वंदे मातरम विवाद: गहलोत ने राजस्थान सरकार से मांगा आदेश वापस, भाजपा पर साधा निशाना
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 21 अगस्त को राजस्थान की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर तीखा हमला बोला — वंदे मातरम विवाद और स्कूलों में मीडिया प्रवेश पर रोक के शिक्षा विभाग के आदेश को लेकर। गहलोत ने स्पष्ट शब्दों में माँग की कि इस आदेश को तत्काल वापस लिया जाए।
मीडिया प्रतिबंध पर गहलोत की आपत्ति
पत्रकारों से बातचीत में गहलोत ने कहा कि स्कूलों के भीतर किसी भी मीडियाकर्मी के प्रवेश पर पाबंदी लगाना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उनके अनुसार, इस तरह के नियम सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने राज्य सरकार से अपील की कि वह इस आदेश को वापस ले और पारदर्शिता सुनिश्चित करे।
वंदे मातरम के नाम पर राजनीति का आरोप
वंदे मातरम विवाद पर गहलोत ने भाजपा पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि इस राष्ट्रगीत के नाम पर लोगों को गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि भाजपा का वंदे मातरम से वास्तव में क्या संबंध है। गहलोत ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के मुख्यालय पर लंबे समय तक तिरंगा न फहराए जाने का उल्लेख करते हुए भाजपा और संघ की राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति प्रतिबद्धता पर सवाल उठाए।
गहलोत ने दावा किया कि कांग्रेस दशकों से वंदे मातरम गाती रही है और वे स्वयं करीब 50 वर्षों से यह गीत गाते आ रहे हैं। उनके अनुसार, भाजपा के पास इस मुद्दे पर कोई ठोस जवाब नहीं है।
कानून के पालन पर स्पष्ट रुख
गहलोत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई कानून बना है तो उसका पालन होना चाहिए — और कांग्रेस कानून का सम्मान करती है। लेकिन उन्होंने आगाह किया कि कानून के नाम पर जनता को भ्रमित करना स्वीकार्य नहीं है।
विधानसभा के बाहर विपक्षी विरोध का मुद्दा
पूर्व मुख्यमंत्री ने राजस्थान विधानसभा के बाहर विपक्षी विधायकों के विरोध प्रदर्शन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि विधानसभा के गेट विपक्षी विधायकों के लिए न खोला जाना सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। गहलोत ने कहा कि इस स्थिति को देखकर उन्हें व्यक्तिगत रूप से दुख हुआ।
विपक्ष की आवाज़ सुनने की अपील
गहलोत ने राज्य सरकार से आग्रह किया कि राजनीतिक विरोध को दबाने के बजाय विपक्ष की आवाज़ को लोकतांत्रिक तरीके से सुना जाए। उन्होंने वंदे मातरम के मुद्दे को राजनीति से मुक्त रखने और स्कूल आदेश को वापस लेने की एक बार फिर माँग दोहराई। आने वाले दिनों में यह विवाद राजस्थान की राजनीति में और गर्माने की संभावना है।