21 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

वंदे मातरम बिल पर हाजी ताहिर उद्दीन का समर्थन: 'संसद का कानून मानना हर नागरिक का फर्ज'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
वंदे मातरम बिल पर हाजी ताहिर उद्दीन का समर्थन: 'संसद का कानून मानना हर नागरिक का फर्ज'

सारांश

आगरा की खुद्दाम-ए-रोजा ताजमहल उर्स कमेटी के अध्यक्ष हाजी ताहिर उद्दीन ताहिर ने वंदे मातरम बिल का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि इस्लाम और पैगंबर मुहम्मद की शिक्षाएँ भी देश के कानूनों के सम्मान का संदेश देती हैं — विरोध का कोई आधार नहीं।

मुख्य बातें

हाजी ताहिर उद्दीन ताहिर , अध्यक्ष, खुद्दाम-ए-रोजा ताजमहल उर्स कमेटी, आगरा , ने 20 जुलाई को वंदे मातरम बिल का समर्थन किया।
उनके अनुसार, संसद द्वारा पारित किसी भी कानून का पालन करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि पैगंबर मुहम्मद की शिक्षाएँ भी निवास के देश के नियमों का सम्मान करने का संदेश देती हैं।
हाजी ताहिर ने मुस्लिम समाज से अपील की कि इस विधेयक का विरोध करने का कोई धार्मिक आधार नहीं है।
उन्होंने कानून के पालन को सामाजिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता की बुनियाद बताया।

प्रस्तावित वंदे मातरम बिल को लेकर देशभर में छिड़ी बहस के बीच आगरा की खुद्दाम-ए-रोजा ताजमहल उर्स कमेटी के अध्यक्ष हाजी ताहिर उद्दीन ताहिर ने 20 जुलाई को इस विधेयक के प्रति खुला समर्थन जताया। उनका कहना है कि किसी भी नागरिक की जिम्मेदारी केवल अपने धर्म की शिक्षाओं तक सीमित नहीं होती — जिस देश में वह रहता है, उस देश के कानूनों का सम्मान करना और उनका पालन करना भी उतना ही आवश्यक है।

हाजी ताहिर का स्पष्ट रुख

हाजी ताहिर उद्दीन ताहिर ने कहा कि वंदे मातरम बिल पर किसी भी नागरिक को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा, 'यदि संसद कोई कानून पारित करती है तो उसका पालन सभी नागरिकों को करना चाहिए।' उनके अनुसार, बिल चाहे जैसा भी हो, उसका स्वागत किया जाना चाहिए क्योंकि किसी विधेयक को पारित करना या न करना सरकार और संसद का संवैधानिक अधिकार है।

इस्लामी शिक्षाओं का हवाला

विशेष रूप से मुस्लिम समाज को संबोधित करते हुए हाजी ताहिर ने कहा कि यदि कोई पैगंबर मुहम्मद की शिक्षाओं का सच्चे अर्थों में अनुसरण करता है, तो इस तरह के कानून का विरोध करने का कोई आधार नहीं बनता। उनके अनुसार, इस्लाम अपने अनुयायियों को यह सिखाता है कि वे अपने धर्म का पालन करने के साथ-साथ उस देश के नियमों और कानूनों का भी सम्मान करें, जहाँ वे निवास करते हैं।

लोकतंत्र और कानून के प्रति दायित्व

हाजी ताहिर ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून का सम्मान सर्वोपरि होता है। उन्होंने कहा कि सभी नागरिकों को संविधान और कानून के दायरे में रहकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना चाहिए। उनके मतानुसार, कानून का पालन करना सामाजिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

व्यापक संदर्भ

यह बयान ऐसे समय में आया है जब वंदे मातरम बिल को लेकर देश के विभिन्न धार्मिक और सामाजिक वर्गों में मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं। गौरतलब है कि आगरा जैसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण शहर से एक प्रमुख मुस्लिम धार्मिक संगठन के प्रमुख का यह समर्थन राष्ट्रीय एकता की दिशा में एक उल्लेखनीय संकेत माना जा रहा है। आने वाले दिनों में संसद में इस विधेयक पर होने वाली चर्चा इसकी दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भी ध्यान देने योग्य है कि यह बयान विधेयक की विस्तृत विषयवस्तु पर नहीं, बल्कि कानून-पालन के सामान्य सिद्धांत पर केंद्रित है। असली बहस यह है कि क्या इस विधेयक में नागरिकों के लिए अनिवार्य प्रावधान हैं और वे संविधान के अनुच्छेद 19 व 25 के तहत मौलिक अधिकारों से किस हद तक मेल खाते हैं। एक समुदाय-विशेष के प्रतिनिधि का समर्थन राष्ट्रीय सहमति का प्रमाण नहीं, बल्कि संवाद की शुरुआत हो सकती है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वंदे मातरम बिल क्या है?
वंदे मातरम बिल एक प्रस्तावित विधेयक है जो राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' से संबंधित प्रावधानों को कानूनी रूप देने की दिशा में चर्चा में है। इसके विस्तृत प्रावधान अभी संसद में विचाराधीन हैं।
हाजी ताहिर उद्दीन ताहिर कौन हैं?
हाजी ताहिर उद्दीन ताहिर आगरा स्थित खुद्दाम-ए-रोजा ताजमहल उर्स कमेटी के अध्यक्ष हैं, जो ताजमहल से जुड़े धार्मिक आयोजनों की देखरेख करती है। वे आगरा के एक प्रमुख मुस्लिम धार्मिक व्यक्तित्व माने जाते हैं।
हाजी ताहिर ने वंदे मातरम बिल के समर्थन में क्या तर्क दिए?
उन्होंने कहा कि इस्लाम और पैगंबर मुहम्मद की शिक्षाएँ नागरिकों को अपने देश के कानूनों का सम्मान करने का संदेश देती हैं। उनके अनुसार, संसद द्वारा पारित किसी भी कानून का पालन करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है और इस बिल का विरोध करने का कोई धार्मिक आधार नहीं है।
क्या मुस्लिम समुदाय में वंदे मातरम बिल को लेकर आपत्तियाँ हैं?
देशभर में इस विधेयक को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं। हाजी ताहिर जैसे कुछ धार्मिक नेताओं ने समर्थन जताया है, जबकि अन्य वर्गों में इसके प्रावधानों को लेकर चिंताएँ भी व्यक्त की जा रही हैं।
वंदे मातरम बिल पर आगे क्या होगा?
यह विधेयक अभी संसद में विचाराधीन है। इसके प्रावधानों और पारित होने की समयसीमा पर संसदीय प्रक्रिया के तहत निर्णय लिया जाएगा। देश के विभिन्न वर्गों की प्रतिक्रियाएँ इस बहस को आकार दे रही हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 12 घंटे पहले
  2. 21 घंटे पहले
  3. 3 दिन पहले
  4. 3 दिन पहले
  5. 3 दिन पहले
  6. 3 दिन पहले
  7. 3 दिन पहले
  8. 3 दिन पहले