वंदे मातरम विधेयक पर एसटी हसन का तीखा बयान: 'देश के लिए जान दे सकते हैं, पूजा के लिए मजबूर नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एसटी हसन ने 17 जुलाई को नई दिल्ली में संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले वंदे मातरम से जुड़े संभावित विधेयक पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि देश के लिए प्राण न्योछावर करने को तैयार हैं, लेकिन किसी को धार्मिक आस्था के विरुद्ध जाकर पूजा के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब संसद सत्र से पहले सियासी माहौल गर्म है।
मुख्य बयान और धार्मिक तर्क
हसन ने कहा कि वंदे मातरम को लेकर विवाद नया नहीं है — यह अंग्रेजों के जमाने से चला आ रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुसलमानों ने राष्ट्रगान पढ़ने से कभी इनकार नहीं किया, लेकिन वंदे मातरम में भूमि की पूजा का भाव है, जो इस्लामी मान्यताओं के अनुसार स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा, 'हमारा मानना है कि अल्लाह ने इंसान को सर्वोच्च प्राणी बनाकर भेजा है — हम उन चीजों की इबादत नहीं कर सकते जो इंसान की जिंदगी को सुगम बनाती हैं।'
उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के उस रुख का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि वंदे मातरम गाने के लिए किसी को जबरदस्ती नहीं की जानी चाहिए। हसन ने चेतावनी दी कि यदि इस तरह के दबाव बढ़ते रहे, तो कल इस्लामी पद्धति छोड़कर पूजा करने को भी कहा जा सकता है — जो देश की एकता के लिए उचित नहीं होगा।
सरकार पर विवाद खड़ा करने का आरोप
हसन ने आरोप लगाया कि सरकार मानसून सत्र से पहले अनावश्यक विवाद खड़ा करने की कोशिश कर रही है। उनके अनुसार, जब देश परीक्षा प्रणाली की खामियों, युवाओं की आत्महत्याओं और रोज़गार जैसे असली मुद्दों से जूझ रहा है, तब इस तरह के विधायी प्रस्ताव ध्यान भटकाने का काम करते हैं।
परीक्षा प्रणाली और युवाओं पर चिंता
कॉकरोच पार्टी आंदोलन और सोनम वांगचुक के अनशन पर हसन ने कहा कि यह आंदोलन देश के युवाओं के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है और देश के सभी हितैषी उनके साथ खड़े हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कोई भी परीक्षा सही तरीके से नहीं हो रही और लोग आत्महत्या कर रहे हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों को अपने पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है।
कांवड़ यात्रा पर संतुलित रुख
कांवड़ यात्रा के संदर्भ में हसन ने कहा कि सरकार की यह जिम्मेदारी है कि यात्रा सुचारु रूप से संपन्न हो — न कांवड़ यात्रियों को परेशानी हो और न ही आम नागरिकों को दिक्कत। यह बयान उनके समग्र दृष्टिकोण को दर्शाता है कि धार्मिक आयोजनों में सभी पक्षों के हितों का संतुलन बनाए रखा जाए।
आगे क्या
संसद का मानसून सत्र शुरू होने से पहले वंदे मातरम विधेयक की संभावित प्रस्तुति को लेकर विपक्षी दलों की रणनीति स्पष्ट होती जा रही है। हसन के इस बयान के बाद सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर सदन में तीखी बहस की संभावना बढ़ गई है।