहिर ने कहा कि यदि कोई पैगंबर मुहम्मद की शिक्षाओं का सच्चे अर्थों में अनुसरण करता है, तो इस तरह के कानून का विरोध करने का कोई आधार नहीं बनता। उनके अनुसार, इस्लाम अपने अनुयायियों को यह सिखाता है कि वे अपने धर्म का पालन करने के साथ-साथ उस देश के नियमों और कानूनों का भी सम्मान करें, जहाँ वे निवास करते हैं।
लोकतंत्र और कानून के प्रति दायित्व
हाजी ताहिर ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून का सम्मान सर्वोपरि होता है। उन्होंने कहा कि सभी नागरिकों को संविधान और कानून के दायरे में रहकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना चाहिए। उनके मतानुसार, कानून का पालन करना सामाजिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
व्यापक संदर्भ
यह बयान ऐसे समय में आया है जब वंदे मातरम बिल को लेकर देश के विभिन्न धार्मिक और सामाजिक वर्गों में मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं। गौरतलब है कि आगरा जैसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण शहर से एक प्रमुख मुस्लिम धार्मिक संगठन के प्रमुख का यह समर्थन राष्ट्रीय एकता की दिशा में एक उल्लेखनीय संकेत माना जा रहा है। आने वाले दिनों में संसद में इस विधेयक पर होने वाली चर्चा इसकी दिशा तय करेगी।