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नीति आयोग बैठक में CM विष्णुदेव साय का विजन: नक्सल-मुक्त बस्तर बनेगा विकास का मॉडल

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नीति आयोग बैठक में CM विष्णुदेव साय का विजन: नक्सल-मुक्त बस्तर बनेगा विकास का मॉडल

सारांश

नक्सलवाद की छाया से निकलकर बस्तर अब विकास का मॉडल बनने की राह पर है। CM साय ने नीति आयोग में ₹30,000 मासिक आय लक्ष्य, ₹2,000 करोड़ की सिंचाई, 36 लाख डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल और सेमीकंडक्टर इकाइयों का खाका पेश किया — यह छत्तीसगढ़ की सबसे महत्वाकांक्षी रूपांतरण योजना है।

मुख्य बातें

CM विष्णुदेव साय ने 11 जून 2026 को नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक में बस्तर का विकास विजन प्रस्तुत किया।
अगले तीन वर्षों में बस्तर परिवारों की मासिक आय ₹30,000 तक पहुँचाने का लक्ष्य; अभी 85% परिवारों की आय ₹15,000 से कम।
₹2,000 करोड़ से अधिक की दो सिंचाई परियोजनाएँ, 32,000 हेक्टेयर क्षेत्र को लाभ।
लगभग 36 लाख लोगों की डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल और 200 सुरक्षा शिविरों को 'सेवा डेरा' में रूपांतरण।
राज्य में 435 सुधार लागू; सेमीकंडक्टर क्षेत्र की दो आधुनिक इकाइयाँ स्थापित होंगी।
वित्त वर्ष 2025-26 में फरवरी तक ₹761.76 करोड़ का निर्यात, खुशबूदार चावल अग्रणी।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 11 जून 2026 को नई दिल्ली में राष्ट्रपति भवन में आयोजित नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की 11वीं बैठक में नक्सलवाद से उबरते बस्तर की व्यापक विकास योजना देश के सामने रखी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में साय ने स्पष्ट किया कि दशकों तक हिंसा से जूझता रहा बस्तर अब आर्थिक पुनरुत्थान, रोज़गार, शिक्षा, पर्यटन और कृषि-आधारित विकास का राष्ट्रीय मॉडल बनने की ओर अग्रसर है।

मुख्य घटनाक्रम

बैठक में केंद्रीय मंत्री, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल तथा नीति आयोग के उपाध्यक्ष, सदस्य और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री साय ने विकसित भारत-2047 के विजन के अनुरूप छत्तीसगढ़ को एक विकसित राज्य बनाने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा उठाए जा रहे ठोस कदमों की विस्तृत जानकारी दी।

बस्तर की आय और कृषि योजना

मुख्यमंत्री ने बताया कि अगले तीन वर्षों में बस्तर के परिवारों की मासिक आय बढ़ाकर ₹30,000 तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में बस्तर के लगभग 85 प्रतिशत परिवारों की मासिक आय ₹15,000 से कम है। सरकार खेती, पशुपालन, वन उपज, छोटे उद्योग और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने पर काम कर रही है।

सिंचाई सुविधा के विस्तार के लिए ₹2,000 करोड़ से अधिक लागत की दो बड़ी परियोजनाएँ शुरू की जा रही हैं, जिनसे 32,000 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई उपलब्ध होगी। इंद्रावती नदी क्षेत्र में सालभर जल उपलब्धता से किसान धान के साथ-साथ सब्ज़ियाँ, फल और अन्य नकदी फसलें भी उगा सकेंगे।

बस्तर में 'डेयरी मॉडल' को तेज़ी से लागू किया जा रहा है, जिसके तहत आदिवासी परिवारों को दुधारू गाय और भैंस उपलब्ध कराई जाएंगी। इस पहल से महिलाओं और युवाओं को रोज़गार मिलेगा तथा गाँवों में डेयरी केंद्र, दूध संग्रहण, परिवहन और स्थानीय बाज़ार जैसी नई आर्थिक गतिविधियाँ पनपेंगी।

डिजिटल स्वास्थ्य और सेवा डेरा

बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए लगभग 36 लाख लोगों की डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल तैयार की जा रही है। इससे मरीज़ों के उपचार, बीमारी और दवाओं का रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा और चिकित्सकों को समय पर सटीक जानकारी मिल सकेगी। इसका सर्वाधिक लाभ ग्रामीण क्षेत्रों, महिलाओं और बुज़ुर्गों को मिलने की उम्मीद है।

बस्तर में बने लगभग 200 सुरक्षा शिविरों को अब 'सेवा डेरा' के रूप में रूपांतरित किया जा रहा है। इन केंद्रों के ज़रिए ग्रामीणों को राशन, पेंशन, आयुष्मान कार्ड, बैंकिंग, स्वास्थ्य और शिक्षा सहित केंद्र एवं राज्य सरकार की 371 योजनाओं का लाभ एक ही स्थान पर मिलेगा।

