विश्व-2026: 30 अक्टूबर को नई दिल्ली में DRDO की अत्याधुनिक सैन्य तकनीक का अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन
सारांश
मुख्य बातें
भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक और अत्याधुनिक सैन्य प्रणालियों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने के लिए 30 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में 'विश्व-2026' (विजन, इनोवेशन, सिनर्जी, वैल्यूज) का आयोजन किया जा रहा है। रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ इस कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे। इसकी विषयवस्तु 'रक्षा क्षमताओं का प्रदर्शन और वैश्विक साझेदारी को मजबूत करना' रखी गई है।
विश्व-2026 क्या है और इसका उद्देश्य
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य भारत के रक्षा अनुसंधान, तकनीक और उत्पादन में हुई प्रगति को मित्र देशों के सामने रखना और सहयोग के नए रास्ते तलाशना है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और सेंटर फॉर ज्वाइंट वारफेयर स्टडीज (CENJWS) के संयुक्त तत्वावधान में यह कार्यक्रम आयोजित हो रहा है। गौरतलब है कि यह भारत की 'आत्मनिर्भर भारत' रक्षा नीति के अंतर्गत स्वदेशी सैन्य उत्पादन को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
तकनीकी सत्रों में क्या प्रस्तुत होगा
कार्यक्रम के तकनीकी सत्रों में DRDO की विविध क्षेत्रीय उपलब्धियों को केंद्र में रखा जाएगा। इनमें विमानन प्रणालियाँ, थल सेना और नौसेना से जुड़ी प्रणालियाँ, संवेदन एवं संचार तकनीक, मिसाइल प्रणालियाँ, सूक्ष्म इलेक्ट्रॉनिकी, कंप्यूटिंग समाधान और सैनिकों के सहयोग से जुड़ी प्रणालियाँ शामिल हैं। यह आयोजन अंतरराष्ट्रीय भागीदारों को यह दिखाने का अवसर भी देगा कि भारत अपनी रक्षा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए स्वदेशी अनुसंधान पर किस प्रकार निर्भरता बढ़ा रहा है।
किन लोगों की भागीदारी अपेक्षित
कार्यक्रम में रक्षा क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, शिक्षाविद् और कूटनीतिक समुदाय के सदस्यों के शामिल होने की उम्मीद है। एक विशेष परिचर्चा में भारत और मित्र देशों के बीच संयुक्त सहयोग, सैन्य क्षमताओं के विकास और परस्पर लाभकारी साझेदारी की संभावनाओं पर विचार-विमर्श होगा।
वैश्विक रक्षा साझेदारी पर असर
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, 'विश्व-2026' भारत की रक्षा तकनीक को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करने के साथ-साथ भविष्य में संयुक्त अनुसंधान, तकनीकी सहयोग और सैन्य क्षमताओं के विकास के लिए नए द्वार खोलेगा। यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक रक्षा निर्यात बाजार में अपनी उपस्थिति को तेज़ी से विस्तार दे रहा है और कई मित्र राष्ट्रों के साथ रक्षा-तकनीकी समझौतों पर बातचीत चल रही है।
आगे की राह
DRDO का लक्ष्य इस आयोजन के ज़रिए रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भरता को और अधिक बढ़ावा देना तथा मित्र देशों के साथ सहयोग को नई गति देना है। संवाद, नवाचार और साझा प्रयासों को इस दिशा में अहम माना गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मंचों से भारत की रक्षा कूटनीति को दीर्घकालिक मजबूती मिलती है और तकनीकी हस्तांतरण के नए अवसर सामने आते हैं।