पर्यटन, शिक्षा और तकनीक

राज्य सरकार चित्रकोट और बौद्ध धर्म से जुड़े तीर्थस्थल सिरपुर को विश्वस्तरीय पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित कर रही है। बस्तर में वॉटर स्पोर्ट्स, एडवेंचर स्पोर्ट्स और जंगल सफारी जैसी गतिविधियों का विस्तार किया जा रहा है। सिरपुर में ग्लोबल मेडिटेशन सेंटर और संग्रहालय के निर्माण पर भी कार्य जारी है।

अबूझमाड़ और जगरगुंडा में ₹100 करोड़ की लागत से एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही है। इसके साथ 341 पीएमश्री स्कूल, 5,857 स्मार्ट क्लासरूम और 16 स्थानीय भाषाओं में द्विभाषी पुस्तकों के माध्यम से बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। एग्रीस्टैक योजना के तहत 33 लाख से अधिक किसानों को डिजिटल सेवाओं से जोड़ा जा चुका है।

निवेश, उद्योग और निर्यात

मुख्यमंत्री साय ने बताया कि राज्य में 435 सुधार लागू किए गए हैं और सिंगल विंडो सिस्टम को मज़बूत कर निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया गया है। सेमीकंडक्टर क्षेत्र की दो आधुनिक इकाइयाँ स्थापित की जा रही हैं। खेल सामग्री, इलेक्ट्रॉनिक्स, बायो-एथेनॉल, गारमेंट और टेक्सटाइल क्षेत्रों में नए उद्योग लग रहे हैं।

'एक जिला-एक उत्पाद' (ODOP) योजना से स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार मिल रहे हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में फरवरी 2026 तक ₹761.76 करोड़ का निर्यात हुआ, जिसमें खुशबूदार चावल का सर्वाधिक योगदान रहा। राज्य सरकार ने एआई मिशन, पर्यटन मिशन, खेल मिशन, अधोसंरचना मिशन और स्टार्टअप-निपुण मिशन भी प्रारंभ किए हैं, जो युवाओं के लिए उद्यमिता और तकनीक के नए द्वार खोलेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी। ₹30,000 मासिक आय का लक्ष्य तब तक महत्वाकांक्षी ही रहेगा, जब तक आय-वृद्धि के लिए स्पष्ट सत्यापन तंत्र न हो — क्योंकि बस्तर जैसे दूरस्थ, बहु-भाषी और आदिवासी-बहुल क्षेत्र में डेटा संग्रह स्वयं एक चुनौती है। 'सेवा डेरा' मॉडल रचनात्मक है, परंतु 371 योजनाओं को एकीकृत करने के लिए जो प्रशासनिक क्षमता चाहिए, वह छत्तीसगढ़ के दूरदराज़ इलाकों में अभी भी कमज़ोर है। सेमीकंडक्टर और AI जैसे उच्च-तकनीक क्षेत्रों में निवेश स्वागतयोग्य है, किंतु यह देखना होगा कि इसका लाभ वास्तव में स्थानीय आदिवासी युवाओं तक पहुँचता है या केवल बाहरी निवेशकों को।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीति आयोग की 11वीं बैठक में CM विष्णुदेव साय ने क्या प्रस्तुत किया?
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 11 जून 2026 को राष्ट्रपति भवन में आयोजित नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की 11वीं बैठक में नक्सल-मुक्त बस्तर के लिए व्यापक विकास योजना रखी। इसमें आय वृद्धि, सिंचाई, डेयरी, डिजिटल स्वास्थ्य, पर्यटन और सेमीकंडक्टर निवेश शामिल हैं।
बस्तर में मासिक आय ₹30,000 का लक्ष्य कैसे हासिल होगा?
सरकार खेती, पशुपालन, वन उपज, छोटे उद्योग और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से अगले तीन वर्षों में बस्तर परिवारों की मासिक आय ₹30,000 तक पहुँचाना चाहती है। अभी बस्तर के लगभग 85% परिवारों की मासिक आय ₹15,000 से कम है।
बस्तर में सिंचाई के लिए क्या योजना है?
₹2,000 करोड़ से अधिक लागत की दो बड़ी सिंचाई परियोजनाएँ शुरू की जा रही हैं, जिनसे 32,000 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। इंद्रावती नदी क्षेत्र में सालभर जल उपलब्धता से किसान धान के अलावा सब्ज़ियाँ और नकदी फसलें भी उगा सकेंगे।
'सेवा डेरा' क्या है और इससे किसे फायदा होगा?
बस्तर के लगभग 200 पुराने सुरक्षा शिविरों को 'सेवा डेरा' के रूप में विकसित किया जा रहा है। इन केंद्रों पर ग्रामीणों को राशन, पेंशन, आयुष्मान कार्ड, बैंकिंग, स्वास्थ्य और शिक्षा सहित 371 सरकारी योजनाओं का लाभ एक ही स्थान पर मिलेगा।
छत्तीसगढ़ में निर्यात और औद्योगिक विकास की क्या स्थिति है?
वित्त वर्ष 2025-26 में फरवरी 2026 तक ₹761.76 करोड़ का निर्यात हुआ, जिसमें खुशबूदार चावल सबसे बड़ा योगदानकर्ता रहा। राज्य में 435 सुधार लागू हैं, सेमीकंडक्टर क्षेत्र की दो इकाइयाँ स्थापित होंगी और ODOP योजना से स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार मिल रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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